वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस साल ऐसे वक्त पर बजट पेश करेंगी जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, और इसकी वजह से अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, व्यापार, ग्लोबल एनर्जी मार्केट और एक्सपोर्टरों में अनिश्चितता भी बढ़ती जा रही है. साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 50% रेसिप्रोकाल टैरिफ की तलवार भी भारत पर लटक रही है.उद्योग जगत को उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजटीय प्रस्तावों में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के इस ताज़ा घटनाक्रम का अंतराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने वाले संभावित असर को ध्यान में रखेंगी.
PHDCCI के सेक्रेटरी जनरल रणजीत मेहता ने एनडीटीवी से कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त मंत्री "विकसित भारत" के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए नया आधार तैयार करने के लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर पूंजीगत खर्च (Capex) बढ़ाएंगी. वित्त मंत्री को Ease of Doing Business के साथ-साथ Cost of Doing Business पर भी ध्यान देना चाहिए, उन्हें व्यवसाय करने की लागत से संबंधित मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. विकसित भारत के लक्ष्य को बजटिंग के साथ align करने की ज़रुरत है".
PHDCCI के मुताबिक, देश में करीब 7 करोड़ छोटे-लघु (MSME) उद्योग हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था में MSME उद्यमियों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए उन तक आसान शर्तों पर क्रेडिट पहुँचाना ज़रूरी है, और बेहतर मार्किट एक्सेस के लिए सपोर्ट की ज़रुरत है.PHDCCI का सुझाव है कि अंतराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता के माहौल में एक्सपोर्ट पर आधारित ग्रोथ स्ट्रेटेजी को आगे बढ़ाना ज़रूरी है, और बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान करना बेहतर होगा.














