- मणिकर्णिका घाट पर सौंदर्यीकरण के नाम पर तोड़फोड़ हुई, जिसके विरोध में कई नेताओं पर मुकदमा दर्ज हुआ है.
- सरकार का दावा है कि मूर्तियां संरक्षित की गईं, जबकि विपक्ष ने विरासत की क्षति का आरोप लगाया है.
- महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 18वीं सदी में मणिकर्णिका घाट सहित कई घाटों का निर्माण कराया था.
Manikarnika Ghat Row: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के आस-पास हुई तोड़फोड़ को लेकर इन दिनों भारी बवाल मचा है. प्रशासन और सरकार का कहना है कि यह तोड़फोड़ मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण के लिए हो रहा है. लेकिन कुछ साधु-संत, विपक्षी नेता और बीजेपी से जुड़े कुछ नेताओं का दावा है कि निर्माण के नाम पर विरासत और इतिहास से छेड़छाड़ की जा रही है. मणिकर्णिका घाट के आस-पास हुई तोड़फोड़ की कई तस्वीरें-वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है. इसमें कई तस्वीरों और वीडियो को फर्जी बताते हुए वाराणसी प्रशासन ने 8 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. इसमें कांग्रेस नेता पप्पू यादव और AAP सांसद संजय सिंह भी शामिल हैं.
दूसरी ओर इस मामले में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस मंदिरों को तोड़ने का सफेद झूठ फैला रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, "जब काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण हो रहा था, तब भी कुछ लोगों ने साजिशें रची थीं। यहां तक कि जिन वर्कशॉप में मूर्तियां बनती हैं, वहां से टूटी हुई मूर्तियों के अवशेष लाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए और सफेद झूठ फैलाया गया कि मंदिर तोड़े जा रहे हैं."
महारानी अहिल्याई होल्कर की मूर्तियों को लेकर नाराजगी
मणिकर्णिका घाट के आस-पास हो रहे काम पर शुरू हुए विवाद में अहिल्याबाई होल्कर की भी खूब चर्चा हो रही है. दावा किया जा रहा है कि अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को तोड़ दिया गया है. हालांकि प्रशासन इस दावे को नकार रहा है. यूपी सरकार का दावा है कि मूर्तियां तोड़ी नहीं गईं, बल्कि उन्हें संरक्षित करके रखा गया है. वहीं विपक्ष का आरोप है कि हाइड्रा की गड़गड़ाहट के साथ कई मूर्तियां और मणियां तोड़ दी गईं. मलबे में इन मूर्तियों के अवशेष भी देखे गए हैं.
अहिल्याबाई होल्कर के बनवाए चबूतरे और मूर्ति हटाने पर हंगामा
मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर का नाम कई तीर्थ स्थलों के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए लिया जाता है. अहिल्याबाई ने काशी के मणिकर्णिका घाट सहित कई घाटों का निर्माण कराया, जो उनकी धर्म और लोक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाता है. उन्होंने 18वीं सदी में इस घाट का निर्माण कराया था, जिसे हाल ही में पुनर्विकास के दौरान विवादों का सामना करना पड़ा, जहां उनके बनवाए चबूतरे और मूर्ति को हटाने पर हंगामा हो रहा है.
भगवान शिव की अनन्य उपासक थी महारानी अहिल्याबाई
अहिल्याबाई शिव की अनन्य उपासक रहीं. होश संभालने के बाद से मृत्यु शय्या तक महादेव के लिए समर्पित. पति, ससुर और बेटे की मौत के बाद उन्होंने राज्य किसी मनुष्य को नहीं, भगवान शंकर को सौंप दिया. वे स्वयं को शासक नहीं, सेविका मानती थीं. यहीं से शुरू हुआ वह अद्भुत विधान.
अहिलाबाई होल्कर के हर राजकीय आदेश के शीर्ष पर लिखा जाता था “हुजूर शंकर”. यह परंपरा महाराजा यशवंतराव होल्कर द्वितीय के समय तक चली. यही कारण था कि उनके समय के सिक्कों पर शिवलिंग अंकित हुआ करता था. जितनी शिवभक्ति, उतनी ही मृदु. 13 मार्च 1767 को उन्होंने रियासत की कमान संभाली, जनता की गाढ़ी कमाई की रक्षा के लिए एक-एक आने का हिसाब रखा. एक बार तो पति को भी अग्रिम वेतन देने से इंकार कर दिया.
अहिल्याबाई ने 65 मंदिर, कई धर्मशालाएं बनवाए
- 28 वर्षों के शासन में अहिल्याबाई होल्कर ने देशभर में 65 मंदिर, धर्मशालाएं, सड़कें, तालाब और नदियों के भव्य घाट बनवाए. कहते हैं, शिव की इतनी अनन्य भक्त थीं कि रियासत का हर ऑर्डर “हुजूर शंकर” से शुरू होता था. और इसी शिव-समर्पित जीवन की छाया काशी में सबसे गहरी पड़ती है.
- 1771 से 1785 के बीच, देवी अहिल्याबाई ने काशी में मणिकर्णिका घाट सहित पांच घाटों का निर्माण कराया. उस दौर में इस घाट पर हजारों रुपये खर्च हुए जब एक-एक आने का हिसाब रखने वाली अहिल्या के लिए यह सिर्फ निर्माण नहीं, धर्म और लोककल्याण का संकल्प था.
- आज उसी घाट का एक हिस्सा श्मशान घाट के “आधुनिकीकरण” प्रोजेक्ट के तहत तोड़ने के आरोप लगे हैं. 29,350 वर्ग मीटर क्षेत्र में हो रहे इस निर्माण में 15 से 20 मीटर गहरी पाइलिंग कराई जा रही है, क्योंकि जमीन दलदली है और बाढ़ से बचाव ज़रूरी बताया गया है.
विवाद पर राज्य सरकार का क्या है कहना?
वहीं राज्य सरकार का कहना है कि विकास के काम को बदनाम करने के लिए एआई से वीडियो और फोटो का इस्तेमाल किया गया है. सीएम योगी ने बाकायदा काशी आकर पत्रकारों को संबोधित करके सरकार का पक्ष रखा. सीएम के संबोधन के बाद वाराणसी पुलिस ने धड़ाधड़ आठ मुक़दमे कर दिए. ये मुक़दमे आईटी एक्ट के तहत किये गए हैं. फिलहाल वाराणसी पुलिस इन मुकदमों के आधार पर नामज़द आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है.
अहिल्याबाई के वंशज और ट्रस्ट के अध्यक्ष का क्या है कहना?
ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंतराव होलकर, जो अहिल्याबाई के वंशज हैं, उन्होंने एक विस्तृत बयान में कहा, “हमें बहुत दुख और गुस्से के साथ यह बताना पड़ रहा है कि वाराणसी में ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को तोड़ दिया गया है. पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा 1791 में पहली बार बहाल की गई यह जगह मा साहेब के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी. देशभर में उनके द्वारा बनाए या बहाल किए गए सैकड़ों स्थलों में से यह उन बहुत कम स्थलों में से एक था जहां उन्होंने पवित्र मां गंगा की पूजा में अपनी छवि वाली मूर्तियां स्थापित की थीं.”
तोड़-फोड़ के बीच मलबे में पड़ी महारानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति. सोशल मीडिया इसे कई नेताओं ने शेयर किया है.
'बेतरतीब विकास के मलबे में पड़ी हैं महारानी की मूर्तियां'
ट्रस्ट ने आगे कहा, “10 जनवरी 2026 को बिना किसी उचित सूचना या चेतावनी के, कथित तौर पर नगर निगम अधिकारियों के निर्देश पर, मणिकर्णिका घाट को कुछ ही घंटों में ध्वस्त कर दिया गया. यह स्थल के इतिहास या महत्व की पूरी तरह से अनदेखी करते हुए किया गया. खासगी ट्रस्ट और होल्कर परिवार इस शर्मनाक और अपमानजनक कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं. देवी अहिल्याबाई की पवित्र और ऐतिहासिक मूर्तियां… अब इस बेतरतीब विकास के मलबे में पड़ी हैं.”
ट्रस्ट ने कहा कि अहिल्या की विरासत और मणिकर्णिका घाट के सबसे बड़े संरक्षक के तौर पर उसने मूर्तियों को वापस पाने के लिए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है और जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जा रही है.
ट्रस्ट ने कहा- योजनाबद्ध विकास के खिलाफ नहीं
ट्रस्ट ने यह भी साफ किया कि वे संवेदनशील और योजनाबद्ध विकास के खिलाफ नहीं हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास-विजन की तारीफ करते हुए कहा कि लेकिन “मणिकर्णिका घाट का स्थानीय स्तर पर डिमोलिशन… इस पवित्र महिला और पवित्र गंगा नदी के किनारे उनके द्वारा बहाल किए गए घाट के प्रति उचित सम्मान के साथ किया जाना चाहिए था.”
फिर ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री व यूपी मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि, इस लापरवाही की पूरी जांच हो, संबंधित लोग जवाबदेह ठहराए जाएं, मूर्तियों को सुरक्षित रूप से बरामद कर ट्रस्ट को सौंपा जाए, और नए विकास में मूर्तियों को उनके सही स्थान पर बहाल करने के लिए ट्रस्ट के साथ सीधा समन्वय किया जाए. ट्रस्ट ने कहा इन कदमों से “देवी अहिल्याबाई की आत्मा एक बार फिर पवित्र गंगा के किनारे पूजा करना जारी रख सकेगी.”
मां अहिल्या का काशी से रिश्ता साधारण नहीं, आत्मिक था. उन्होंने यहां भव्य काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया और गंगा तट पर कई घाट, चबूतरे और महल बनवाए, जो आज होलकरवाड़ा के नाम से जाने जाते हैं. यहीं मां गंगा की प्राचीन और दुर्लभ मूर्तियां भी स्थापित की गईं. ये समूची विरासत आज भी खासगी ट्रस्ट के संरक्षण में है.
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