आंखोंदेखी: धराली बहा तो रोया मुखबा! आवाज देते रहे, लेकिन... चश्मदीदों की जुबानी, सुनें पूरी कहानी

मुखबा गांव में घबराए हुए लोग हांफते हुए प्रभावित इलाकों में अपने रिश्तेदारों को फोन करके ये जानने की कोशिश करते हुए दिखे कि सब ठीक है या नहीं. पर जवाब सुन कर दिल धक्‍क से बैठ गया.

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  • धराली और मुखबा गांव के बीच बहने वाले नाले में अचानक आई तबाही ने पूरे इलाके को प्रभावित कर दिया है.
  • मुखबा गांव के लोगों ने तेज बहाव और पत्थरों की आवाज सुनकर पड़ोसी धराली गांव को चेतावनी देने की कोशिश की.
  • लोग प्रभावित इलाकों में अपने रिश्तेदारों से संपर्क कर हालचाल जानने की कोशिश कर रहे थे, पर संपर्क मुश्किल था.
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उत्तरकाशी:

'ऐसी तबाही पहले नहीं देखी! मंगलवार डेढ़ बजे ये तबाही आई और सबकुछ खत्‍म हो गया. किसी जाननेवाले से संपर्क नहीं हो पा रहा. ये 5 अगस्‍त की तारीख ही मनहूस है. 1978 में इसी तारीख को गजोरिया में बाढ़ आई थी. अब धराली में आया. हम मुखबा गांव से तबाही का जो पूरा मंजर देख रहे हैं, हमसे देखा नहीं जा रहा.' 

इस खौफनाक मंजर के बारे में बताते हुए मुखबा गांव के 45 वर्षीय शख्‍स फफक कर रो पड़ते हैं. वो उस खौफनाक मंजर के चश्‍मदीद हैं. अपने गांव मुखबा से उन्‍होंने धराली को बहते हुए देखा और मन में पड़ोसी गांव धराली के लिए कुछ नहीं कर पाने का मलाल है.  

मुखबा गांव के ही एक अन्‍य चश्‍मदीद बुजुर्ग सुभाष चंद्र सेमवाल कहते हैं कि खीर गंगा में सैलाब को बढ़ते हुए हम अपनी आंखों से देख रहे थे. परिवार के लोगों ने जोर-जोर से चिल्‍लाकर धराली गांव वालों को सावधान करना चाहा, लेकिन कुछ ही सेकेंड में सब तबाह हो गया. 

एक ओर धराली, दूसरी ओर मुखबा

दरअसल, जिस नाले होकर तबाही आई, उसके एक ओर धराली गांव है और दूसरी ओर है मुखबा. इसे लोग गंगा का मायका भी कहते हैं. मान्‍यता है कि गंगोत्री धाम के कपाट जब बंद हो जाते हैं तो मां गंगा, इसी मुखबा गांव में निवास करती हैं. मां गंगा का वो मायका आज शोक में है. उसकी भी आंखें नम होंगी और उसे पड़ोसी गांव धराली के लिए कुछ नहीं कर पाने का मलाल है. 

सीटी बजाई, चिल्‍लाए, सचेत करना चाहा 

60 वर्षीय सुभाष चंद्र सेमवाल ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा भयावह दृश्य कभी नहीं देखा था. उन्होंने बताया कि दोपहर में उन्हें तेज गति से पानी और पत्थरों के बहने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद वह और उनके परिवार के अन्य सदस्य बाहर आ गए.

समाचार एजेंसी पीटीआई से उन्होंने कहा, 'जब हमने खीर गंगा में भारी मात्रा में पानी बहते देखा, तो हम सब घबरा गए. फिर हमने धराली बाजार में रहने वाले लोगों को सचेत करने के लिए सीटी बजाई और उन्हें वहां से भाग जाने के लिए चिल्लाया. 

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बताते-बताते नम हो गई सेमवाल की आखें 

नम आंखों से सेमवाल ने बताया कि उनकी आवाज सुनकर कई लोग होटल से बाहर भागे लेकिन तेज बहाव में बहते पानी ने उन्हें भी अपनी चपेट में ले लिया. 

मुखबा गांव में घबराए हुए लोग हांफते हुए प्रभावित इलाकों में अपने रिश्तेदारों को फोन करके ये जानने की कोशिश करते हुए दिखे कि सब ठीक है या नहीं. पर जवाब सुन कर दिल धक्‍क से बैठ गया. वीडियो में उधर से एक आवाज सुनाई दे रही है, 'सब कुछ खत्म हो गया है.' 

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