रोहित शेट्टी गोलीकांड EXCLUSIVE: हथियारों के साथ रील बनाने वाले यूपी के युवकों को बरगला कर ट्रेन किया गया

रोहित शेट्टी फायरिंग मामले में सूत्रों का दावा है कि आरोपियों का रिक्रूटमेंट कोई साधारण तरीके से नहीं हुआ. उन्‍हें बाकायदा बड़े-बड़े सपने दिखाए गए और कम समय में नाम और पैसा कमाने का लालच दिया गया.

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  • रोहित शेट्टी फायरिंग मामले में हरियाणा-UP से पकड़े आरोपियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं.
  • जांच में पता चला है कि हथियारों के साथ रील बनाने वाले बेरोजगार युवाओं को बड़े सपने दिखाकर बरगलाया जाता था.
  • क्राइम ब्रांच को शक है कि मुख्य शूटर दीपक शर्मा को घटना से पहले पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग दी गई थी.
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मुंबई:

बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. हरियाणा और उत्तर प्रदेश से पकड़े गए आरोपियों से मुंबई क्राइम ब्रांच की पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी साजिश के पीछे शुभम लोनकर का नाम सामने आया है. जांच में पता चला है कि लोनकर के कहने पर विष्णु कुशवाहा ने शूटर दीपक शर्मा, सनी कुमार, सोनू कुमार और अन्य लड़कों को इस काम के लिए तैयार किया. साथ ही खुलासा हुआ है कि हथियारों के साथ रील बनाने वाले बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया गया. 

सूत्रों का दावा है कि रिक्रूटमेंट कोई साधारण तरीके से नहीं हुआ. आरोपियों को बाकायदा बड़े-बड़े सपने दिखाए गए और कम समय में नाम और पैसा कमाने का लालच दिया गया. साथ ही गैंग से जुड़कर “बड़ा आदमी” बनने का वादा किया गया. 

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बेरोजगार युवाओं को किया टारगेट

बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाने वाले और बेरोजगार युवकों को टारगेट किया गया. आगरा जिले से ऐसे लड़कों को चुना गया जो पहले से गैंग की छवि से प्रभावित थे. 

क्राइम ब्रांच को शक है कि मुख्य शूटर दीपक शर्मा को घटना से पहले पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग दी गई थी. हालांकि यह ट्रेनिंग कहां और किसने दी, इस पर अभी साफ जानकारी नहीं है. इस कड़ी में मुंबई क्राइम ब्रांच और यूपी एसटीएफ सबूत जुटाने में लगी हैं. 

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50 हजार का पेमेंट, मोटी रकम का वादा

जांच में सामने आया है कि फायरिंग से पहले 50 हजार रुपये की रकम शुभम लोनकर ने विष्णु कुशवाहा को भेजी थी. कुशवाहा ने वही रकम आगे शूटर दीपक को दी. 

इसके अलावा आरोपियों को यह भी भरोसा दिलाया गया था कि वारदात के बाद उन्हें मोटी रकम दी जाएगी. सूत्रों का कहना है कि बिश्‍नोई गैंग के नाम पर उन्हें पैसे और पहचान का लालच दिया गया. 

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आरोपियों को सिग्नल ऐप पर मिला टारगेट

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों से सिग्नल ऐप के जरिए बातचीत की गई और वहीं टारगेट की जानकारी दी गई. गिरफ्तार सातों आरोपियों को पहले से पता था कि निशाना कौन है.

फायरिंग के बाद जब शूटर और उसके साथी आगरा और फिर नोएडा पहुंचे, तो उन्हें शरण देने वाले जतिन और विशाल को भी इस बात की जानकारी थी कि वे किस वारदात को अंजाम देकर आए हैं. 

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मोबाइल बंद, 16 दिन नहीं हुए ट्रेस 

जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात से पहले दीपक ने अपना मोबाइल बंद कर साथी सनी कुमार को दे दिया था, जो जुहू चौपाटी इलाके में ही रुका हुआ था. 

घटना के बाद आरोपियों ने अपने फोन ऑन नहीं किए. यही वजह रही कि करीब 16 दिनों तक क्राइम ब्रांच उन्हें ट्रैक नहीं कर सकी. आखिरकार पुलिस ने डंप डाटा के जरिए लोकेशन और मूवमेंट खंगालकर आरोपियों तक पहुंच बनाई. 

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