- तेलंगाना निकाय चुनावों में कांग्रेस ने 1,537 वार्ड जीतकर अपने राजनीतिक प्रभुत्व को स्पष्ट रूप से स्थापित किया
- बीआरएस ने 781 वार्ड जीते लेकिन एक भी नगर निगम सीट हासिल नहीं कर शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ कमजोर की
- बीजेपी ने करीमनगर और निजामाबाद नगर निगमों में जीत दर्ज सबको चौंका दिया
तेलंगाना में कांग्रेस ने नगर निकाय चुनावों में शानदार जीत हासिल की है. पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तेलंगाना निकाय चुनाव के रिजल्ट कांग्रेस के लिए बड़ी 'गुड न्यूज' से कम नहीं है. हालांकि, इन चुनाव में भारत राष्ट्र समिति (BRS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन पूरे चुनाव में दबदबा कांग्रेस का ही देखने को मिला है. 2,995 वार्डों के परिणाम आधिकारिक तौर पर घोषित कर दिए गए हैं, जिनमें सत्ताधारी कांग्रेस ने 1,537 वार्डों में निर्णायक जीत हासिल की है. कांग्रेस ने बीजेपी, एआईएमआईएम और बीआरएस सभी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है.
तेलंगाना निकाय चुनाव में किस पार्टी का कैसा रहा प्रदर्शन?
- कांग्रेस: 1,537 वार्ड
- भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस): 781 वार्ड
- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): 336 वार्ड
- अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम): 70 वार्ड
- सीपीआई (मार्क्सवादी): 13 वार्ड
- अन्य पार्टियां: 73 वार्ड
- निर्दलीय: 183 वार्ड
चुनाव परिणाम क्या दे रहे संकेत?
तेलंगाना निकाय चुनाव के परिणाम शहरी राजनीतिक में वोटर्स में बिखराव, लेकिन प्रतिस्पर्धा को दर्शाते हैं. मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ कांग्रेस अपना समर्थन मजबूत कर रही है. लेकिन बीआरएस की शहरी क्षेत्रों में पूर्व की तुलना में स्थिति कमजोर हो रही है. वहीं, भाजपा और एआईएमआईएम दोनों हैदराबाद से बाहर भी अपनी पैठ बनाती नजर आ रही हैं.
करीमनगर और निजामाबाद से बीजेपी ने चौंकाया
तेलंगाना में कुल 7 नगर निगमों में मतदान हुआ, जिनमें से कांग्रेस ने 6 में जीत हासिल की, जबकि बीजेपी ने करीमनगर और निजामाबाद में जीत दर्ज करके सबको चौंका दिया. संसदीय चुनावों की तरह, बीआरएस, जो कभी एक मजबूत ताकत थी, यहां भी शून्य पर बैठी हुई है. जहां शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि निगम चुनावों में कांग्रेस अभी भी प्रमुख शक्ति बनी हुई है, वहीं करीमनगर और निजामाबाद नगर निगमों में बीजेपी की पहली जीत ने तेलंगाना के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी है.
बीजेपी का प्रदर्शन
- करीमनगर नगर निगम: 27 सीटें (सभी पार्टियों में सबसे अधिक)
- निज़ामाबाद नगर निगम: 27 सीटें (सबसे अधिक)
करीमनगर और निज़ामाबाद दोनों ही विधानसभाओं में भाजपा के सांसद हैं, जिससे इन नगर निगमों की जीत का रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है. इन जीतों के अलावा, भाजपा ने कई अन्य नगर निगमों और नगरपालिकाओं में भी मजबूत प्रदर्शन किया है. तेलंगाना निकाय चुनाव के परिणाम बीजेपी के अपने पारंपरिक गढ़ों से परे, विशेषकर उत्तरी तेलंगाना में, जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के केंद्रित प्रयासों को दर्शाते हैं.
बीजेपी अन्य नगर निगमों में मजबूत दूसरी ताकत
- महबूबनगर नगर निगम: 6 सीटें
- नालगोंडा नगर निगम: 4 सीटें
- सूर्यापेट नगर निगम: 1 सीट
- कोठागुडेम और अन्य: स्पष्ट उपस्थिति
नगर निगम जहां भाजपा नंबर 1 पर
- आदिलाबाद: 21 सीटें
- कामारेड्डी: 16
- निर्मल: 13
- मेटपल्ली: 10
- जगतियाल: 6
- हुजूरबाद और सिरसिला: 5-5
- कई अन्य शहरों में भी भाजपा की सीमित लेकिन स्पष्ट उपस्थिति देखी गई.
ओवैसी की एआईएमआईएम का प्रदर्शन भी शानदार
तेलंगाना एक अन्य पार्टी जिसने सबको चौंका दिया है, वो है असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, जिसने हैदराबाद से बाहर भी चुनाव लड़ा और भैंसा, बोधन और नारायणपेट जैसी चुनिंदा नगरपालिकाओं में जलवा दिखाया. इसने स्थानीय क्षेत्रों में अपना प्रभाव बनाए रखते हुए बीआरएस और कांग्रेस दोनों को झटका दिया. पार्टी ने तेलंगाना में नगरपालिकाओं के 47 से अधिक वार्ड और नगर निगमों के 22 से अधिक वार्ड जीते. यह पार्टी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.
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केसीआर की BRS को तगड़ा झटका
बीआरएस, जिसका पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के नेतृत्व में शहरी तेलंगाना में कभी काफी दबदबा था, उसको स्पष्ट झटका लगा है. पार्टी 781 वार्ड जीतने में कामयाब रही, लेकिन एक भी नगर निगम सीट हासिल करने में असफल रही, यह उसके शहरी समर्थन के लिए एक बड़ा झटका है.
तेलंगाना परिणाम के बाद, राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने कांग्रेस के प्रभुत्व और आगामी विधानसभा और संसदीय चुनावों से पहले उसके मजबूत होते नैरेटिव पर जोर दिया. साथ ही बीजेपी के बेहतर प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस को सतर्क भी किया. वहीं राजनीति के जानकारों का कहना है कि बीआरएस को घटते समर्थन के बीच अपनी रणनीतियों की समीक्षा करनी चाहिए. इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं.














