गैंगरेप पीड़िता ने की आत्महत्या की कोशिश, शेल्टर हाउस में 25 नींद की गोलियां खाईं, हालत नाजुक

ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में गैंगरेप की पीड़िता ने शेल्टर हाउस में आत्महत्या की कोशिश की. पीड़िता ने करीब 25 नींद की गोलियां खा लीं, जिसके बाद उसकी हालत गंभीर हो गई. उसे संबलपुर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है.

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Gangrape Victim Suicide Attempt: ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है. गैंगरेप की पीड़िता ने गुरुवार रात आश्रय गृह में रहते हुए आत्महत्या की कोशिश की. पीड़िता ने करीब 25 नींद की गोलियां खा लीं, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई. फिलहाल उसे संबलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां आईसीयू में उसका इलाज चल रहा है.

अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता क्राइम ब्रांच के निर्देश पर एक आश्रय गृह में रह रही थी. जांच पूरी होने तक उसे सुरक्षित माहौल में रखने के निर्देश दिए गए थे. शेल्टर होम में वह निगरानी और मेडिकल देखरेख में थी, क्योंकि उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति स्थिर नहीं बताई जा रही थी.

कैसे खाईं इतनी गोलियां?

बताया गया है कि डॉक्टर की सलाह पर पीड़िता को रोजाना एक नींद की गोली दी जा रही थी. शुक्रवार रात के समय जब केयरटेकर तय दवा देने से पहले पानी लेने के लिए बाहर गया, उसी दौरान पीड़िता ने कथित तौर पर एक साथ करीब 25 गोलियां हासिल कर लीं और खा लीं. इसके थोड़ी देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई.

आईसीयू में चल रहा इलाज

आश्रय गृह के कर्मचारियों ने जैसे ही स्थिति को गंभीर होते देखा, तुरंत प्रशासन को सूचना दी गई. पीड़िता को बिना देर किए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में भर्ती किया. डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी हालत गंभीर है और लगातार निगरानी में इलाज किया जा रहा है.

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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद शेल्टर होम की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. खासतौर पर दवाओं तक पहुंच और मानसिक रूप से कमजोर लोगों की देखरेख को लेकर प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. माना जा रहा है कि अब इस पहलू की भी गहराई से जांच होगी. जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) श्रीबंत जेना ने बताया कि आश्रम से सूचना मिलते ही प्रशासन ने तुरंत कदम उठाया और पीड़िता को चिकित्सा सहायता दिलाई. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है कि सुरक्षा में कहां चूक हुई.

जुलाई 2020 में हुआ था गैंगरेप 

जानकारी के अनुसार, पीड़िता के साथ जुलाई 2020 में गैंगरेप हुआ था. यह अपराध बिरमित्रपुर पुलिस स्टेशन परिसर के भीतर एक ऊपरी कमरे में हुआ बताया गया था. इस मामले के सामने आने के बाद राज्यभर में आक्रोश फैल गया था. बाद में पीड़िता गर्भवती हो गई थी और आरोप है कि उस समय के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज आनंद मांझी और एक डॉक्टर की मिलीभगत से उसका गर्भपात कराया गया.

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पहले भी हुई थी कार्रवाई

मामले के उजागर होने के बाद इंस्पेक्टर आनंद मांझी को पहले निलंबित किया गया और फिर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. वहीं संबंधित डॉक्टर को भी निलंबन का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद पीड़िता की मानसिक पीड़ा कम नहीं हो सकी.

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