- पश्चिम बंगाल के सोनागाछी रेड-लाइट एरिया में लगभग पंद्रह हजार यौनकर्मी हैं
- कई यौनकर्मियों के पास पहचान पत्र नहीं है और वे अपने माता-पिता के दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर पा रही हैं
- सेक्स वर्करों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर एसआईआर के दौरान विशेष सहायता की मांग की है
पश्चिम बंगाल में सर (SIR) के बीच, एशिया के सबसे बड़े रेड-लाइट इलाकों में से एक सोनागाछी की कई महिलाएं भय के साये में हैं. चुनाव आयोग ने यौनकर्मियों और उनके परिवारों के लिए विशेष शिविरों की घोषणा की है और उन्हें आश्वासन दिया है कि वह एसआईआर शिविर का दौरा करने का प्रयास करेंगे और व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि सोनागाछी के लगभग 15,000 यौनकर्मियों के समुदाय को इस दौरान कोई कठिनाई न हो. मगर, इनके दिल की धड़कने बढ़ी हुई हैं.
क्यों परेशान हैं सेक्स वर्कर
- एशिया के सबसे बड़े रेड-लाइट एरिया में से एक में सेक्स वर्कर के रूप में काम करने वाली 47 वर्षीय महिला ने NDTV को बताया कि उसके माता-पिता बचपन में ही मर गए थे. उत्तरी कोलकाता की गलियों में वो पली-बढ़ी. 2002 के ड्राफ्ट मतदाता सूची में उसका कोई नाम दर्ज नहीं है. कई अन्य महिलाओं की तरह, वह उत्तरी कोलकाता के सोनागाछी के रेड-लाइट एरिया में उन्हीं कपड़ों में आई थी, जिनमें वह घर से निकली थी, उसके पास न तो कोई पहचान पत्र था और न ही पैसे.
- वो कहती है, "मेरे जैसी अनगिनत लड़कियां यहां इस पेशे से जुड़ी हैं. उनके पास मतदाता पहचान पत्र तो है, लेकिन वे अपने माता-पिता से दस्तावेज़ नहीं ला पाएंगी, क्योंकि वे बहुत पहले अपने परिवार से अलग हो चुकी हैं. इस पेशे को अभी तक सरकार या समाज से मान्यता नहीं मिली है. वे दस्तावेज़ जमा नहीं कर पा रही हैं. हम सभी अपने भविष्य को लेकर किसी न किसी तरह की अनिश्चितता में हैं."
- एक अन्य सेक्स वर्कर ने कहा, "आम तौर पर लड़कियां डरी हुई हैं, क्योंकि वे अपने माता-पिता के दस्तावेज़ साथ नहीं ला पाईं. वे हमारे पास आ रही हैं और पूछ रही हैं कि उनका क्या होगा? ज़्यादातर महिलाएं अपनी खराब आर्थिक स्थिति के कारण यहां आती हैं. वे अपने माता-पिता के दस्तावेज़ साथ नहीं लातीं."
चुनाव आयोग से गुहार
सोनागाछी के दरबार महिला समन्वय समिति कल्याण संगठन ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल को पत्र लिखकर एसआईआर के दौरान यौनकर्मी समुदाय के लिए विशेष विचार और सहायता की मांग की है. दरबार महिला समन्वय समिति की सचिव बिशाखा लस्कर कहती हैं, "हम सभी SIR के तहत नामांकन कराना चाहते हैं. यहां की ज़्यादातर महिलाओं ने 2002 की ड्राफ्ट सूची में नाम दर्ज नहीं कराया है, क्योंकि यह पहला साल था, जब सभी यौनकर्मियों को पहली बार मतदाता पहचान पत्र मिला था. हम चुनाव आयोग को बताना चाहते हैं कि हम अपने पास मौजूद दस्तावेज़ों के साथ SIR के तहत नामांकन कराना चाहते हैं, क्योंकि हम सभी भारतीय नागरिक हैं."
क्यों है जरूरी
चुनाव वाले राज्य पश्चिम बंगाल में एसआईआर लागू करना चुनाव आयोग के लिए एक चुनौती है. अभी तक उत्तरी कोलकाता का यह क्षेत्र चिंता का विषय है, चुनाव आयोग को काफी कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. चुनाव निकाय को इन असहाय महिलाओं का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये महिलाएं आगामी विधानसभा चुनाव में अपना वोट डाल सकें और सबकुछ गंवा चुकी इन महिलाओं को और परेशान न होना पड़े.













