भारत-पाकिस्तान मैच पर उद्धव ठाकरे ने सिंदूर की याद दिलाई तो फडणवीस ने मियांदाद की

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत दौरे पर भी ठाकरे ने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए और कहा, "आप शेख हसीना को भारत बुलाते हैं, जबकि बांग्लादेश का विरोध करते हैं. ये दोहरी नीति क्यों?"

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  • उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि चुनाव पूरी ईमानदारी से कराए जाएं तो महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन जीत नहीं सकता.
  • उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि चुनाव में वोट चोरी रोकने के लिए पूरी सावधानी बरती जाए.
  • उद्धव ने हिंदी भाषा को जबरन थोपे जाने का विरोध करते हुए भाषाई सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया.
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शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को दावा किया कि अगर चुनाव ईमानदारी से कराए जाएं, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत महायुति गठबंधन को महाराष्ट्र में जीत नहीं मिल सकती. उद्धव ने एशिया कप में भारतीय टीम को पाकिस्तान के साथ खेलने की अनुमति देने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना भी की.

उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, "हमारे देश की टीम अब पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलेगी, तो आपका गरम सिंदूर कहां गया?"

इस पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर पलटवार किया. मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आप ही थे, जिन्होंने जावेद मियांदाद को अपने घर पर खाने पर बुलाया था. उन्हें पहले खुद को आईने में देखना चाहिए. मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता.

अपनी पार्टी से संबद्ध शिक्षक संघ, महाराष्ट्र राज्य शिक्षक सेना के एक कार्यक्रम में शनिवार को उद्धव ने कहा कि चुनाव कार्य में लगाए गए शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ‘वोटों की चोरी' नहीं हो. उद्धव ने कहा, ‘‘अगर चुनाव ईमानदारी से कराए जाएं, तो वे (महायुति) नहीं जीत सकते, महाराष्ट्र में तो बिल्कुल नहीं. राहुल गांधी ने उजागर कर दिया है कि उन्होंने कैसे वोट चुराए.''

भाषा विवाद पर रखा पक्ष

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 288 में से 235 सीट पर जीत दर्ज की थी.साथ ही उद्धव ठाकरे ने हिंदी भाषा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया. उद्धव ने कहा कि उन्हें किसी भाषा या देश के प्रति कोई विरोध नहीं है, लेकिन किसी भाषा को जबरन थोपे जाने का विरोध है. ठाकरे ने कहा, "जब मैं दिल्ली गया था, वहां मुझसे पूछा गया कि आप हिंदी का विरोध क्यों करते हैं? मैंने कहा, अगर आप प्यार से बात करेंगे तो कोई दिक्कत नहीं, लेकिन जबरदस्ती नहीं चलेगी." उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, "एक हिंदी पत्रकार ने मुझसे सवाल पूछा और मैंने उसी की भाषा (हिंदी) में जवाब दिया. मैंने कहा, 'तुम्हें मेरी हिंदी समझ में आ रही है ना?' मुझे भी हिंदी आती है, और मैं उतनी हिंदी बोल लेता हूं जितनी जरूरी हो."

अजित पवार निशाने पर

उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए निशाना साधा.जब प्रधानमंत्री महाराष्ट्र आते हैं, तो उनके आसपास जो लोग होते हैं, वो कोई 'कुंभ मेला' नहीं, बल्कि 'दंभ मेला' होता है."  शिवसेना-यूबीटी के प्रमुख उद्धव यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, "आदर्श घोटाले से लेकर 70 हजार करोड़ के घोटाले तक के आरोप पहले खुद प्रधानमंत्री ने लगाए थे, तो अब वही लोग मंत्री कैसे बन गए? भ्रष्टाचारियों को आप खुद बढ़ावा दे रहे हैं." उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, उन्हें ही भाजपा सरकार में पद दिया जा रहा है.

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इस दौरान, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत दौरे पर भी ठाकरे ने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए और कहा, "आप शेख हसीना को भारत बुलाते हैं, जबकि बांग्लादेश का विरोध करते हैं. ये दोहरी नीति क्यों?"

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