- प. बंगाल में कांग्रेस के 100% विधायक मुस्लिम- यहां अल्पसंख्यक वोट बैंक पर कांग्रेस ने मजबूत पकड़ बनाए रखी है.
- असम में कांग्रेस के सभी मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते. यह इस समुदाय में पार्टी की मजबूत पैठ को दिखाता है.
- केरल में भी 2021 के मुकाबले कांग्रेस में मुसलमान विधायकों की संख्या 5 अधिक है.
2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने मुसलमानों के वोटों को लेकर एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण राजनीतिक ट्रेंड सामने रखा है. दो राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में कांग्रेस के पाले में मुसलमान विधायकों का अनुपात बेहद ऊंचा देखने को मिला है. भारतीय जनता पार्टी ने इन राज्यों में एक भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था. यह रणनीतिक अंतर लंबे समय से देखने को मिल रहा है.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लंबे समय से कांग्रेस पार्टी पर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है. यह बीजेपी के चुनावी विमर्श का एक प्रमुख हिस्सा रहा है. अब जब पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव नतीजे को देखें तो वहां कांग्रेस के विधायकों में मुसलमानों की संख्या 95% से अधिक है. इन दोनों राज्यों में कांग्रेस का केवल एक विधायक ही गैर मुसलमान है.
पश्चिम बंगालः कांग्रेस के 100% विधायक मुसलमान
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के कुल 2 विधायक जीते और दोनों ही मुस्लिम समुदाय से हैं. यानी 100 प्रतिशत प्रतिनिधित्व. फरक्का से मोताब शेख और रानीनगर से जुल्फिकार अली की जीत ने यह साफ कर दिया कि पार्टी ने यहां अल्पसंख्यक वोट बैंक पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है.
सिर्फ विधायक ही नहीं, कांग्रेस ने राज्य में सबसे ज्यादा 78 मुस्लिम उम्मीदवार भी उतारे. इसके उलट बीजेपी ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा, जबकि 2021 में उसने 9 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 6 दूसरे स्थान पर रहे थे.
असमः कांग्रेस के 95% विधायक मुसलमान
विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में असम में कांग्रेस के 19 विधायकों में से 18 मुसलमान हैं. यानी यहां कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों की संख्या 95 फीसद है. असम के लखीमपुर के नवबोइचा सीट से डॉ. जॉय प्रकाश दास अकेले गैर-मुस्लिम विधायक हैं. यह कांग्रेस की पारंपरिक सीट मानी जाती है. खास बात यह है कि कांग्रेस के सभी मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में सफल रहे, जो इस समुदाय में पार्टी की मजबूत पैठ को दिखाता है.
केरलः संतुलित लेकिन प्रभावी उपस्थिति
वहीं केरल में कांग्रेस के 62 विधायकों में से 8 मुस्लिम हैं, जो कुल का लगभग 13% है. यहां सामाजिक संतुलन ज्यादा विविध है. कुल 63 विधायकों में 12 मुस्लिम, 46 ईसाई और सिर्फ 5 हिंदू विधायक हैं.
कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों में टी सिद्दीकी, आर्यादन शौकथ, केपी नौशाद अली, अनवर सादत, मोहम्मद शियास, शानिमोल उस्मान, एम एम नसीर और मुहम्मद सुधीर शामिल हैं.
यह संख्या 2021 के मुकाबले 5 अधिक है, जो कांग्रेस की रणनीति में बदलाव को दर्शाता है.
बीजेपी की रणनीति पर सवाल
तीनों राज्यों में बीजेपी द्वारा एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए बड़ा सवाल बन गया है.
जहां कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर अपनी सामाजिक गठजोड़ मजबूत कर रही है, वहीं बीजेपी का यह रुख उसकी अलग चुनावी रणनीति को दर्शाता है.
यह अंतर आने वाले चुनावों में वोट बैंक की राजनीति और ध्रुवीकरण पर गहरा असर डाल सकता है.
सियासी संकेत क्या हैं?
2026 के नतीजे साफ संकेत देते हैं कि कांग्रेस ने कई राज्यों में अल्पसंख्यक समुदाय पर अपना फोकस बढ़ाया है.
पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मुस्लिम विधायकों का इतना बड़ा अनुपात यह दिखाता है कि पार्टी ने स्थानीय सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकट वितरण किया.
दूसरी ओर बीजेपी का मुस्लिम उम्मीदवारों से दूरी बनाना उसके कोर वोट बैंक पर भरोसे को दर्शाता है.
2026 के विधानसभा चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय राजनीति में प्रतिनिधित्व की रणनीति तेजी से बदल रही है.













