राज्यसभा के लिए 3 राज्यों में चुनाव की नौबत, बिहार में तीन तो हरियाणा में 9 वोट कैसे लाएगी बीजेपी

बिहार में, एनडीए ने सभी पांचों सीटों के लिए उम्मीदवार उतारे हैं. हालांकि उसके पास केवल चार उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के ही नंबर हैं. वहां करीब एक दशक बाद चुनाव की नौबत आ रही है. एक सीट जीतने के लिए 41 वोट चाहिए. ए

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बिहार, हरियाणा और ओडिशा में होगा राज्यसभा चुनाव.
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  • राज्यसभा चुनाव के लिए बिहार, हरियाणा और ओडिशा में नामांकन पत्र भरे जाने के बाद मतदान की संभावना बन गई है
  • हरियाणा में बीजेपी समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार सतीश नांदल के कारण तीन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा
  • बिहार में एनडीए पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं लेकिन उनके पास केवल चार सीट जीतने के लिए पर्याप्त नंबर हैं
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नई दिल्ली:

राज्यसभा चुनाव के लिए कल नामांकन पत्र भरे जाने के साथ ही तीन राज्यों में चुनाव की स्थिति बनती दिख रही है. अगर नाम वापस नहीं लिए जाते हैं तो बिहार, हरियाणा और ओडिशा में 16 मार्च को मतदान की नौबत आएगी. इन तीनों ही राज्यों में सत्तारूढ़ बीजेपी ने विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की बिसात बिछा ली है. ऐसे में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग की संभावना बनती दिख रही है.

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हरियाणा में दो सीटों के लिए अब तीन उम्मीदवार मैदान में

दिलचस्प मुकाबला हरियाणा में होगा, जहां सतीश नांदल ने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन पत्र दायर किया है. बीजेपी ने उन्हें अपना समर्थन दिया है. वहां दो सीटों के लिए अब तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. विधानसभा की ताक़त के अनुसार, भाजपा और कांग्रेस दोनों एक-एक सीट जीत सकते हैं. वे आसानी से जीत के लिए आवश्यक 31 प्रथम वरीयता वोट प्राप्त कर सकते हैं. 48 विधायकों के साथ भाजपा के पास तीन निर्दलीयों का समर्थन है और इनेलो के दो विधायकों को भी वोट देने की उम्मीद है.

अगर भाजपा अपने सरप्लस 22 वोटों को स्थानांतरित करती है, तो भी नांदल के पास नौ वोटों की कमी होगी. ऐसे में हरियाणा में क्रॉस-वोटिंग की नौबत आ सकती है. कांग्रेस के लिए दिक्कत यह भी है कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उदय भान और अशोक तंवर जैसे वरिष्ठ नेताओं के दावों की अनदेखी करते हुए लो प्रोफ़ाइल कर्मवीर सिंह बौद्ध को अपने उम्मीदवार के रूप में चुना है, जबकि भाजपा ने पूर्व लोकसभा सांसद संजय भाटिया को मैदान में उतारा है.

बिहार में 5 सीटों पर NDA के उम्मीदवार

वहीं बिहार में, एनडीए ने सभी पांचों सीटों के लिए उम्मीदवार उतारे हैं. हालांकि उसके पास केवल चार उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के ही नंबर हैं. वहां करीब एक दशक बाद चुनाव की नौबत आ रही है. एक सीट जीतने के लिए 41 वोट चाहिए. एनडीए के पास 202 विधायक हैं. ऐसे में चार सीट जीतने के बाद उसके पास 38 सरप्लस वोट होंगे और पांचवी सीट जीतने के लिए केवल तीन अतिरिक्त वोट चाहिए.

क्रॉस वोटिंग की उम्मीद

राजद के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को अपने उम्मीदवार जिताने के लिए छह वोट कम हैं. एनडीए ने क्रॉस वोटिंग की उम्मीद में आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को मैदान में उतारा है. वे केवल तीन अतिरिक्त वोटों से ही जीत हासिल कर सकते हैं.

ओडिशा में 2 सीटें जीत सकती है बीजेपी

ओडिशा में, चार सीटों पर मतदान होने जा रहा है. विधानसभा में संख्या को देखते हुए, भाजपा दो सीटें जीत सकती है. राज्य भाजपा प्रमुख मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार को बीजेपी ने उतारा है. जबकि बीजेडी को एक सीट मिल सकती है। बीजेडी ने नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी डॉ. संतरप्त मिश्रा को उतारा है. भाजपा को चौथी सीट छीनने से दूर रखने के उद्देश्य से बीजद, कांग्रेस और माकपा ने हाथ मिलाया है और एक अन्य उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होटा का समर्थन करने का फैसला किया है.

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ओडिशा विधानसभा के मौजूदा अंकगणित के अनुसार, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम तीस प्रथम वरीयता के वोट चाहिए. 147 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के पास 79, बीजद के पास 50 (दो विधायकों के निलंबन के बाद प्रभावी संख्या 48) और कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं.

बीजेपी के पास बचेंगे लगभग 19 सरप्लस वोट 

विधानसभा में दलीय स्थिति को देखते हुए तीन सीटों का परिणाम लगभग तय माना जा रहा है. अपने 79 विधायकों के दम पर भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है. इन दोनों की जीत के बाद भी भाजपा के पास लगभग 19 सरप्लस वोट बचेंगे. असली मुकाबला चौथी सीट के लिए है, क्योंकि किसी भी एक दल के पास अकेले इस सीट को जीतने के लिए बहुमत (30 वोट) नहीं है. ऐसे में दिलीप रे की उम्मीदें क्रॉस वोटिंग पर टिकी हैं.

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