कोरियाई युद्ध में भारतीय सैनिकों का बलिदान दक्षिण कोरिया कभी नहीं भूलेगा: विदेश मंत्री चो ह्यून

चो ह्यून दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ भारत की यात्रा पर हैं और विदेश मंत्री बनने से पहले भारत में कोरिया के राजदूत रह चुके हैं.

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  • विदेश मंत्री ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भारत के कोरियाई मिशन पर फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया.
  • कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सेना लोगों को आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए बुसान पहुंची थी.
  • चो ह्यून ने कहा कि कोरियाई लोग भारतीय सैनिकों के महान बलिदानों को कभी नहीं भूलेंगे.
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नई दिल्ली:

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने बुधवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में "तटस्थता के रक्षक: भारत का कोरियाई मिशन" ("Guardians of Neutrality: India's Korean Mission") शीर्षक वाले एक फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. 20 नवंबर 1950 को, कोरियाई युद्ध के दौरान आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस बुसान में उतरी थीं.

वरिष्ठ राजनयिकों और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की सभा को संबोधित करते हुए दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने कहा कि कोरियाई लोग कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों द्वारा किए गए महान बलिदानों को कभी नहीं भूलेंगे. कोरिया भारत की प्रगति और समृद्धि में एक विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा. यह फोटो प्रदर्शनी हमारे साझा इतिहास की एक सशक्त स्मृति होगी.

विदेश मंत्री चो ह्यून ने कहा कि आज भी, दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष जारी हैं, जिससे अनगिनत लोगों को अपार पीड़ा हो रही है. मुझे पूरी उम्मीद है कि यह प्रदर्शनी भारत और कोरिया  के साथ-साथ पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रेरित करेगी और उन्हें यह समझने में मदद करेगी कि युद्ध के दौरान कोरियाई लोगों ने किस तरह के कष्ट को झेला सहे और भारत ने उनकी कैसे सहायता की.

चो ह्यून दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ भारत की यात्रा पर हैं, और विदेश मंत्री बनने से पहले भारत में कोरिया के राजदूत रह चुके हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ली जे म्युंग की इस यात्रा ने भारत और कोरिया के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है.

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भारत में राजदूत के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, चो ह्यून ने कोरियाई युद्ध (1950-53) में भाग लेने वाले कई भारतीय दिग्गज सैनिकों से मुलाकात की थी. इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में "तटस्थता के रक्षक: भारत का कोरियाई मिशन" ("Guardians of Neutrality: India's Korean Mission") शीर्षक वाले फोटो प्रदर्शनी के मुख्य आयोजक कर्नल (रिटायर्ड) डी.पी.के. पिल्ले ने एनडीटीवी से कहा कि कोरिया युद्ध के दौरान 6000 भारतीय सैनिक कोरिया गए थे. कोरिया वॉर मेमोरियल ने कोरिया युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों की भूमिका को डॉक्यूमेंट करने के लिए मुझे एक प्रोजेक्ट असाइन किया था. आज इसी के तहत हमने यह फोटो एग्जिबिशन आयोजित किया है, जिसका उद्घाटन दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने किया. हमने यहां पर बहुत सारे Memento, Memorabilia, ट्रॉफी और मेडल प्रदर्शित किए हैं जो भारतीय सैनिकों को दिए गए. यह एक ऐतिहासिक मिशन था.

फोटो प्रदर्शनी के जरिए उस वक्त के इतिहास को जीवंत करने की कोशिश की गयी है. यहां पर विस्तार से कोरिया युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों को मिले बहादुरी के मेडल्स, Memento, Memorabilia और ट्रॉफी प्रर्दशित कर उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को फिर से जिंदा करने की कोशिश की गयी है.  कर्नल (रिटायर्ड) डी.पी.के. पिल्ले ने कहा कि नेशनल आर्काइव और पीएम मेमोरियल से उन्हें कोरियाई युद्ध (1950-53) के दौरान भारतीय सैनिकों की भूमिका पर नए डाक्यूमेंट्स और दस्तावेज़ मिले हैं जिन्हें आगे प्रदर्शित किया जायेगा.

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