यूपी पंचायत चुनाव मई-जून में कराने की दिशा में बड़ा अपडेट आया है. उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत मतदाता सूची इसी महीने आ सकती है. पंचायती राज विभाग की जानकारी के मुताबिक, यूपी में फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ग्राम पंचायतों की मतदाता सूची भी 22 अप्रैल को जारी हो सकती है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव को लेकर होने वाली सुनवाई के पहले सरकार की ओर से ये बड़ी गतिविधि हुई है. इसके बाद ग्राम पंचायतों के आरक्षण का मुद्दा भी जल्द सुलझ गया तो जल्द चुनाव भी कराए जा सकते हैं.
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और संवैधानिक प्रावधानों के तहत समय से चुनाव कराने की मांग की गई है. हालांकि राज्य में पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं होने से से ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत चुनाव और जिला पंचायत चुनाव आरक्षण को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है. नगर निकाय चुनाव 2022 के समय गठित ओबीसी कमीशन की तीन साल की समयसीमा समाप्त हो चुकी है. सरकार की ओर से ओबीसी आयोग का गठन करना है, जिसके बाद जिलावार समीक्षा के तहत सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा.
कहां कितनी सीटें
ग्राम पंचायत-57965
क्षेत्र पंचायत - 826
जिला पंचायत- 75
Panchayat Chunav in Uttar Pradesh
गौरतलब है कि हाईकोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा था कि क्या वो तय समय में चुनाव करा पाएगा. ऐसे में आयोग अपनी ओर से चुनाव मई जून में कराने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता. ऐसे में निर्वाचन आयोग ने 17 मार्च 2026 से 21 अप्रैल तक मतदाता सूचियों के कंप्यूटरीकरण के बाद मतदान स्थलों के वार्डों की मैपिंग, वोटरलिस्ट की डाउनलोडिंग और फोटोकॉपी सभी संबंधित पक्षों को देने की समयसीमा तय की है. इसके बाद मतदाता सूची का आम जनता के लिए अंतिम प्रकाशन 22 अप्रैल को कर दिया जाएगा. मतदाता अपने पंचायत क्षेत्र के अनुसार, इस सूची में अपना नाम चेक कर सकते हैं. ये सूची ग्राम प्रधान, बीएलओ और अन्य जरूरी जगहों पर उपलब्ध होगी. अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं हो तो वो विशेष अभियान के तहत अपना नाम जुड़वाने के लिए अनुरोध कर सकता है.
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सरकार की ओर से क्या कदम बाकी
यूपी पंचायत चुनाव को लेकर सरकार की ओर से ओबीसी कमीशन का गठन किया जाना है. ओबीसी कमीशन को पंचायत चुनाव आरक्षण के लिए सभी 75 जिलों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के अलावा पिछड़ा वर्ग की मौजूदा स्थिति का आकलन करना होगा. इसमें कम से कम तीन चार महीने का समय लग सकता है. अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए बड़े दल पहले पंचायत चुनाव कराने से हिचकते हैं. पंचायत चुनाव के दौरान गुटबाजी के साथ दलीय मर्यादाएं तार-तार हो जाती हैं.














