अगर भारत में कुछ भी होता है, तो इसके बारे में हिंदुओं से पूछा जाएगा: मोहन भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि संघ न तो किसी का विरोध करता है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा में है. इसका उद्देश्य केवल एक मजबूत और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करना है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • मोहन भागवत ने कहा कि भारत का चरित्र हिंदू समाज के समावेशी और विविधता स्वीकारने वाले स्वभाव से जुड़ा है
  • आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय वस्तुएं खरीदनी चाहिए और विदेशी वस्तुएं केवल आवश्यकता पर लें
  • उन्होंने हिंदुओं में जाति, संप्रदाय, भाषा या व्यवसाय की परवाह किए बिना एकता स्थापित करने का आह्वान किया
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत में कुछ भी अच्छा या बुरा घटित हो, तो हिंदुओं से इसके बारे में पूछा जाएगा, क्योंकि भारत ‘‘केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं, बल्कि देश का चरित्र है''. भागवत ने कहा कि हिंदू समाज पारंपरिक रूप से समावेशी और सभी को स्वीकार करने वाला रहा है जो रीति-रिवाजों, पहनावे, खान-पान, भाषा, जाति और उपजाति में विविधता को अपनाता है और इन मतभेदों को संघर्ष का कारण नहीं बनने देता.उन्होंने यह बातें मध्य महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के गंगापुर में आयोजित ‘हिंदू सम्मेलन' में कहीं.

आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘जो लोग एकीकरण और सद्भावपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखते हैं, वे हिंदू समाज और देश के सच्चे चरित्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह परंपरा सदियों से आक्रमणों और विनाश के बावजूद संरक्षित रही है. ऐसे लोग हिंदू कहलाते हैं और उनकी भूमि भारत कहलाती है.'' उन्होंने कहा कि यदि लोग अच्छे, दृढ़ और ईमानदार बनने का प्रयास करें, तो देश भी वैश्विक मंच पर इन गुणों को प्रदर्शित करेगा. उन्होंने कहा कि विश्व भारत से कुछ अपेक्षा रखता है और पर्याप्त शक्ति एवं प्रभाव होने पर देश सार्थक योगदान देने में सक्षम होगा.

विदेशी वस्तुओं पर

भागवत ने कहा कि शक्ति में केवल सशस्त्र बल ही नहीं, बल्कि बुद्धि, सिद्धांत और नैतिक मूल्य भी शामिल होते हैं. भागवत ने आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा, ‘‘हमें स्थानीय वस्तुएं खरीदनी चाहिए. जो चीज यहां नहीं बन सकती, उसे अन्य देशों से खरीदा जा सकता है. भारतीय नीति निर्माता अंतरराष्ट्रीय व्यापार कर रहे हैं, लेकिन किसी के दबाव में नहीं. हमने आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना है और हमें इसी मार्ग पर चलना चाहिए. हमें विदेशों में रोजगार सृजन की चिंता नहीं करनी चाहिए, यह उन्हें करना है. जब वैश्वीकरण की बात करते हैं, तो वे वैश्विक बाजार की अपेक्षा रखते हैं, हम वैश्विक परिवार की अपेक्षा रखते हैं.''

हथियार कब जरूरी

आरएसएस प्रमुख ने हिंदुओं में एकता का आह्वान किया और कहा कि यह केवल आरएसएस का उद्देश्य नहीं, बल्कि समुदाय के सभी सदस्यों का लक्ष्य होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘हमें जाति, संप्रदाय, भाषा या व्यवसाय की परवाह किए बिना हिंदू मित्र बनाने चाहिए. इससे समानता स्थापित होगी. संघ पहल करेगा, लेकिन समुदाय को इसका नेतृत्व करना होगा.'' उन्होंने कहा, ‘‘भगवान राम ने भी रावण से बातचीत के जरिए युद्ध टालने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में हथियार उठाए. हमें भी अन्याय के खिलाफ कदम-दर-कदम लड़ना चाहिए.''

संघ का काम

आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित युवा सम्मेलन में भागवत ने युवाओं से अपील की कि वे ज्ञान और कौशल प्राप्त करने के लिए विदेश जाएं, लेकिन इसे भारत के विकास में उपयोग करें. उन्होंने कहा, ‘‘युवाओं का योगदान देश की प्रगति और भविष्य निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है.' ' भागवत ने कहा, ‘‘संघ न तो किसी का विरोध करता है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा में है. इसका उद्देश्य केवल एक मजबूत और सामंजस्यपूर्ण समाज का निर्माण करना है.'' उन्होंने युवाओं से इस सामूहिक प्रयास में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की.' इस युवा सम्मेलन का आयोजन एमआईटी कॉलेज में किया गया, जहां आरएसएस प्रमुख ने प्रतिभागियों से बातचीत की और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए.

Featured Video Of The Day
BMC Election 2026 Result: BJP शहरी निकायों में सबसे बड़ी, BMC में बॉस, ठाणे में शिवसेना का दम
Topics mentioned in this article