भारत-EU ट्रेड डील से व्यापारी संगठन CTI खुश, बताया किन सेक्टर्स को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट

India-EU Trade Deal: बृजेश गोयल ने बताया कि यूरोप से भारत में आने वाली गाड़ियों पर 35.5%  , प्लास्टिक पर 10.4% दवाइयों पर 9.9% टैरिफ लगता है. अब भारत की तरफ से टैरिफ कम होने से यूरोपीयन यूनियन देशों से आने वाली वस्तुएं भी सस्ती हो जाएंगी.

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भारत और EU ट्रेड डील पर व्यापारी संगठन CTI.
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  • भारत और EU ट्रेड डील से टेक्सटाइल, चमड़ा, जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क में राहत मिलेगी
  • यूरोपीयन यूनियन के साथ एफटीए से भारत का निर्यात 50 अरब डॉलर तक बढ़ने की संभावना है
  • इस समझौते से यूरोप के 27 देशों में भारतीय सामान की मांग बढ़ेगी और कंपनियां वहां उत्पादन भी स्थापित कर सकेंगी
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नई दिल्ली:

भारत और यूरोपीयन यूनियन के बीच ट्रेड एग्रीमेंट का रास्ता साफ हो गया है, जिसको लेकर दिल्ली और देश में व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री CTI  ने खुशी जताई है. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि यूरोपियन यूनियन के साथ समझौते से भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, केमिकल, समुद्री उत्पाद, डेयरी उत्पाद, कृषि उत्पाद, मोटर पार्ट्स जैसी चीजों पर यूरोपियन यूनियन देशों में लगने वाले आयात शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी.

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ट्रेड डील से बढ़ सकता है भारत का निर्यात

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने बयान जारी कर कहा कि यूरोपियन यूनियन देशों के साथ ट्रेड डील से भारत का यूरोपियन देशों को निर्यात 50 अरब डॉलर तक हो सकता है.उन्होंने बताया कि पिछले दिनों अमेरिका ने भारत के सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया था जिसके कारण भारत के व्यापारियों और एक्सपोर्टर्स को अमेरिका से ऑर्डर मिलना कम हो गया था.

अब यूरोपियन यूनियन के 27 देशों में भारत के सामान की डिमांड बढ़ेगी और भारत की कंपनियां वहां पर अपनी इंडस्ट्रीज भी लगा सकेंगी. CTI वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गर्ग और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बताया कि FTA के दायरे में दोनों पक्षों के करीब 1.9 अरब लोगों का बाजार है और यह समझौता चीन और आसियान के 10 देशों के FTA से भी बड़ा व्यापार समझौता है.

अमेरिकी टैरिफ से निराश कंपनियों को होगा फायदा

बृजेश गोयल ने बताया कि यूरोप से भारत में आने वाली गाड़ियों पर 35.5%  , प्लास्टिक पर 10.4% दवाइयों पर 9.9% टैरिफ लगता है. अब भारत की तरफ से टैरिफ कम होने से यूरोपीयन यूनियन देशों से आने वाली वस्तुएं भी सस्ती हो जाएंगी. उन्होंने बताया कि अमेरिका के 50% टैरिफ का भारत के टेक्सटाइल, लेदर,  जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट, केमिकल, फार्मा, सीफूड, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि सेक्टरों पर बहुत बुरा असर पड़ा था और इससे देश में 10 लाख लोगों के रोजगार पर संकट पैदा हो गया था. 

अमेरिका के बढ़े हुए टैरिफ के चलते दूसरे देशों के मुकाबले में भारतीय माल अमेरिका में 35% तक महंगा हो गया है जिसके कारण वहां के खरीददार भारत के मुकाबले में दूसरे देशों को तवज्जो देने लगे थे. सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक 48 अरब डॉलर से ज्यादा का भारतीय निर्यात इससे प्रभावित हो रहा था. 

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