बिना आदेश रखी हुंडियों की चाभी, ट्रस्ट को हो गया था चोरी का अंदेशा... राम मंदिर पर SIT रिपोर्ट की इनसाइड स्टोरी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में SIT की जांच में कई तथ्य सामने आए हैं. सबसे अहम जानकारी यह निकली है कि 27 अप्रैल से 5 जून के दौरान 42 दिनों ही 70 बार चोरी हुई. इस मामले में 8 लोगों पर FIR दर्ज हुई है. सभी गिरफ्तार हो चुके हैं. इस बीच अब वह कहानी भी सामने आई जिसमें यह पता चला कि राम मंदिर में चढ़ावे में मिलने वाली राशि और जेवरातों की चोरी कैसे होती थी?

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राम मंदिर के चढ़ावे में मिले कैश और जेवरात की चोरी कैसे होती थी, जानिए.
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  • शक होने के बाद नोट गिनने वाले कमरे में कुछ हिडेन कैमरे लगवाए गए. जिसमें चढ़ावा चोरी का सारा राज सामने आ गया.
  • जो श्रद्धालु दानपेटी में जेवरात दान करते थे, उसको भी यह लोग चोरी कर लेते थे.
  • बाली, झुमकी, नथ, बाल रूप रामलाल के कंगन, पैजनिया जैसे जेवरात भी चोरी कर लेते थे.
अयोध्या:

Ram Temple Donation Theft: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की इनसाइड स्टोरी सामने आई है. यहां भगवान राम को चढ़ावे में मिलने वाली राशि की चोरी कैसे हो रही थी? चढ़ावा गायब हो रहा है, इसका शक कब गहराया? चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद SIT की जांच में कब-कैसे पक्के सबूत मिले, इन सब चीजों की जानकारी सामने आई है. मिली जानकारी के अनुसार मई महीने के आखिरी सप्ताह में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियो ने बैंक में जमा हो रही रकम का ब्योरा देखा. रोजाना दान पेटियों के खाली होने के क्रम की पड़ताल की तो सबसे चोरी का शक पैदा हुआ.

सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी टिन्नू के पास बिना आदेश के ही हुंडियों की चाभी थी. SIT की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि ट्रस्ट को बहुत पहले ही चोरी का अंदेशा हो गया था. सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक के बीच बैठक में एसओपी भी बनी थी. स्टेट बैंक की तरफ से गोविन्द मिश्र और ट्रस्ट की तरफ से अनिल मिश्र ने अभिलेख पर हस्ताक्षर किया था. लेकिन बाद में गणना प्रक्रिया में एसओपी का इस्तेमाल नहीं हुआ. SIT की रिपोर्ट में जानबूझकर की गई लापरवाही का भी जिक्र है.

हिडेन कैमेरे में चोरी की खुल गई पोल

दरअसल एक दान पेटी में 6 से 7 लाख रुपए एक बार में जमा होते थे, लेकिन कुछ सप्ताह के क्रम में 500 की गड्डी में कमी देखी गई. इसके बाद शक गहराया तो नोट गिनने वाले कमरे में कुछ हिडेन कैमरे लगवाए गए. इन हिडेन कैमरे की एक सप्ताह की फुटेज देखी गई तो चढ़ावा चोरी का सारा राज सामने आ गया. 

हिडेन कैमरे में दिखा कि नोट गिनने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारी सामने दिख रहे सीसीटीवी के सामने खड़े हो जाते और दूसरा साथी बनाए गए नोटों की गड्डी में नोट चोरी कर कपड़ों में छुपा लेते हैं. लेकिन हिडन कैमरे में उनकी यह चोरी पकड़ी गई.

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नोटों की गड्डी में एक्स्ट्रा नोट भी लगा दिया जाता

यहां चोरी एक और तरह से हो रही थी. नोट गिनने वाले कर्मचारी हर गड्डी में एक्स्ट्रा नोट जमा कर देते. जब बैंक के पास रकम गिनने की बारी आती तो हर गड्डी के एक एक नोट को गिनने के बजाए सिर्फ गड्डी गिनी जाती और उसका वाउचर बन जाता. 

जब यह रकम बैंक में जमा करने के लिए मंदिर से बैंक में ले जाई जाती उस दौरान हर गड्डी में जो एक्स्ट्रा नोट लगाए गए थे वह निकाल दिए जाते. इस तरह वाउचर से रकम का मिलान भी हो जाता और रकम चोरी भी हो रही थी. अनुकल्प मिश्रा चढ़ावे के वाउचर बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा था और वह यही हेरा फेरी अपने बहनोई लवकुश मिश्रा के जरिए कर रहा था.

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लवकुश मिश्र के घर से 10 लाख रुपए भी मिले

मामला खुलने के बाद लवकुश मिश्रा के ही घर से पुलिस ने करीब 10 लाख रुपए बरामद भी किए थे. नोट गिनने की प्रक्रिया से जुड़े सभी कर्मचारी किसी न किसी के परिचित थे, किसी न किसी की सिफारिश से काम करते थे.

जैसे चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव व्यवस्थापक था तो टिन्नू यादव ने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने की प्रक्रिया में लगा दिया था. ऐसे ही सालों से कम कर रहे अनुकल्प मिश्रा ने अपने बहनोई लवकुश मिश्रा को लगवा दिया था.

ड्यूटी से वापस जाते समय किसी भी कर्मचारी की तलाशी नहीं लेने की लापरवाही का ही नतीजा था कि धीरे-धीरे उस कमरे से ही चोरी करने लगे थे जहां दान पेटियां खुलती, नोट छांटे जाते और गड्डी बनाई जाती थी.

अविनाश पांडे सीसीटीवी फुटेज में चोरी करते दिखा

पकड़े गए अविनाश पांडे के सीसीटीवी फुटेज देखे गए और उसके द्वारा जो रकम चोरी की जा रही थी इस तारीख में बैंक में रकम जमा भी कराई गई है. राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी ने पूछताछ के दौरान मिलान कराया तो पुष्टि हुई की चढ़ावा चोरी से जमा की गई रकम का एक हिस्सा अविनाश अपने बैंक खाते में जमा कर रहा था.

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चोरी पहले करते, दान पेटी में मिले रकम या जेवरात का हिसाब बाद में लिखते

जो श्रद्धालु दानपेटी में जेवरात दान करते थे, उसको भी यह लोग चोरी कर लेते. बाली, झुमकी, नथ, बाल रूप रामलाल के कंगन, पैजनिया जैसे जेवरात भी चोरी कर लेते थे. सबसे अहम बात की चोरी पहले करते बाद में नोटों की गिनती या दान पेटी में मिले जेवरात की लिखा पढ़ी होती थी.

इसके अलावा इस मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र ऐसे व्यक्ति हैं, जो बराबर राम मंदिर ट्रस्ट के उस कमरे में आते-जाते थे जहां दान पेटियां खुलती थी.

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