पुतिन का दिल्ली दौरा भारत की संप्रभुता और स्वायतत्ता का भी प्रतीक - शशि थरूर

भारत-रूस की नजदीकियों से ट्रंप के नाखुश होने पर थरूर ने कहा कि हमारे रिश्ते इस बात पर निर्भर नहीं हैं कि कोई दूसरा इसे लेकर क्या सोचता है.

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  • शशि थरूर ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन का दौरा संबंधों की निरंतरता और भारत की संप्रभुता का भी प्रतीक है
  • कांग्रेस नेता थरूर ने कहा कि हमारे रिश्ते इस बात पर निर्भर नहीं हैं कि कोई दूसरा इसे लेकर क्या सोचता है
  • थरूर ने कहा कि जिस तरह हम अमेरिका के दूसरे देशों से रिश्तों का आदर करते हैं, वैसे ही ट्रंप को करना चाहिए
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित डिनर में शामिल हुए कांग्रेस पार्टी के नेता और विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष शशि थरूर से NDTV के सीईओ और एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि पुतिन का यह दौरा कई मायनों में संबंधों की निरंतरता का प्रतीक है. आज के विभाजित विश्व में यह भारत की संप्रभुता और स्वायतत्ता का भी प्रतीक है. थरूर ने पुतिन के दौरे से खफा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर भी टिप्पणी की. 

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भारत और रूस के बीच जिस तरह से नजदीकियां बढ़ी हैं, उससे अमेरिका ज्यादा खुश नहीं है. इस सवाल के जवाब में थरूर ने कहा कि हमारे रिश्ते इस बात पर निर्भर नहीं हैं कि कोई दूसरा इसे लेकर क्या सोचता है. ऐसा इसलिए भी हर देश के किसी दूसरे देश के साथ अपने खास रिश्ते होते हैं. ये ठीक वैसे ही है, जैसे ट्रंप को ये फर्क नहीं पड़ता कि हम चीन के साथ उनके रिश्ते को लेकर क्या सोचते हैं. 

थरूर ने आगे कहा कि जिस तरह से हम अमेरिका के दूसरे देशों से रिश्तों का आदर करते हैं, वैसे ही ट्रंप को भी चाहिए कि वो भारत के दूसरे देशों से रिश्तों का भी सम्मान करें. भारत जैसे देश के संबंध उन्हीं देशों के साथ ज्यादा अच्छे हैं, जो हमारे लिए महत्व रखते हैं. रूस भी इन्हीं देशों में से एक है. रूस के साथ हमारे संबंध काफी खास हैं. थरूर ने पुतिन के दौरे को संबंधों की निरंतरता और भारत की संप्रभुता व स्वायतत्ता का प्रतीक भी बताया. 

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पुतिन के दो दिनी दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी गर्मजोशी देखने लायक थी. दोनों गले मिले, हाथ पकड़कर साथ चले, एक ही कार में बैठे. जाहिर है, ये दशकों पुराने भारत-रूस के संबंधों की गर्मजोशी का ही अगला पड़ाव था. 

बता दें, पुतिन के सम्मान में आयोजित राष्ट्रपति के डिनर में शशि थरूर को आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनकी ही पार्टी के बड़े नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी व राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को नहीं बुलाया गया. 

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