सरकार ने डीजल के निर्यात पर ड्यूटी 21.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये किया, ATF पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई

डीजल के निर्यात पर शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है.

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  • सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर निर्यात शुल्क में वृद्धि की है.
  • डीजल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 25 से ऊपर प्रति लीटर कर दिया गया, एटीएफ पर भी एक्सपोर्ट ड्यूटी में वृद्धि की गई.
  • पेट्रोल पर निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह अभी भी शून्य रुपए प्रति लीटर बनी हुई है.
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सरकार ने शनिवार को डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है. डीजल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि एटीएफ पर यह शुल्क 29.5 रुपए से बढ़ाकर 42 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है. हालांकि, पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसकी एक्सपोर्ट ड्यूटी अभी भी शून्य बनी हुई है.

सरकार का यह कदम वैश्विक ऊर्जा कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि निर्यातक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर का अनुचित फायदा न उठा सकें.

यह निर्णय विंडफॉल टैक्स फ्रेमवर्क का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार समय-समय पर ईंधन निर्यात पर टैक्स में बदलाव करती रहती है, ताकि रिफाइनरियों के मुनाफे और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बना रहे. साथ ही, सरकार एटीएफ पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट को कम करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है. इस दिशा में नागर विमानन मंत्रालय अन्य विभागों और राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रहा है.

महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में ऊंचे टैक्स के कारण मेट्रो एयरपोर्ट्स पर एटीएफ की कीमतें ज्यादा बनी हुई हैं. ऐसे में सरकार एयरपोर्ट से जुड़े कुछ शुल्कों में कमी लाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है और इसको लेकर एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के साथ चर्चा की योजना है.

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गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईंधन कीमतों में तेजी आई है, जिसके चलते 26 मार्च को सरकार ने डीजल और एटीएफ पर पहले ही एक्सपोर्ट ड्यूटी लागू की थी. यह कदम घरेलू सप्लाई बढ़ाने और निर्यातकों को ज्यादा लाभ लेने से रोकने के लिए उठाया गया था, क्योंकि युद्ध की शुरुआत के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति और बिगड़ी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ. हालांकि बीते 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी, जिससे बाजार को कुछ राहत मिली. हालांकि इस पर अभी संशय बना हुआ है. इसके बावजूद सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला किया है.

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