- नादिया के शांतिपुर में बंगाली राम की थीम पर भव्य राम मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र बनाने की योजना है
- श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट ने 2017 से इस परियोजना पर काम शुरू कर जमीन का अंतिम सर्वेक्षण पूरा किया
- पूर्व तृणमूल विधायक अरिंदम भट्टाचार्य जो अब भाजपा में हैं, इस मंदिर निर्माण के ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं
बंगाल की राजनीति में जैसे-जैसे चुनावी माहौल गहराता जा रहा है, मंदिर–मस्जिद की चर्चा और तेज होती जा रही है. हाल ही में मुर्शिदाबाद के बेलदांगा में बाबरी मस्जिद के निर्माण की बात उठी थी. वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पिछले एक महीने में दुर्गा आंगन और महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया गया है. इधर नादिया जिले के शांतिपुर में ‘बंगाली राम' की थीम पर एक भव्य राम मंदिर बनाने की योजना है.
मंदिर निर्माण को लेकर क्या कहा जा रहा है?
यह प्रस्तावित मंदिर केवल धार्मिक संरचना नहीं होगा, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर कृतिबास ओझा की परंपरा को समर्पित एक महत्त्वपूर्ण केंद्र होगा. कृतिबास ओझा वही कवि हैं जिन्होंने 15वीं शताब्दी में संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली' लिखा था. जो आज भी हर बंगाली घर में श्रद्धा से पढ़ी जाती है. इसी ‘बंगाली राम' की अवधारणा को केंद्र में रखकर शांतिपुर में विशाल राम मंदिर और हेरिटेज सेंटर बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है.
श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट, जो एक पंजीकृत धार्मिक और जनकल्याणकारी संस्था है, इस मंदिर का निर्माण कराने जा रहा है. रविवार को ट्रस्ट के सदस्यों ने मंदिर निर्माण के लिए जमीन मापने का अंतिम सर्वेक्षण किया, जिसे इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है. ट्रस्ट 2017 से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.
BJP विधायक हैं ट्रस्ट के अध्यक्ष
ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व तृणमूल विधायक अरिंदम भट्टाचार्य जो बाद में बीजेपी में शामिल हुए ने NDTV से बातचीत में कहा कि “शांतिपुर तो भक्ति आंदोलन की धरती है. कृतिबास ओझा ने राम को बंगाल की भावभूमि से जोड़ दिया था. उन्होंने जिस ‘राम' की कल्पना की, वह बंगाली संस्कृति के बेहद करीब थे. इसीलिए उन्हें ‘हरा राम' भी कहा जाता है. हम 2017 से इस परियोजना पर काम कर रहे हैं, यह चुनावी प्रोजेक्ट नहीं है.”
उन्होंने बताया कि इस मंदिर के लिए 15 कट्ठा नहीं, बल्कि 15 बीघा जमीन स्थानीय निवासियों लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी ने दान की है. मंदिर का लक्ष्य 2028 तक 100 करोड़ रुपये की लागत से पूरा करना है.ट
नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान हैं संरक्षक
नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को मंदिर का आधिकारिक संरक्षक नियुक्त किया गया है. मंदिर परिसर में एक सांस्कृतिक केंद्र, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, और एक शोध केंद्र भी स्थापित करने की योजना है. भूमि दान करने वाली पूजा बनर्जी ने कहा कि ट्रस्ट का गठन 2025 में कृतिबास ओझा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए किया गया था. उनके राम बंगाली राम हैं. आज जमीन का माप हो गया है. कई और लोग जमीन देने की इच्छा जता रहे हैं.
स्थानीय निवासी सुमन बैनर्जी ने बताया कि म शांतिपुरवासी इस परियोजना का समर्थन कर रहे हैं. यह जगह कृतिबास की रामायण से जुड़ी हुई है. हमारा मानना है कि यहां राम मंदिर बनना चाहिए.
मंदिर निर्माण पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
हालांकि मंदिर निर्माण ऐसे समय में चर्चा का विषय बना है जब राज्य में मंदिर-मस्जिद की राजनीति चरम पर है, लेकिन ट्रस्ट का दावा है कि यह परियोजना पूरी तरह सांस्कृतिक और धार्मिक है. अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि इसमें राजनीति का कोई संबंध नहीं है. लेकिन अगर सरकार मदद करना चाहे तो हम स्वागत करेंगे. यह विरासत और संस्कृति का प्रोजेक्ट है.
शांतिपुर, नदिया के होड़घाट–हुगली नदी तट पर स्थित ऐतिहासिक कस्बा, चैतन्य महाप्रभु की परंपरा, भक्ति आंदोलन, और कीर्तन संस्कृति का महत्त्वपूर्ण केंद्र रहा है. ऐसे में कृतिबास ओझा की परंपरा पर आधारित ‘बंगाली राम मंदिर' इस क्षेत्र को नया धार्मिक और सांस्कृतिक आयाम दे सकता है.













