भारत में भी कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर अंकुश लगाए जा सकते हैं. सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका संकेत दिया है. आईटी मंत्री ने कहा कि उम्र के आधार पर पाबंदियों को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों से बातचीत की जा रही है. हम आगे बढ़ने का सबसे अच्छा रास्ता चुनेंगे. दरअसल, दुनिया के कई देशों ने हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर या तो बैन लगा दिया है या फिर उससे जुड़ी कई पाबंदियां लगा दी हैं.
डीपफेक वीडियो पर भी सख्त नियम
Deepfake वीडियो पर आईटी मंत्री ने कहा, डीपफेक पर और भी सख्त नियमन की आवश्यकता है.डीपफेक की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. डीपफेक के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों के बारे में उद्योग जगत से बातचीत जारी है. ये पहले से घोषित उपायों से कहीं अधिक कठोर होंगे.कानून को और अधिक मजबूत बनाने के लिए संसद में सर्वसम्मति बनानी होगी.
ऑस्ट्रेलिया: 16 साल के बच्चों के लिए पाबंदी
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. इसमें माता-पिता की सहमति का भी प्रावधान भी नहीं है. नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना (लगभग 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) लगाया जा सकता है.
फ्रांस में 15 साल तक के बच्चों के लिए अंकुश
फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला कानून बनाया है। हालांकि, वहां माता-पिता की सहमति (Parental Consent) से कुछ छूट मिल सकती है।
नॉर्वे में भी 15 साल तक पाबंदी
नॉर्वे सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए अपनी न्यूनतम आयु सीमा को 13 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने जा रहा है. प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर का कहना है कि यह बच्चों को बचाने के लिए जरूरी है.
ब्रिटेन में भी कड़े प्रतिबंध की तैयारी
ब्रिटेन सरकार भी ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने या कड़े नियंत्रण लगाने के लिए परामर्श (Consultation) कर रही है.
स्पेन और डेनमार्क में भी तैयारी
स्पेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की योजना है. डेनमार्क और ग्रीस में भी न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष करने पर काम कर रहे हैं. भारत भी सोशल मीडिया कंपनियों के साथ बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े प्रतिबंधों और सख्त वेरिफिकेशन पर चर्चा कर रही है.














