- भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक हफ्ते में तीन बड़ी अच्छी खबरें सामने आई हैं
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लागू टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया है
- पिछले दिनों भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एक बड़ी व्यापार डील हुई थी, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील' कहा गया
दुनियाभर में भारत का डंका तो पहले से ही बज रहा है, अब उसे और आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. कई मोर्चों पर देश पहले से ही आगे है अब इस फेहरिस्त में और भी कई चीजें जुड़ गई हैं, वो भी महज एक हफ्ते के भीतर. देश की इकोनॉमी को लेकर एक हफ्ते के भीतर तीन गुड न्यूज सामने आी हैं. पहला यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड डील, फिर धुरंधर बजट और इसके बाद अब अमेरिकी टैरिफ का कम किया जाना. आर्थिक मोर्चे पर ये तीनों खबरें देश के लिए किसी बड़ी खुशी से कम नहीं हैं.
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ट्रंप ने भारत के लिए घटाया टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी से टेलीफोन पर बातचीत के बाद भारत पर से टैरिफ कम करने का ऐलान कर दिया. उन्होंने साफ किया कि अब भारत पर सिर्फ 18 फीसदी टैरिफ ही लगेगा. मतलब अब टैरिफ की टेंशन भी खत्म हो गई. बता दें कि ट्रंप ने 31 जुलाई, 2025 को भारत पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. उन्होंने भारतीय उत्पादों के अमेरिका में होने वाले निर्यातों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाकर चौंका दिया था.
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भारत-EU के बीच मडर ऑफ ऑल डील
आर्थिक मोर्चे पर भारत के लिए ये खुशखबरी ऐसे समय पर आई है जब कुछ दिन पहले ही भारत और यूरोपियन यूनियन ने एक बड़ी व्यापार डील का ऐलान किया था. इस डील को दोनों ने मदर ऑफ ऑल डील कहा था. इस डील का मकसद किसानों और छोटे उद्योगों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच को आसान बनाना है. जिससे मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा हो सकें और सर्विसेज सेक्टर के बीच सहयोग को और मजबूत किया जा सके. सभी जानते हैं कि यूरोपियन यूनियन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा एकल व्यापारिक साझेदार है. ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुताबिक, ट्रेड डील लंबे समय में अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर साबित होगी. इससे न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा बल्कि बाजार में स्थिरता आएगी. इससे चीन को तगड़ा झटका भी लग सकता है. वहीं भारत-ईयू का द्विपक्षीय व्यापार 41% से 65% तक बढ़ सकता है.
धुरंधर बजट से मिली आर्थिक मजबूती
1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 देश के सामने पेश किया. इस बजट को भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य का रोडमैप माना जा रहा है. इसमें आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल क्रांति की झलक दिखाई दी. इस बजट को धुरंधर बजट कहा गया. इसके पीछे की वजह यह थी कि इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर, AI और स्टार्टअप्स, रेयर अर्थ के लिए प्लान, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर, हेल्थ और फार्मा, एमएसएमई समेत अन्य सेक्टर्स पर खास फोकस रहा. सरकार का फोकस वैश्विक अस्थिरता के माहौल और घरेलू मोर्चे की मजबूती पर था. सरकार ने दूरगामी लक्ष्यों पर फोकस करते हुए 'विकसित भारत 2047' तक अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का माद्दा इस बजट में दिखाया. इसीलिए इसे धुंधर बजट कहा गया.
महज एक हफ्ते के भीतर भारत की इकोनॉमी के लिए ये तीनों खबरें बहुत ही बढ़िया मानी जा रही हैं. ईयू डील हो गई और देश के विजन का बजट भी पेश हो गया. जिसके बाद सिर्फ टैरिफ का ही मुद्दा बचा था. लेकिन अब यह टेंशन भी ट्रंप ने खत्म कर दी है. भारत और अमेरिका के बीच डील हुई और ट्रंप ने ऐलान कर दिया कि 25 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत किया जाता है, वहीं भारत रूस के बजाय वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा है.













