तेलंगाना के निजामाबाद में मेयर बनाने से पीछे क्यों हटी बीजेपी, करीमनगर में कैसे मिली जीत

तेलंगाना में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी ने निजामाबाद में अपना मेयर बनाने से इनकार कर दिया तो करीमनगर में उसने अपना मेयर बनवा लिया है. उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में बीआर ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया.

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हैदराबाद:

तेलंगाना के शहरी निकाय चुनाव में इस बार अलग-अलग तरह की राजनीतिक तस्वीर देखने को मिली है. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने निजामाबाद में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी विपक्ष में बैठने का फैसला किया, वहीं करीमनगर में मेयर और डिप्टी मेयर पद पर जीत दर्ज करने में सफल रही.  

निजामाबाद में बीजेपी के पीछे हटने पर AIMIM बनी खिलाड़ी

साल 2026 के तेलंगाना नगर निगम चुनाव में निजामाबाद नगर निगम की 60 सीटों में से बीजेपी को 28 सीटें मिलीं. मेयर बनने के लिए 31 सीटों की जरूरत थी, यानी बीजेपी बहुमत से सिर्फ तीन सीट पीछे रह गई. सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी सांसद डी अरविंद ने ऐलान किया कि पार्टी मेयर चुनाव नहीं लड़ेगी और विपक्ष में बैठेगी. उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें भरोसे से वोट दिया है, लेकिन सत्ता पाने के लिए जोड़-तोड़ (हॉर्स ट्रेडिंग) करना उनका तरीका नहीं है. उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने के लिए वो पर्दे के पीछे कोई खेल नहीं खेलेंगे.

निजामाबाद नगर निगम में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, इसलिए अब वहां गठबंधन की कोशिशें तेज हो गई हैं. कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) अपना मेयर और डिप्टी मेयर बनवाने के लिए समर्थन जुटाने पर बातचीत कर रही हैं. AIMIM भले ही सबसे बड़ी पार्टी नहीं है, लेकिन उसकी कुछ सीटें सत्ता का संतुलन बदल सकती हैं. राजनीति के जानकारों का मानना है कि यहां मेयर पद का फैसला गठबंधन और अतिरिक्त वोटों के आधार पर होगा. निजामाबाद में बीजेपी का पीछे हटना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, ताकि वह लंबी अवधि में अपनी साख मजबूत रख सके और जोड़-तोड़ के आरोपों से बच सके.

करीमनगर में बीआरएस के बहिष्कार से आसान हुई बीजेपी की राह 

करीमनगर नगर निगम में बीजेपी को साफ और आरामदायक जीत मिली. यहां कुल 69 वोट थे, इसलिए सामान्य बहुमत 35 का था. लेकिन भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. इससे केवल 59 सदस्य मौजूद रहे. ऐसे में बहुमत का आंकड़ा घटकर 31 रह गया. बीजेपी के पास पहले से ही 34 पार्षदों का समर्थन था, जो जरूरी संख्या से ज्यादा था. इसलिए पार्टी ने आधिकारिक तौर पर मेयर पद जीत लिया. पार्टी ने दूसरी डिवीजन के पार्षद कोलागानी श्रीनिवास को मेयर और सुनील राव को डिप्टी मेयर चुना. इन नामों को तेलंगाना बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एन रामचंदर राव ने मंजूरी दी. जिस बैठक में इन दोनों नामों को मंजूरी दी गई, उसमें करीमनगर के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार भी मौजूद थे. बैठक में कोलागानी श्रीनिवास के नाम को सर्वसहमति से मंजूरी दी गई.  

कोलागानी श्रीनिवास ने अपना राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से कार्यकर्ता के रूप में शुरू किया था. बाद में वे बीजेपी में आए. वहां वो अलग-अलग पदों पर काम करते हुए पार्षद बने और अब मेयर बने हैं. पार्टी नेताओं ने इसे एक आम कार्यकर्ता के शीर्ष तक पहुंचने का उदाहरण बताया है. 

तेलंगाना के कई शहरी निकायों में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन निजामाबाद और करीमनगर में बीजेपी का प्रदर्शन 2020 के चुनाव की तुलना में 2026 में बेहतर माना जा रहा है.

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