- लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट ने आतंकवादी कैंपों पर सटीक हमले कर अपने दल को सफल बनाया
- उन्होंने सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग कर टारगेट्स की पहचान की और गहन योजना बनाकर मिशन को अंजाम दिया
- ऑपरेशन सिंदूर में बिष्ट की यूनिट ने आतंकवादी ठिकानों को तबाह कर भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई को सफल बनाया
हम ऐसे कितने ही सैनिकों को देखते हैं जो असाधारण होते हैं. उनकी बहादुरी ऐसी होती है जो फौज की सिखलाई को भी पार कर जाती है. इंडियन आर्मी के ऐसे ही एक अफसर, लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट से एनडीटीवी ने खास बातचीत की.एक अभियान के दौरान, लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट ने कमांडिंग ऑफिसर के रूप में असाधारण साहस, नेतृत्व तथा कुशल संचालन का परिचय दिया. उन्होंने आतंकवादी कैम्प्स को तबाह कर अपनी यूनिट को शानदार सफलता दिलाई.
अपनी असाधारण परिचालन क्षमता का प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने सैटेलाइट इमेज़री जैसी तकनीक का उपयोग कर टारगेट्स की पहचान की. इसके बाद उन पर सटीक हमले के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट ने गहन योजना बनाई. अपनी ट्रेनिंग और अदम्य साहस के दम पर उन्होंने आतंकवादी शिविरों पर धावा बोल दिया. हमले का ऑर्डर मिलते ही, उन्होंने अंधकार की आड़ में अपनी टुकड़ी को तैनात किया.
अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए, और साथ ही अपने सैनिकों की सुरक्षा की परवाह करते हुए, उन्होंने सटीक निशाने के साथ हमले का नेतृत्व किया और लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट कर दिया. शत्रु की जवाबी गोलाबारी के गंभीर खतरे के बावजूद, उन्होंने अपने अधीन सभी सैनिकों को सुरक्षित एवं समय पर निकाल लिया.
इसके बाद, उन्हें फिर से एक महत्वपूर्ण टारगेट को नष्ट करने का कार्य सौंपा गया. लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट ने बिना किसी देरी के अपनी यूनिट को तैयार किया और भीषण हमले तथा दुश्मन की लगातार गोलीबारी के बीच अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने सैनिकों का नेतृत्व कर मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. शत्रु के समक्ष असाधारण वीरता, दृढ़ नेतृत्व और अद्वितीय साहस का प्रदर्शन करने के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट को “वीर चक्र” से सम्मानित किया गया. उनके मिशन के बारे में एनडीटीवी इंडिया के सीनियर डिफेंस एडिटर राजीव रंजन से बात की.
लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट ने तमाम मिशन सीक्रेट्स का ध्यान रखते हुए एनडीटीवी से बात की. उनसे जब वीर चक्र सम्मान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा,
जब अवार्ड के बारे में मुझे खबर मिली पहले कुछ क्षणों में तो विश्वास ही नहीं हुआ उसके थोड़े पल बाद जब महसूस हुआ तो अत्यंत गर्व और खुशी का एहसास हुआ. यह मेरी व्यक्तिगत नहीं, हमारी पूरी यूनिट और जवानों का योगदान है.
अगला सवाल जो लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट से पूछा गया वो ये था -एक और बड़ा सम्मान आपको मिला है एनडीटीवी इंडियन ऑफ द ईयर अवार्ड. यह हमारे लिए भी गर्व की बात है. लेकिन जब आपको यह सम्मान मिलने की ख़बर आई तो कैसा महसूस हुआ?
इसके जवाब में लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट कहते हैं - एनडीटीवी का इंडियन एयर ऑफ़ द अवार्ड मिला इसमें भी मुझे अत्यंत गर्व और खुशी है. सेना सिर्फ अपने अपने नाम और पहचान के लिए ही नहीं बल्कि कर्तव्य के लिए भी जानी जाती है. इस अवार्ड से भी अत्यंत खुशी है .
लेफ्टिनेंट कर्नल बिष्ट से अगला सवाल ऑपरेशन सिंदूर को लेकर था. उनसे पूछा गया -ऑपरेशन सिंदूर के साथ भारतीय सेना ने पहलगाम के आतंकी हमले का बदला लिया. आप इस पूरे ऑपरेशन को कैसे देखते हैं?
जवाब- इस ऑपरेशन में हमने पूरी डिटेल के साथ प्लानिंग और तैयारी की थी. शुरू में हमारा उद्देश्य बिल्कुल साफ था कि दुश्मन के आतंकी ठिकाने को बर्बाद और नेस्तनाबूद करना है . यही हमारा उद्देश्य था और इसी पर हमने काम किया .
सवाल - यह सब अपने कैसे किया? आतंकियों ने 26 निर्दोष सैलानियो को मार दिया . पहली कार्रवाई कैसे ?
जवाब - जब पहलगाम आतंकी हमला हुआ तो उसे समय मैं छुट्टी पर था . मैंने न्यूज़ में देखा तो रिलाइज हुआ कि हमारी यूनिट एक क्रिटिकल यूनिट को होल्ड पर है. मुझे लग गया था कि हमें कहीं ना कहीं कुछ टास्क जरूर मिलेगा. हमारी यूनिट के सेकंड इन कमान को मैंने तुरंत बताया जैसा कि कुछ हमला हो गया है कि यूनिट को कुछ ना कुछ इंर्पोटेंट टास्क जरूर आएगा . हमारी इनिशियल प्रिपरेशन पहले ही शुरू हो गई थी. शुरू से ही हम मोबिलाइजेशन के लिए तैयार हो गए थे. उसे समय हम लाइन ऑफ कंट्रोल से थोड़ा पीछे थे . उस वक्त हमें आदेश मिला कि आपके इस लोकेशन से उठकर लाइन ऑफ कंट्रोल के पास जाना है . उसके बाद हमने आगे की कार्रवाई लाइन ऑफ कंट्रोल के पास की. मेरा काम यही था अपने जवानों को तैयार रखना है. हथियार को तैयार रखना है.अपने उद्देश्य को हासिल करते हुए जवान और हथियार को सुरक्षित भी रखना है .
सवाल -आतंकी कैंपों पर आप सभी का हमला बेहद सटीक था. वे संभल तक नहीं पाए. इतनी पक्की जानकारी किस तरह जुटाई और कैसे हमले की पूरी योजना बनाई?
जवाब - हमारी भूमिका 7 मई को भी थी . शुरू में 9 टारगेट में से दो टारगेट हमारी यूनिट के थे . बाद में भी 9 मई को एक टारगेट मिला जिसको हमने सक्सेसफुली इंगेज किया .
सवाल - तो आपके पास पूरा फीडबैक आया होगा कहां किस तरह टारगेट को हिट करना है ?
जवाब - फीडबैक तो हायर हेडक्वार्टर मॉनिटर कर रहे थे . आपने सोशल मीडिया में देखा ही होगा . उसमें कई सारी वीडियो आपको देखते ही होंगे . हमारे भी हिट वाले वीडियो है वह भी दिखते हैं . सोशल मीडिया से पता लगा कि हमारे टारगेट पूरी तरह से सही हिट हुए है .
सवाल:यह अंदेशा तो रहा होगा कि पाक सेना जवाबी कार्रवाई करेगी ? आप पहले से तैयार थे ?
जवाब - हमें अंदेशा क्या पूरा यकीन था कि पाकिस्तान का काउंटर हमला जरूर होगा. उसके लिए हमने हर तरह की प्लानिंग कर रखी थी. हमने कंटेजेंसी प्लान तैयार कर रखा था कि जवाबी हमला होने पर क्या करेंगे . उसके लिए डिटेल सिखलाई और प्लानिंग कर रखी थी कि जवान और गन को कैसे सेफ रखेंगे .
सवाल - कह सकते हैं कि पाकिस्तान को जैसा दर्द देना था वैसा ही आपने किया ? वह आप लोगों को कुछ नहीं बिगाड़ पाया यह कैसे हुआ ?
जवाब - हमने अपनी प्लानिंग और प्रिपरेशन के समय सारी चीज दिमाग में रखी थी कि आपको फायर करना हो तो कैसे करेंगे ? किस पोजीशन से फायर करोगे कि दुश्मन को अहसास तक ना हो . यह भी इंतजाम करके रखा हुआ था कि फायर करने के बाद हमें कैसे सुरक्षित रहना है ? गन का भी हमने सेफ प्लेस बना रखा था इसलिए हम लोग कंफर्टेबल थे कि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकी
सवाल- पहलगाम आतंकी हमले के दौरान महिलाओं के जो आंसू निकले. उनकी सिंदूर मिटाने की कोशिश की गई तो उसके बाद आप जब फायर करते होंगे तो कैसा लगता होगा
जवाब - जिस समय हम फायर कर रहे थे हमारे टारगेट तकरीबन 30- 40 -50 किलोमीटर दूर था . अपने जवानों तक को पूरा डिटेल नहीं बताया था . बस यह डिटेल उनको दी गई थी कि कहां और कैसे फायर करना है ? सीक्रेसी की वजह से बहुत सारी चीज सबको नहीं बताई गई थी . बाद में उनका यह बताया कि यह टारगेट था और आपने बिल्कुल सटीक हमला किया तो बहुत अच्छा लगा. जवानों को भी बहुत अच्छा लगा कि उन्होंने जो काम किया है वह पूरा देश देख रहा है .
सवाल - भारतीय सेना में जो जोश और उत्साह है, वह तो स्थायी है या पाकिस्तान की हरकतें देखकर उसमें और उबाल आ जाता है?
जवाब - आपको बताना चाहूंगा कि भारतीय सेना बहुत ही परिपक्व और डिसिप्लिन फोर्स है . वह किसी को अननेसेसरी ट्रबल नहीं करते हैं. लेकिन जब भी देश की शान के खिलाफ कुछ होता है तो जवाबी कार्रवाई जरूर की जाती है . जब भी कोई आपदा होती है देश के अंदर जरूरत होती है सीमा पर भी जरूरत होती है तो आर्म्ड फोर्सेज की और ही देखा जाता है . जोश तो है लेकिन जब भी कोई देश के खिलाफ काम करता है तो जोश एक संकल्प में बदल जाता है यह अपने ऑपरेशन सिंदूर में जरूर देखा होगा. आपने देखा होगा पाकिस्तान के खिलाफ हमारी जवाबी कार्रवाई कितनी सफल रही.
सवाल -सुना है कि आपके एक अधिकारी को लड़ाई के वजह से शादी टालनी पड़ी ?
जवाब - उस समय हलात ही कुछ ऐसे थे मेरे दो अधिकारियों की शादी 5 मई को थी . एक अधिकारी तो पहले फेज में ही छुट्टी पर चला गया था. बाद मैंने सोचा था कि और छुट्टी ले लूंगा. दूसरे अधिकारी ने सोचा था की शादी के समय ही सारी छुट्टी लूंगा. एक अधिकारी को ही मैं छुट्टी पर भेज पाया. पहलगाम आतंकी हमले के समय से ही वह छुट्टी पर था. दूसरे अधिकारी ने हालात और जिम्मेदारी को देखते हुए उसने वोलंटरी खुद ही तय किया की छुट्टी ऑपरेशन के बाद ही काटेगा. तो उसकी शादी 5 मई के बजाय मई के अंत में हुई .
सवाल - आपके एक जवान के बारे में हमने सुना कि पाकिस्तान की ओर से गोले बरस रहे थे फिर भी वह ड्यूटी पर तैनात रहा ?
जवाब - यह घटना 7 मई की है. हम लोग जवाबी हमला करके वापस आ गए थे. अपने विशेष उपकरण को सेफ लोकेशन में डाल दिया था . दुश्मन का जवाबी हमला हम पर शुरू हो गया . उनके आर्टिलरी के शेल काफी तादाद में गिर रहे थे. शुरू में 500- 600 मीटर दूर गिर रहे थे बाद में नजदीक आकर गिरने लगे. हमारा एक गार्ड अग्नि वीर था. वह ड्यूटी पर था. उसके गार्ड कमांडर ने कहा कि आप अंदर चले जाओ. प्रोटेक्शन वाले शेल्टर में चले जाओ.लेकिन उसका जज्बा ऐसा था कि उसने बोला कि मैं गन का ख्याल रखूंगा यहां से गन को छोड़कर नहीं जाऊंगा. यह गन और सेना के प्रति एक जज्बा दिखाता है.
सवाल - अगर पाकिस्तान फिर से कोई हरकत करता है तो क्या आप उसे सबक सिखाने के लिए तैयार हैं ?
जवाब - आपने तो चीफ आर्मी स्टाफ की बात सुनी होगी यह तो ट्रेलर था पूरी मूवी अभी बाकी है . हम तो पूरी मूवी के लिए भी तैयार है . इसका अपने रिजल्ट देख लिया मौका मिलेगा तो उसका भी नतीजा देखेंगे. सेना मुंहतोड़ जवाब देगी और हमें जो टास्क दिया जाएगा उसको बखूबी निभाएगी .
सवाल-देश के लोगों से क्या कहना चाहेंगे?
जवाब - देश के लोगों से यही कहूंगा कि अभी आपने सिंदूर में देखा कि पूरा देश ने देखा कि एक कॉमन एनिमी पाकिस्तान के अगेंस्ट खड़ा रहा.सेना ने तो अपना काम किया ही . सारे देशवासियों ने भी पूरा योगदान दिया चाहे फॉल्स नेगेटिव को काउंटर करने की बात हो . तो मैं देशवासियों से बस यही कहना चाहूंगा कि देश से प्रेम करिए . आपका प्रेम समर्पण भाव से होना चाहिए यह केवल चिल्लाकर या बोलकर नहीं होता है बल्कि कर्तव्य से होता है . मैं बस यही कहना चाहूंगा कि हम अपने कर्तव्य के माध्यम से देश को मजबूत और सुदृढ़ बनाए.














