- राहुल गांधी के संसद कार्यालय में विपक्षी नेताओं की बैठक हुई जिसमें शशि थरूर भी शामिल हुए
- शशि थरूर ने राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोके जाने पर सार्वजनिक रूप से उनका बचाव किया
- राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ बैठक के बाद शशि थरूर बदले-बदले नजर आ रहे हैं
संसद में सोमवार को राहुल गांधी जब भाषण देने उठे और जो वो बोलने वाले थे उस पर काफी हंगामा हुआ, इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. राहुल गांधी के बोलने के दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री भी सदन में मौजूद थे और बीच-बीच में उन्होंने बहस में दखल भी दिया. पहली बार जब लोकसभा की कार्यवाही स्थगित हुई तब विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसद वाले दफ्तर में नेताओं का पहुंचना शुरू हुआ. राहुल के अपने दफ्तर में पहुंचने के बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी पहुंचे.
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राहुल गांधी से बढ़ रही थरूर की नजदीकियां
प्रियंका गांधी जो संसद से बाहर जा चुकी थी, उनको भी बुलाया गया. के सी वेणुगोपाल भी तब तक वहां पहुंच गए लेकिन सबसे ताज्जुब तब हुआ जब शशि थरूर इस बैठक में भाग लेने के लिए राहुल गांधी के कमरे में गए.बाद में लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई भी आए. राहुल गांधी के कमरे में ये बैठक करीब 40 मिनट तक चली. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर वाली जो बैठक पिछले हफ्ते हुई थी, उसके बाद थरूर पहली बार राहुल गांधी की किसी बैठक में शामिल हुए हैं. लगता है कि उस बैठक के बाद राहुल गांधी और शशि थरूर के संबंधों के बीच जो बर्फ जमा हो गई थी वो पिघलने लगी है.
थरूर ने किया राहुल का बचाव
कांग्रेस के कई नेता इस नए रिश्ते को लेकर दबी ज़ुबान में बातें करते दिखे. यही नहीं सदन के बाहर भी शशि थरूर ने राहुल गांधी का जमकर बचाव किया और कहा कि राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया. जिस लेख का जिक्र राहुल गांधी करना चाहते थे उसमें सुरक्षा बलों के बारे में नहीं सरकार के निर्णय के बारे में लिखा गया है. थरूर आगे कहते हैं कि सरकार इस मामले को लेकर जरूर से ज्यादा ही प्रतिक्रिया देने लगी. राहुल जो कह रहे थे वो सब पब्लिक जानकारी में पहले से मौजूद है. थरूर आगे कहते हैं कि जवाहर लाल नेहरु ने तो चीन युद्ध के दौरान भी सदन में चर्चा करने की अनुमति दी थी.
बदले-बदले क्यों हैं शशि थरूर?
शशि थरूर का ये बदला-बदला रूप नया है, क्योंकि अभी तक ऐसे मामलों पर वो बोलने पर बचते रहते थे. शशि थरूर की जो बैठक खरगे और राहुल गांधी के साथ हुई उसमें केवल यही तीनों नेता ही मौजूद थे. यानि तीनों नेताओं के बीच में केरल चुनाव को लेकर कुछ ना कुछ आश्वासन थरूर को जरूर दिया गया है, जिसके बाद थरूर बदले-बदले से नजर आ रहे हैं. कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि केरल के मद्देनजर कांग्रेस के लिए यह अच्छा संकेत है.













