- सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की जल्दबाजी पर गंभीर सवाल उठाए हैं
- सोनिया ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक चर्चा और सर्वदलीय सहमति आवश्यक है
- सोनिया गांधी ने परिसीमन को लेकर अनाधिकारिक जानकारी को खतरनाक बताया
महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Act) को लेकर संसद के विशेष सत्र से पहले सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर एक आर्टिकल लिखा, जिसमें आरोप लगाया कि सरकार इस अहम मुद्दे पर 'असामान्य जल्दबाज़ी' दिखा रही है, जिसका मकसद आने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ उठाना हो सकता है. सोनिया गांधी ने अपने लेख में आरोप लगाया कि इस सप्ताह सरकार का संसद का विशेष सत्र बुलाने का मकसद महिला आरक्षण नहीं है बल्कि परिसीमन है. उन्होंने कहा कि कथित परिसीमन बेहद खतरनाक है और ये संविधान के खिलाफ है.
अनाधिकारिक जानकारी खतरनाक
सोनिया गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बड़ी चर्चा और सहमति जरूरी है, लेकिन सरकार बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के इसे आगे बढ़ा रही है. उन्होंने विशेष रूप से परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए चेतावनी दी कि इस संबंध में सामने आ रही अनाधिकारिक जानकारी खतरनाक है और यह संविधान की भावना के खिलाफ जा सकती है.
सोनिया गांधी ने दिये ये सुझाव
कांग्रेस नेता ने मांग की है कि पहले विधानसभा चुनावों के बाद इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें सभी दलों की राय ली जाए. इसके बाद मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके. सोनिया गांधी ने इस बात पर भी जोर दिया कि परिसीमन से पहले देश में जनगणना कराई जानी चाहिए और यह प्रक्रिया सभी राज्यों के लिए राजनीतिक रूप से संतुलित होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि परिसीमन को लेकर सरकार की ओर से अब तक सांसदों को कोई स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी क्यों नहीं दी गई है.
महिला आरक्षण को लेकर सोनिया गांधी ने ओबीसी वर्ग के लिए अलग कोटे की मांग को भी दोहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का असल मकसद जाति जनगणना के मुद्दे को भटकाना और टालना है. इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है और आने वाले दिनों में संसद के विशेष सत्र में इस पर तीखी बहस होने की संभावना है.
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