उद्धव ठाकरे के जन्मदिन पर भाई से मिलने मातोश्री जा रहे हैं राज ठाकरे

उद्धव और राज ठाकरे ने कुछ दिन पहले ही एक साथ आने का ऐलान किया है. दोनों भाई 20 साल बाद एक साथ एक मंच पर आए थे.

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उद्धव ठाकरे से मिलने मातोश्री जाएंगे राज ठाकरे
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  • उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लगभग बीस साल बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक साथ एक मंच पर नजर आए थे.
  • राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे के जन्मदिन पर मातोश्री जाकर पहली बार तेरह वर्षों बाद मुलाकात की.
  • राज ठाकरे ने हिंदी भाषा विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदी थोपने को स्वीकार्य नहीं बताया था.
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मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में अब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ हैं. कुछ दिन पहले ही दोनों भाई 20 साल बाद एक मंच पर एक साथ नजर आए थे. उस दौरान उद्धव और राज ठाकरे ने कहा था कि हम महाराष्ट्र की राजनीति को बदलने के लिए एक साथ आए हैं. आज (रविवार को) उद्धव ठाकरे का जन्मदिन है और इस खास मौके पर राज ठाकरे उनसे मुलाकात करने मातोश्री जा रहे हैं. आपको बता दें कि बीते कई सालों में ये पहला मौका है जब राज ठाकरे मातोश्री जा रहे हैं. बालासाहेब के निधन से पहले जब उद्धव ठाकरे की हार्ट सर्जरी हुई थी तब हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने पर राज ठाकरे ने उन्हें घर तक अपनी कार से छोड़ने गए थे. 

इसके बाद, जब उद्धव ठाकरे लीलावती अस्पताल में हार्ट ट्रीटमेंट के बाद घर लौटे, तब भी राज ठाकरे ने उन्हें अपनी कार से मातोश्री तक छोड़ा था.इससे पहले भी 5 जुलाई को दोनों नेता एक ही मंच पर एक साथ नजर आए थे, जिससे एकता की संभावनाओं को बल मिला था. 

उस दौरान राज ठाकरे ने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी बात रखी थी. राज ठाकरे ने हिंदी को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी.उन्होंने कहा था कि हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम में जाते हैं तो हमारे मराठी पर सवाल उठते हैं. लालकृष्ण आडवाणी मिशनरी स्कूल में पढ़ें हैं तो क्या उनके हिंदुत्व पर सवाल उठाएं क्या? हम कभी भी हिंदी को थोपना बर्दाश्त नहीं करेंगे. वे बस मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहते हैं, यही उनका एजेंडा है. 

राज ठाकरे ने कहा था कि हमें हल्के में लेने की कोशिश कोई ना करे.मुझे ऐसा लग रहा है कि हमें अलग करने की हर संभव कोशिश की जा रही है. बात रही हिंदी बोलने की तो हिंदी बोलने वाले यहां रोजगार के लिए आ रहे हैं. हिंदी बोलने वाले राज्यों की आर्थिक स्थिति कमजोर है. मैं ये मानता हूं कि हिंदी अच्छी भाषा है.हमें ये बुरी नहीं लगती है. देश की सभी भाषाएं अच्छी हैं. लेकिन हिंदी के नाम पर छोटे-छोटे बच्चों से जबरदस्ती नहीं सही जाएगी.  मुंबई महाराष्ट्र से अलग नहीं है. मराठों की महानता का एक लंबा इतिहास रहा है.

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