अश्विनी सिंह: क्या वाकई धरती पर जीवन की शुरुआत उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से जुड़ी हो सकती है? करीब 160 करोड़ साल पुराने सलखन फॉसिल्स पार्क को लेकर यही सवाल एक बार फिर चर्चा में है. प्री-कैम्ब्रियन काल के दुर्लभ जीवाश्मों के लिए पहचाने जाने वाले इस स्थल को अब UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. अगर यह पहल सफल होती है, तो यह न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए जीवन की उत्पत्ति को समझने का एक अहम केंद्र बन सकता है.
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित सलखन फॉसिल्स पार्क आने वाले समय में दुनिया भर के पर्यटकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस एक बड़ा आकर्षण बनने जा रहा है. करीब 160 करोड़ साल पुराने इस जीवाश्म पार्क को विश्व के सबसे प्राचीन और स्पष्ट संरचना वाले स्थलों में गिना जाता है, जहां प्री-कैम्ब्रियन काल के जीवाश्मों के अवशेष आज भी सुरक्षित हैं.
Salkhan Fossils Park UNESCO हेरिटेज बनने की दिशा में पहल
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इस स्थल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए इसे विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सोनभद्र के डीएम आईएएस बीएन सिंह के अनुसार, यह स्थल पहले से ही UNESCO की संभावित सूची में शामिल है और अब इसे विश्व धरोहर (World Heritage) के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है. पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यहां व्यापक विकास कार्यों की योजना बनाई गई है, जिससे यह स्थान वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान मजबूत कर सके.
Salkhan Fossils Park in Sonbhadra Uttar Pradesh unesco heritage Photo-Ashwini Singh
कहां स्थित है यह अद्भुत पार्क?
सोनभद्र जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर, वाराणसी-शक्तिनगर राजमार्ग पर स्थित यह पार्क करीब 25 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है. यह कोई साधारण पार्क नहीं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआती अवस्थाओं का साक्षात प्रमाण माना जाता है. यह पार्क विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित है, जो ऊबड़-खाबड़ भूभाग, खड़ी ढलानों और अद्वितीय भूवैज्ञानिक परिदृश्य के लिए प्रसिद्ध है. इस स्थल की खोज वर्ष 1933 में न्यूजीलैंड के भूविज्ञानी जे. आडन ने की थी. इसके बाद से दुनिया भर के वैज्ञानिक यहां आकर शोध करते रहे हैं.
कैसे हुई जीवन की शुरुआत के संकेत?
शोध में यह सामने आया कि लगभग 160 करोड़ वर्ष पहले यहां समुद्र हुआ करता था. उसी दौरान पानी के भीतर एलगाई (काई) का विकास हुआ, जिसे जीवन के शुरुआती रूपों में गिना जाता है. आज भी इस पार्क में एलगाई के जीवाश्म स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं. ये जीवाश्म स्ट्रोमेटोलाइट्स के रूप में मौजूद हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के विकास की प्रारंभिक अवस्था को दर्शाते हैं.
दुनिया के प्राचीनतम जीवाश्मों में गिनती
सलखन फॉसिल्स पार्क के जीवाश्मों को विश्व के प्राचीनतम जीवाश्मों में गिना जाता है. बताया जाता है कि यह स्थल अमेरिका के येलोस्टोन फॉसिल्स पार्क के बाद सबसे पुराने जीवाश्म स्थलों में शामिल है. यही कारण है कि यह पार्क न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक धरोहर माना जाता है.
पर्यटन विकास पर सरकार का फोकस
उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस स्थल के विकास की योजना तैयार की है. करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से यहां मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. इसमें पर्यटकों के लिए कैंटीन, शौचालय, पेयजल, साफ-सफाई और एक म्यूजियम जैसी सुविधाओं को विकसित करने की योजना शामिल है. इससे न सिर्फ पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि जिले के राजस्व में भी वृद्धि होगी.
पर्यटकों की क्या है मांग?
यहां आने वाले पर्यटकों का कहना है कि यह स्थल बेहद प्राचीन और महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे बेहतर तरीके से विकसित किया जाना चाहिए.
पर्यटकों का मानना है कि यदि यहां सुविधाएं बढ़ाई जाएं, तो यह स्थान विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है.
क्यों खास है सलखन फॉसिल्स पार्क?
- करीब 160 करोड़ साल पुराने जीवाश्म
- प्री-कैम्ब्रियन काल के अवशेष
- स्ट्रोमेटोलाइट्स के स्पष्ट प्रमाण
- जीवन की प्रारंभिक अवस्था के संकेत
- UNESCO हेरिटेज बनने की दिशा में पहल
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