भारत-अमेरिका ट्रेड डील पॉलिटिक्स: तो ये है किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस के कॉन्फिडेंस का राज

Congress On India-US Trade Deal: भोपाल में कांग्रेस की किसान चौपाल में आए किसान यूएस ट्रेड डील को लेकर आशंकित नज़र आ रहे थे. हालांकि किसानों के सामने बीज–खाद, फसल बीमा, एमएसपी से जुड़ी समस्या ज़्यादा बड़ा मुद्दा है. लेकिन ट्रेड डील को लेकर उनकी स्पष्ट राय है कि भारत का ग़रीब किसान अमेरिका के किसानों का मुक़ाबला नहीं कर सकता.

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस का आरोप.
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  • कांग्रेस यूएस ट्रेड डील के खिलाफ किसानों को संगठित कर विरोध प्रदर्शन और किसान चौपाल आयोजित कर रही है
  • राहुल गांधी ने ट्रेड डील को देश और किसान विरोधी बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को इसे रद्द करने की चुनौती दी
  • कांग्रेस पीएम मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए आरोप लगा रही है कि उन्होंने देशहित से समझौता किया है
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नई दिल्ली:

भारत–अमेरिका ट्रेड डील के ख़िलाफ कांग्रेस किसानों को गोलबंद करने में जुटी हुई है. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी का आरोप है कि इस डील से भारत के किसान तबाह हो जाएंगे और राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव में पीएम मोदी ने देश के हितों से समझौता कर लिया है. हालांकि सरकार की तरफ़ से यह स्पष्ट किया गया है कि ट्रेड डील में अन्नदाता के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं. लेकिन कांग्रेस को इस डील में बड़ा सियासी फ़ायदा नज़र आ रहा है. यही वजह है कि इस डील के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने उन राज्यों में किसान चौपाल और विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है, जहां बड़े पैमाने पर सोयाबीन, कपास, मक्का, मूंगफली आदि की खेती होती है.

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राहुल ने ट्रेड डील को बताया देश और किसान विरोधी

किसान चौपाल की शुरुआत कांग्रेस ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज्य मध्यप्रदेश से की. भोपाल में राहुल गांधी ने यूएस ट्रेड डील को देश और किसान विरोधी बताते हुए पीएम मोदी को डील रद्द करने की चुनौती दे दी. भोपाल के चौपाल से कांग्रेस उत्साहित है. अब मार्च में महाराष्ट्र के यवतमाल और राजस्थान के श्रीगंगानगर में किसान चौपाल आयोजित की जाएगी.

भोपाल में कांग्रेस की किसान चौपाल में आए किसान यूएस ट्रेड डील को लेकर आशंकित नज़र आ रहे थे. हालांकि किसानों के सामने बीज–खाद, फसल बीमा, एमएसपी से जुड़ी समस्या ज़्यादा बड़ा मुद्दा है. लेकिन ट्रेड डील को लेकर उनकी स्पष्ट राय है कि भारत का ग़रीब किसान अमेरिका के किसानों का मुक़ाबला नहीं कर सकता. इस रैली में सोयाबीन के कुछ ऐसे किसान भी मिले जिन्होंने खुद को बीजेपी समर्थक बताते हुए कहा कि उन्हें ट्रेड डील से डर लग रहा है. किसानों के बीच इस ऊहापोह में कांग्रेस को वापसी का मौका नज़र आ रहा है. इसीलिए निशाने पर सीधे पीएम मोदी को लिया जा रहा है. 

पीएम मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक लगातार एक नारा लगा रही है PM IS COMPROMISED ! राहुल गांधी यह संदेश देना चाहते हैं कि ट्रेड डील में पीएम मोदी ने अमेरिका के सामने भारत के हितों से समझौता कर लिया है. राहुल गांधी एप्स्टीन फाइल का हवाला देकर आरोप लगा रहे हैं कि पीएम मोदी को ब्लैकमेल किया जा रहा है. कुल मिलाकर राहुल गांधी पीएम मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके जवाब में बीजेपी ने नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी पर अपने समय में देश हित को कोम्प्रोमाइज़ करने का आरोप लगा रही है. 

इससे पहले राहुल गांधी ने राफेल डील में घोटाले का आरोप लगाकर “चौकीदार चोर है” का नारा दिया था. इसकी चर्चा खूब हुई, लेकिन कांग्रेस को कोई खास फायदा नहीं हुआ. बीते ग्यारह साल में राहुल गांधी ने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताने से लेकर कोरोना प्रबंधन, लद्दाख में कथित चीनी कब्जे और ऑपरेशन सिन्दूर पर ब्रेक लगाने को लेकर पीएम मोदी को खूब निशाना साधा है. लेकिन कोई भी तीर निशाने पर नहीं लगा. 

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सिर्फ दो मुद्दों पर बैकफुट पर आई बीजेपी

अब तक मुख्य रूप से केवल दो ऐसे मुद्दे रहे हैं जिनपर पीएम मोदी को बैकफुट पर जाना पड़ा है और राहुल गांधी हावी रहे हैं. 2015 की शुरुआत में मोदी सरकार 2013 के ज़मीन अधिग्रहण क़ानून में संशोधन लेकर आई थी. इसके तहत विकास परियोजनाओं में तेज़ी का हवाला देते हुए ज़मीन अधिग्रहण से जुड़े कुछ प्रावधानों में ढील देने का प्रस्ताव था. सरकार पहले अध्यादेश लेकर आई और बाद में विधेयक. लेकिन राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं था. विपक्ष और किसान संगठनों के विरोध के बाद सरकार ने अपने हाथ पीछे खींच लिए. इसके बाद जून 2020 में मोदी सरकार कृषि से जुड़े तीन अध्यादेश लेकर आई और बाद में इसने क़ानून का रूप लिया. लेकिन पंजाब और हरियाणा के किसानों की दिल्ली सीमा पर साल भर चली मोर्चाबंदी और विपक्ष के दबाव में पीएम मोदी ने तीनों क़ानूनों को वापस लेने का एलान किया. 

देश की ज्यादातर आबादी खेती पर निर्भर है. ऐसे में किसानों का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक तौर पर संवेदनशील रहा है. यही वजह है कि पूर्ण बहुमत के बावजूद दो बार इस मुद्दे पर मोदी सरकार को झुकना पड़ा. 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला और मोदी सरकार जेडीयू, टीडीपी जैसे सहयोगियों के भरोसे पर टिक गई. ऐसे में कांग्रेस के रणनीतिकारों का लगता है कि यूएस ट्रेड डील को लेकर किसानों के मोर्चे पर मोदी सरकार की लगातार घेरेबंदी कर बीजेपी को और नीचे लाया जा सकता है. खास कर मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जहां बीजेपी का बड़ा जनाधार है. ट्रेड डील के ख़िलाफ़ कांग्रेस की मुहिम की पहली परीक्षा दो–तीन सालों बाद होने वाले गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान के विधानसभा चुनाव में होगी. तीनों राज्यों में बीजेपी की ही सरकार है. अगर किसानों के लिए खेती मुनाफे का सौदा रहा यानी उन्हें फसल की सही कीमत मिली तो फिर कांग्रेस की कवायद पूरी तरह कामयाब नहीं होगी. लेकिन कांग्रेस को लगता है कि अगर किसान असंतुष्ट रहे तो “ट्रेड डील” आग में घी का काम कर सकती है.

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