श्रीसंत की चोट पर 82 लाख के भुगतान मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची बीमा कंपनी, जानें क्या है पूरा मामला

बीमा कंपनी का दावा है कि श्रीसंत को अनुबंध से पहले ही पैर की अंगुली में चोट थी, जबकि राजस्थान रॉयल्स का कहना है कि खिलाड़ी को बीमा अवधि के दौरान घुटने में चोट लगी थी, जिससे वह टूर्नामेंट में खेलने के लिए अयोग्य हो गए.

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  • बीमा कंपनी ने पूर्व क्रिकेटर श्रीसंत की चोट के मामले में 82 लाख के भुगतान आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
  • बीमा कंपनी का दावा है कि श्रीसंत की पैर की अंगुली की चोट पहले से थी
  • राजस्थान रॉयल्स का कहना है कि श्रीसंत ने पैर की चोट के बावजूद खेलना जारी रखा
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जयपुर/नई दिल्ली:

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज एस श्रीसंत की चोट के मामले में राजस्थान रॉयल्स को 82 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दरअसल यह मामला 2012 के आईपीएल टूर्नामेंट से जुड़ा हुआ है, जिसमें श्रीसंत चोट के चलते नहीं खेल पाए थे. राजस्थान रॉयल्स की बीमा करने वाली कंपनी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें फ्रैंचाइज़ी को श्रीसंत की चोट के कारण 82 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था.

बीमा कंपनी का क्या दावा

बीमा कंपनी का दावा है कि श्रीसंत को अनुबंध से पहले ही पैर की अंगुली में चोट थी, जबकि राजस्थान रॉयल्स का कहना है कि खिलाड़ी को बीमा अवधि के दौरान घुटने में चोट लगी थी, जिससे वह टूर्नामेंट में खेलने के लिए अयोग्य हो गए. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है ताकि अपीलकर्ता अतिरिक्त दस्तावेज़ दाखिल कर सके. इनमें बीमा आवेदन और श्रीसंत का फिटनेस प्रमाणपत्र शामिल हैं. यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने तर्क दिया कि NCDRC ने पैर की अंगुली की पहले से मौजूद चोट को नजरअंदाज किया, जबकि बीमा अवधि के दौरान लगी घुटने की चोट का इससे कोई संबंध नहीं है.

राजस्थान रॉयल्स की क्या दलील

इस मामले में राजस्थान रॉयल्स की ओर से वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने कहा कि पैर की चोट के बावजूद श्रीसंत खेल रहे थे और अभ्यास सत्र के दौरान उन्हें घुटने में चोट लगी. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि श्रीसंत के फिटनेस प्रमाणपत्र बीमा कंपनी को दिए गए थे. जस्टिस मेहता ने पूछा कि क्या उस प्रमाणपत्र में पैर की चोट का जिक्र किया गया था. पीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि यदि पहले से मौजूद चोट का खुलासा किया गया होता, तो बीमा कंपनी बीमा न करने या अधिक प्रीमियम वसूलने पर विचार कर सकती थी.

क्या है पूरा मामला

राजस्थान रॉयल्स ने 2012 के आईपीएल सीज़न के लिए 8.70 करोड़ रुपये की ‘खिलाड़ी शुल्क हानि कवर' बीमा पॉलिसी ली थी. पॉलिसी के अनुसार, बीमा कंपनी को टूर्नामेंट में अनुपस्थित खिलाड़ियों के कारण हुए नुकसान की भरपाई करनी थी, बशर्ते अनुपस्थिति पॉलिसी अवधि के दौरान हुई चोट के कारण हो. 28 मार्च 2012 को जयपुर में अभ्यास मैच के दौरान श्रीसंत को घुटने में चोट लगी थी, जिसके बाद उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया. राजस्थान रॉयल्स ने 17 सितंबर 2012 को 82.80 लाख रुपये का दावा दायर किया था.

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NCDRC ने राजस्थान के पक्ष में फैसला सुनाया

बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेक्षक ने माना कि यह चोट अचानक और अप्रत्याशित थी और दावा पॉलिसी के दायरे में आता है. बावजूद इसके, बीमा कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि श्रीसंत की मौजूदा चोट की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी. NCDRC ने राजस्थान रॉयल्स के पक्ष में फैसला सुनाया और बीमा कंपनी को भुगतान करने का निर्देश दिया, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

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