- कर्नाटक में एक नाबालिग छात्रा ने पुलिस को नकाबपोश लोगों द्वारा किडनैप करने की झूठी शिकायत की थी.
- पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और जांच में कोई संदिग्ध वाहन या अपराध से जुड़ा सबूत नहीं पाया.
- जांच में छात्रा ने स्वीकार किया कि उसने परिवार को मजबूर करने के लिए अपहरण की कहानी गढ़ी थी.
कर्नाटक के एक क्षेत्र में उस समय दहशत फैल गई जब एक नाबालिग छात्रा ने पुलिस को शिकायत दी कि कॉलेज जाते समय नकाबपोश लोगों ने उसका किडनैप करने की कोशिश की और उसे घायल भी कर दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में भर्ती छात्रा से स्थानीय विधायक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मिलने पहुंचे. लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ी तो पूरा मामला झूठी कहानी निकला.
छात्रा के बयान पुलिस जांच में उलझे
शुरुआत में छात्रा ने दावा किया था कि कार की नंबर प्लेट कपड़े से ढकी हुई थी. तीन नकाबपोश लोग मौजूद थे. अपहरणकर्ता उसका बैग छीनकर ले गए. पुलिस ने इन दावों के आधार पर आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, पर किसी संदिग्ध वाहन या गतिविधि का कोई सबूत नहीं मिला. जब पुलिस ने कार के रंग, मॉडल, रास्ते और घटनास्थल के बारे में तफ्सील पूछी, तो छात्रा के जवाब बेमेल निकले.
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छात्रा ने स्वीकारा- अपहरण की कहानी झूठी थी
कड़ी पूछताछ में छात्रा ने स्वीकार किया कि किसी ने उसका अपहरण करने की कोशिश नहीं की, पूरा मामला उसने खुद गढ़ा था.
छात्रा के अनुसार, वह ग्रामीण कॉलेज छोड़कर मंगलुरु शहर के कॉलेज में एडमिशन लेना चाहती थी, लेकिन घर वाले इसके लिए तैयार नहीं थे. इसी वजह से उसने यह कहानी बनाई ताकि परिवार उसे दूसरे कॉलेज भेजने के लिए मजबूर हो जाए.
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किताबें भी खुद ही जलाई थीं
जांच में यह भी सामने आया कि छात्रा ने अपने घर के पास अपनी किताबें खुद जला दी थीं, लेकिन पुलिस को बताया कि अपहरणकर्ताओं ने इन्हें ले जाकर जला दिया. इस तरह उसने अपने दावे को 'सच्चा दिखाने' की कोशिश की.
पुलिस अब इस मामले को गलत सूचना देने और झूठा मामला दर्ज कराने के एंगल से देख रही है. अधिकारियों का कहना है कि छात्रा नाबालिग है, इसलिए आगे की कार्रवाई में काउंसलिंग और अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी.













