बुधवार दोपहर 12 बजे लोकसभा में बोलेंगे राहुल गांधी, ट्रेड डील के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी

राहुल गांधी इस बार भारत-अमेरिका ट्रेड डील के संवेदनशील मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोल सकते हैं. गौरतलब है कि इससे पूर्व राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भी राहुल गांधी के संबोधन को लेकर सदन में काफी टकराव देखने को मिला था.

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  • लोकसभा में गतिरोध के बाद बजट पर चर्चा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. विपक्ष की ओर से राहुल गांधी बोलेंगे.
  • राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं को पहले बोलने का सुझाव दिया ताकि सत्ता पक्ष के हंगामे से बचा जा सके.
  • राहुल गांधी भारत-अमेरिका ट्रेड डील के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला करने की संभावना जताई जा रही है.
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लोकसभा में जारी भारी गतिरोध के समाप्त होने के बाद आखिरकार बजट पर चर्चा का रास्ता साफ हो गया है. इस महत्वपूर्ण बहस में विपक्ष की ओर से कमान संभालते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बुधवार दोपहर करीब 12 बजे अपना संबोधन देंगे. दिलचस्प बात यह है कि विपक्षी दलों की बैठक में राहुल गांधी ने स्वयं यह सुझाव दिया कि पहले अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर मिलना चाहिए. सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी को अंदेशा था कि उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से पुन हंगामा किया जा सकता है, जिसे देखते हुए उन्होंने अपनी रणनीति बदलते हुए अगले दिन बोलने का निर्णय लिया.

माना जा रहा है कि राहुल गांधी इस बार भारत-अमेरिका ट्रेड डील के संवेदनशील मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोल सकते हैं. गौरतलब है कि इससे पूर्व राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भी राहुल गांधी के संबोधन को लेकर सदन में काफी टकराव देखने को मिला था. यह विवाद इतना बढ़ गया था कि विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक का नोटिस दे दिया और कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि उनके नेता को सदन में अपनी बात रखने से रोका जा रहा है.

पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब को लेकर लोकसभा में बार-बार व्यवधान उत्पन्न हो रहा है. विपक्ष 'खुलासों' को उठाने पर अड़ा है, जबकि सरकार इसे रोकने पर अड़ी है. सोमवार को राहुल गांधी द्वारा सदन के बाहर पुस्तक की एक प्रति लहराने के बाद मामला और भी भड़क उठा, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच नए सिरे से तनाव और तीखी बहस छिड़ गई. इसके अलावा, विपक्ष के नेता ने स्थिति को और गंभीर बनाते हुए कहा कि वह पूर्व सेना प्रमुख के साथ मजबूती से खड़े हैं और उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया.

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