- सायोनी घोष ने पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के लिए काबा और मदीना गाकर वोट मांगने का काम किया था
- चुनाव नतीजों के बाद सायोनी घोष अचानक गायब हो गईं और सोशल मीडिया पर उनके कई मीम वायरल हुए थे
- सायोनी घोष का राजनीतिक सफर स्कूल से शुरू होकर टीएमसी में युवा चेहरा बनने और लोकसभा चुनाव जीतने तक का है
सायोनी घोष ने काबा और मदीना गाकर पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए जगह-जगह वोट मांगे. ममता बनर्जी के बाद टीएमसी से सबसे ज्यादा वो ही एक्टिव नजर आ रही थीं. उनके भाषण सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे थे. बीजेपी पर सबसे तीखे हमले भी सायोनी घोष ही कर रही थीं, मगर चुनाव नतीजों के बाद वो एकदम से गायब हो गईं. इसके बाद सोशल मीडिया पर उनके तरह-तरह के मीम बनने लगे. लोग पूछने लगे सायोनी घोष कहां हैं? मगर सायोनी घोष कहीं नजर नहीं आ रही थीं.
तोहफा-तोहफा अब गाने की जगह लिख रहीं
सायोनी घोष का ताजा बयान
बृहस्पतिवार को पीटीआई ने आखिरकार सायोनी घोष से ऑन कैमरा बात की. बातचीत से साफ है कि वो तृणमूल कांग्रेस की मीटिंग अटेंड करने आईं थी. पीटीआई को सायोनी घोष ने बताया, 'ये इंटरनल मीटिंग है और हमारी नेत्री ने हमको कुछ गाइडलाइंस दिए हैं. देखिए, डरने वालों में से या पीछे हटनों वालों में से तृणमूल कांग्रेस नहीं है. ममता बनर्जी शेरनी हैं, फाइटर हैं. आगे भी थीं और अब भी रहेंगी. ये जनता का मैनडेट नहीं है. पश्चिम बंगाल के लोगों ने नहीं चाहा कि ममता बनर्जी की सरकार चली जाए. ये वोट चोरी का मैनडेट है. इसमें इलेक्शन कमीशन शामिल है और दिन-दहाड़े ये जो वोट चोरी हुई है सिर्फ पश्चिम बंगाल के ही लोग नहीं, पूरे भारतवर्ष के लोग देख रहे हैं. ममता बनर्जी पहले भी सुप्रीम कोर्ट गईं थीं और अब वो तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के हित में हाईकोर्ट गई हैं. ये हमारी जीत है कि हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को अपने घर और दफ्तर जाने के लिए सेफ पैसेज दिया जाए.' इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर फिर वायरल है.
सायोनी घोष का नया वायरल वीडियो
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सायोनी घोष का बचपन से अब तक का सफर
1993 में कोलकाता में पैदा हुईं सायोनी घोष आज पश्चिम बंगाल की राजनीति के सबसे चर्चित युवा चेहरों में से एक हैं. कोलकाता के चर्चित साउथ पॉइंट हाई स्कूल से पढ़ाई करने के बाद सायोनी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की है. स्कूल-कॉलेज के दिनों से ही वो सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहीं और नाटकों में हिस्सा लेती रही हैं. कैमरे के सामने खुलकर बोलने की उनकी कला ने उन्हें बहुत कम उम्र में ही टीवी में रोल दिलाए और एंकरिंग के मौके दिलाए. आगे चलकर उन्होंने फिल्मों में भी काम किया.
टीवी, एंकरिंग और एक्टिंग के दौरान विकसित की गई भाषण कला ही आगे चलकर उनका राजनीतिक स्टाइल बन गई. 2021 विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी युवा चेहरे तलाश रही थी. सायोनी इसमें फिट बैठीं. वो एक महिला और युवा होने के साथ-साथ खासी चर्चित भी थीं. पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने आसनसोल सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार से हार गईं. 2021 विधानसभा चुनाव में हार के बाद सायोनी घोष ने 2024 में टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.
फिर गिरफ्तारी और दस घंटों की पूछताछ
साल 2021 में ही सायोनी घोष को त्रिपुरा में गिरफ्तार भी किया गया था. दरअसल, त्रिपुरा में स्थानीय चुनावों के समय सायोनी ने बीजेपी की एक नुक्कड़ सभा के पास से गुजरते हुए नारा लगाया था- ‘खेला होबे.''खेला होबे' साल 2021 में पश्चिम बंगाल चुनाव में दिया गया ममता बनर्जी का नारा था. इस नारेबाजी के बाद अगरतला के एक पुलिस थाने में सायोनी घोष पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया था और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. पुलिस थाने के बाहर टीएमसी समर्थकों और कुछ अज्ञात लोगों के बीच झड़प भी हुई थी.
साल 2023 में जब वो टीएमसी की यूथ विंग की अध्यक्ष थीं, पश्चिम बंगाल के कथित भर्ती घोटाले की जांच कर रही ईडी ने उनसे दस घंटों तक पूछताछ की थी. तब सयानी ने कहा था, “मैं आगामी पंचायत चुनावों के लिए प्रचार कर रही थी, मुझे यहां ईडी दफ्तर बुलाया गया. मैं यहा पहुंची हूं और पूरी तरह जांच में सहयोग करना चाहती हूं.” 2026 विधानसभा चुनाव में भी एक इंटरव्यू के दौरान सायोनी ने कहा था, अगर टीएमसी हार भी जाती है तो भी वो किसी और पार्टी में नहीं जाएंगी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था-'मैं चड्ढा-चड्ढी नहीं हूं.' जाहिर है इससे यही लगता है कि सायोनी घोष पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद भी तृणमूल में रहते हुए अभी बीजेपी पर हमले जारी रखेंगी.
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