- भारत के दो LPG से भरे जहाज पाइन गैस और जग वसंत होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं
- युद्ध के कारण फारस की खाड़ी में फंसे 22 भारतीय जहाजों में से कुछ जहाज सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं
- होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच संकरा मार्ग है जिससे तेल और गैस की सप्लाई होती है
भारत के दो और जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गए हैं. इन जहाजों में LPG है और इनके दो से ढाई दिन में भारत पहुंचने की उम्मीद है. जानकारी के मुताबिक, पाइन गैस और जग वसंत होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुके हैं. दोनों जहाज सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए थे. दोनों जहाज एक-दूसरे के करीब चल रहे हैं. शिपिंग मिनिस्ट्री के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि दोनों जहाज पर लगभग 92,000 टन LPG है. उन्होंने बताया कि खाड़ी से भारत तक पहुंचने में जहाज को आमतौर पर दो से ढाई दिन लगते हैं.
जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों से पता चलता है कि होर्मुज स्ट्रेट को पार करने से पहले दोनों LPG टैंकर ईरान के लारक और क्वेशम द्वीपों के बीच के जलक्षेत्र से होकर गुजरे थे.
ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाज में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंस गए थे. 28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है. होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच संकरा रास्ता है, जहां से तेल और गैस की सप्लाई होती है.
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अब तक आ चुके हैं तीन भारतीय जहाज
ईरान में जंग शुरू होने के बाद से अब तक तीन भारतीय जहाज भारत आ चुके हैं. सबसे पहले लगभग 92,712 टन LPG ला रहे शिवालिक और नंदा देवी भारत पहुंचे थे. शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा था, जबकि नंदा देवी अगले दिन 17 मार्च को कांडला पोर्ट पहुंचा था. दोनों जहाजों ने 14 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट पार किया था. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चे तेल से लदा भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर जग लाडकी 18 मार्च को मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था.
अब कितने जहाज फंसे?
युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट में 28 भारतीय जहाज मौजूद थे. इनमें से 24 होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे. पिछले कुछ दिन में, दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज तक पहुंचने में सफल रहे हैं.
राजेश कुमार सिन्हा के मुताबिक, पाइन गैस और जग वसंत के रवाना होने के बाद, पश्चिमी तट पर जहाजों की संख्या घटकर 20 रह गई है. इनमें पांच LPG टैंकर शामिल हैं.
पश्चिमी भाग में फंसे भारतीय झंडे वाले जहाजों में से मूल रूप से 6 LPG टैंकर थे. एक LNG टैंकर है, 4 कच्चे तेल के टैंकर हैं. एक रासायनिक उत्पादों को ला रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क यानी थोक सामान की ढुलाई करने वाले हैं. इसके अलावा, एक ड्रेजर है, एक खाली है और तीन नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं.
शिवालिक जहाज.
कुल मिलाकर, दुनियाभर में जाने वाले लगभग 500 जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. जानकारों का मानना है कि ईरान सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट को पार करने की इजाजत दे सकता है. ईरान पहले जांच करता है कि जहाज और इन पर लदा माल अमेरिका का तो नहीं है.
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भारत के लिए कितनी राहत की बात?
भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% LPG आयात करता है. युद्ध शुरू होने से पहले तक भारत के कच्चे तेल का आधे से ज्यादा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से आता था. यहां से आने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हैं. LPG का लगभग 85 से 95 फीसदी और गैस का 30 फीसदी इसी स्ट्रेट से गुजरता है.
हालांकि, कच्चे तेल की सप्लाई में आई रुकावट की भरपाई, रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों से की गई है, लेकिन प्राकृतिक गैस और LPG की सप्लाई में कटौती हुई है.
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