कृषि मंत्री ने बताया बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कितना हुआ फसलों को नुकसान, मुआवजे पर दी ये जानकारी

प्रभावित राज्यों की तरफ से कृषि मंत्रालय को भेजे गए रिपोर्ट के अनुसार 8 अप्रैल तक 2.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को कुल नुकसान हुआ है. 

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  • बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से अब तक लगभग दो लाख उनचालीस हजार हेक्टेयर में रबी फसलों को नुकसान पहुंचा है.
  • गेहूं की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, इसके बाद बागवानी फसलों को भी बुरी तरह प्रभावित किया गया है.
  • कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों को फसल क्षति का मूल्यांकन समय पर करने के निर्देश दिए हैं.
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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने कई राज्यों में अब तक लगभग 2.49 लाख हेक्टेयर में खड़ी रबी फसलों, विशेषकर गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को ये अहम जानकारी सार्वजनिक की. मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में उन्नत कृषि मेला के शुभारंभ से पहले चौहान ने मीडिया से कहा, "फसल क्षति का आकलन अभी भी चल रहा है. मूल्यांकन तीन अलग-अलग विभागों द्वारा किया जा रहा है."

बागवानी फसलों को भी नुकसान

इस प्राकृतिक आपदा के दौरान गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, उसके बाद बागवानी फसलों को नुकसान हुआ है. प्रभावित राज्यों की तरफ से कृषि मंत्रालय को भेजे गए रिपोर्ट के अनुसार 8 अप्रैल तक 2.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को कुल नुकसान हुआ है.  असामान्य मौसम और ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति पर रिपोर्ट मिलने के बाद कृषि मंत्री ने सभी राज्य सरकारों से तत्काल नुकसान का आंकलन करने को कहा है.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर कृषि मंत्री का आदेश

कृषि मंत्रालय के मुताबिक कृषि मंत्री ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट समय पर और वैज्ञानिक तरीके से हों, राजस्व, कृषि और पंचायत/ग्रामीण विकास – तीन विभाग संयुक्त सर्वे करें, नुकसान की सूची गांव–गांव के पंचायत भवनों पर चस्पा की जाए, ताकि किसान आपत्ति या सुधार के लिए आवेदन दे सकें. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पूरी टीम सक्रिय है, लेकिन मौसम की मार विभिन्न चरणों में पड़ने और आंकड़े लगातार अपडेट होने के कारण अभी अंतिम कुल नुकसान बताना संभव नहीं है. किसान को हरसंभव राहत और बीमा लाभ दिलाने में कोई कमी नहीं रखी जाएगी.

साथ ही, पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से नेचुरल गैस और उर्वरक की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बुरा असर पड़ा है. कृषि मंत्री ने माना कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव एक्सपोर्ट पर पड़ता है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता यह है कि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले, फर्टिलाइज़र की उपलब्धता बनी रहे और किसान पर वैश्विक संकट का बोझ न्यूनतम रहे.

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फर्टिलाइज़र सेक्टर में कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार ने तय किया है कि यूरिया की बोरी 266 रुपये और डीएपी की बोरी 1350 रुपये में ही किसानों को मुहैया कराई जाएगी.

इसी हफ्ते बुधवार, 08 अप्रैल को केंद्रीय कैबिनेट ने खरीफ सीजन 2026 के लिए फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy) दरों को मंजूरी दी है. कैबिनेट नोट के मुताबिक, खरीफ सीजन 2026 के लिए अनुमानित बजटीय आवश्यकता लगभग 41,533.81 करोड़ रुपये होगी, जो खरीफ सीजन 2025 के बजटीय आवश्यकता से लगभग 4,317 करोड़ रुपये अधिक है.

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