NCERT की आठवीं कक्षा की किताब से न्यायपालिका के बारे में लिखा गया हिस्सा अब हटाया जाएगा.सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस किताब में लिखी चीजों को लेकर आपत्ति जताई गई है. कहा जा रहा है कि ऐसी चीजें लिखी नहीं जानी चाहिए थी. साथ ही किताब में लिखे उस हिस्से पर भी ऐतराज जताया गया है जिसमें खास तौर पर न्यायपालिका के बारे में बातें कही गई थीं.सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि छात्रों के लिए प्रेरमादायक बातें लिखी जानी चाहिए थीं. इस किताब में सकारात्मक बातें होनी चाहिए. साथ ही जस्टिस गवई को कोट करना ठीक नहीं है. इस मसले पर आज मुख्य न्यायाधीश ने भी अप्रसन्नता व्यक्त की है. कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट खुद ही संज्ञान लेकर सुनवाई कर सकता है. आपको बता दें कि आठवीं की सोशल साइंस की किताब में कोर्ट में लंबित मामलों और न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की बात लिखी गई है.
आपको बता दें कि NCERT यानी नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग की तरफ से तमाम क्लासेस के सिलेबस में लगातार बदलाव किया जाता है. अब NCERT ने कक्षा 8 की नई सोशल साइंस की नई किताब जारी की है, जिसमें एक चैप्टर को लेकर खूब चर्चा हो रही है. इस नई किताब में भारतीय न्यायपालिका यानी Judiciary की भूमिका को बताया गया है. साथ ही इसमें भ्रष्टाचार की भी बात कही गई है. किताब में लिखा गया है कि हमारे ज्युडिशियल सिस्टम में अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है.
न्यायपालिका के सामने बड़ी चुनौती
NCERT कक्षा 8 की इस नई किताब में बताया गया है कि हमारी अदालतों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इन चुनौतियों में भ्रष्टाचार भी एक है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट से लेकर बाकी तमाम अदालतों में लंबित पड़े मामलों का भी जिक्र किया गया है और इसे भी बड़ी चुनौती बताया गया है. किताब में पेंडिंग केसों का डेटा भी दिया गया है. भ्रष्टाचार की बात को साबित करने के लिए पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई के एक बयान को भी इस चैप्टर में शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका के भीतर खामियों की बात कही थी.
इससे पहले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने NCERT क्लास 8 के ज्यूडिशियल करप्शन वाले कंटेंट पर गंभीर चिंता जताई है. CJI सूर्यकांत ने कहा था कि उन्होंने इस पर संज्ञान लिया है और वे खुद से कार्रवाई कर सकते हैं. उन्होंने कहा था कि मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं दूंगा. कानून अपना काम करेगा.' इस मामले को अदालत में सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सीजेआई के सामने उठाया. उन्होंने कहा कि वे इस बात से विचलित हैं कि स्कूली छात्रों को इस तरह की सामग्री पढ़ाई जा रही है.
'किसी को संस्था को बदनाम नहीं करने देंगे'
सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया जाए. इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वह इस मुद्दे से अवगत हैं और उन्हें इस संबंध में कई कॉल और संदेश प्राप्त हुए हैं. सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं किसी को भी इस संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा. मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है.'
'उचित कदम उठाए जाएंगे'
इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया और उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया. सीजेआई ने कहा, 'यह एक सुनियोजित और सोची-समझी कोशिश प्रतीत होती है. मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता.' इसके अलावा सीजेआई ने मुद्दा उनके संज्ञान में लाने के लिए सिब्बल और सिंघवी का आभार व्यक्त किया. मामले को लेकर आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर अदालत की ओर से संकेत दिया गया है कि उचित कदम उठाए जाएंगे.
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