वक्फ (संशोधन) विधेयक बुधवार को लोकसभा में 13 घंटे की लगातार बहस के बाद पारित हो गया. इस विधेयक के पक्ष में 288 सदस्यों ने वोट दिया, जबकि 232 सदस्यों ने इसका विरोध किया. विपक्षी सांसदों ने इस बिल का जोरदार विरोध किया, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने सक्रिय भूमिका निभाई. समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने इस मामले को लेकर एनडीटीवी से बातचीत की.
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने वक्फ संशोधन बिल पर अपनी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि हमने अपनी आवाज उठाई. सरकार की नीयत सही नहीं है. हमें दिक्कत सरकार की नीयत से है. इकरा हसन ने यह भी कहा कि इससे पहले ट्रिपल तलाक को भी महिलाओं से जोड़ा गया था, लेकिन इस बिल से महिलाओं को कोई फायदा नहीं होने वाला है. उन्होंने यह भी कहा कि खासकर मुस्लिम महिलाओं के नाम पर जो इस तरह के बिल लेकर आते हैं, वे उनके हितों की रक्षा नहीं करते हैं.
'सच्चर कमेटी की रिपोर्ट क्यों नहीं लागू करती है?'
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर सरकार अल्पसंख्यकों के प्रति इतना ही प्रेम रखती है, तो सच्चर कमेटी की रिपोर्ट क्यों नहीं लागू करती है? उन्होंने यह भी कहा कि राम जन्म भूमि ट्रस्ट में केवल हिंदू ही हो सकते हैं, जिसका वे समर्थन करते हैं. लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि किसी भी धार्मिक ट्रस्ट में सेकुलरिज्म की बात क्यों की जाती है? उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि यह अधिकार दूसरे धर्म के लोगों को भी दिया जाना चाहिए.
यह बिल संविधान का उल्लंघन करता है : इकरा हसन
इकरा हसन ने कहा कि यह बिल संविधान का उल्लंघन करता है और मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप करता है. सरकार ने जेपीसी की रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों को पूरी तरह से नहीं अपनाया है, बल्कि अपने मन मुताबिक संशोधन किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के संशोधन को ही स्वीकार किया गया है.
उनका मानना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय के लिए हानिकारक है और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को कमजोर करता है. इकरा हसन ने इस बिल का विरोध करने के लिए अपनी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों से एकजुट होने का आह्वान किया है.
इकरा हसन ने कहा कि सरकार को सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए और एक सहमति बनानी चाहिए जो सभी को मान्य हो. इकरा हसन ने किसान आंदोलन का उदाहरण दिया, जिसमें सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा था. उन्होंने कहा कि इसी तरह, सरकार को वक्फ संशोधन बिल पर भी पुनर्विचार करना चाहिए और सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखना चाहिए.