- तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय ने पूर्व CM एम.के. स्टालिन से शपथ ग्रहण के बाद पहली बार मुलाकात की
- विजय की पार्टी टीवीके ने पहली बार चुनाव में उतरकर 108 सीटें जीतकर DMK और AIADMK का वर्चस्व तोड़ा
- विजय ने कांग्रेस और अन्य सहयोगी पार्टियों की मदद से बहुमत हासिल कर नई सरकार बनाने में सफलता पाई
तमिलनाडु में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने आज पूर्व सीएम और DMK चीफ एम.के. स्टालिन से मुलाकात की. अभिनेता से नेता बने विजय ने कल ही तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उन्होंने विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. पहली बार चुनावी मैदान में उतरी विजय की पार्टी टीवीके ने 108 सीटें जीतीं. इसी के साथ उन्होंने दशकों से चले आ रहे DMK और AIADMK के वर्चस्व को तोड़ दिया.
यह पता नहीं चल पाया है कि आज की बैठक में दोनों नेताओं के बीच किन विषयों पर चर्चा हुई. मीडिया के साथ शेयर की गई बैठक की तस्वीरों में विजय को काले सूट में, हाथ जोड़कर DMK प्रमुख का अभिवादन करते हुए देखा गया. स्टालिन ने भी उसी भाव से जवाब दिया.
चुनाव के नतीजों के बाद गठबंधन को लेकर दिखी खींचतान
विजय कांग्रेस और अन्य पार्टियों की मदद से नई सरकार बनाने में सफल रहे. उन्होंने बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए जरूरी संख्या बल जुटाया. 4 मई को नतीजे आने के बाद कई दिनों तक तमिलनाडु में राजनीतिक खींचतान चली. विजय चार बार राज्यपाल से मिले. तीन बार की मुलाकात में विजय राज्यपाल अर्लेकर को बहुमत के दावे से संतुष्ट नहीं कर पाए थे. उस समय कई गठबंधन बनने की संभावनाएं थीं. यहां तक भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि AIADMK और DMK भी आपस में हाथ मिला सकते हैं.
आज मुलाकात से पहले ही स्टालिन ने विजय को बधाई दे दी थी. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने विजय से आग्रह किया कि वे राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए पिछली सरकार पर दोष न मढ़ें. इसके बजाय, स्टालिन ने कहा कि लोगों से किए गए वादों को पूरा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मैं उन घोषणाओं का भी स्वागत करता हूं जिन पर आपने पदभार ग्रहण करते ही तुरंत हस्ताक्षर किए हैं. उन्होंने आगे कहा कि यह कहना तुरंत शुरू न करें कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं. पैसे हैं. जरूरत इस बात की है कि लोगों को पैसे देने की इच्छाशक्ति हो और शासन चलाने की क्षमता हो.
स्टालिन ने इस बात का भी बचाव किया कि पिछली DMK सरकार ने राज्य के वित्त का प्रबंधन किस तरह किया था. उन्होंने कहा कि पांच सालों तक, हमने COVID और बाढ़ जैसी कई समस्याओं और साथ ही केंद्र की BJP सरकार की उपेक्षा का सामना करते हुए भी, लोगों के लिए अनगिनत कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'आपने अपने पहले ही भाषण में यह आरोप लगाया था कि पिछली सरकार ने 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ा है और खजाना खाली कर दिया है. तमिलनाडु का कर्ज का स्तर अनुमत सीमा के भीतर ही है. हमने फरवरी के बजट में ही तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्थिति को स्पष्ट रूप से समझा दिया था. क्या आपको इस बात की जानकारी नहीं थी?
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