CEC-चुनाव आयुक्तों के 'कवच' बने किस कानून को बदलने की वॉर्निंग दे रहे राहुल? उसमें ऐसा क्या खास?

राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि मैं निर्वाचन आयुक्तों से कहना चाहता हूं कि वो सोचते होंगे कि यह कानून उन्हें बचाता है, लेकिन चिंता न करें, हम (सत्ता में आने पर) कानून बदलेंगे और आपको ढूंढ निकालेंगे.

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  • राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र में सरकार बनने पर चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से बचाने वाला कानून बदलेंगे
  • राहुल गांधी ने दावा किया कि 2023 का यह कानून निर्वाचन आयुक्तों को जो चाहें करने की ताकत देता है
  • राहुल जिस कानून का जिक्र कर रहे हैं, वह मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम 2023 है
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लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बड़ा राजनीतिक वादा किया. उन्होंने कहा कि अगर केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनती है तो वह उस कानून को बदल देगी जो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) को कानूनी कार्रवाई से छूट प्रदान करता है. क्या आप जानते हैं कि वो कौन सा कानून है, और उसमें क्या प्रावधान है, जो ऐसी इम्युनिटी प्रदान करता है, आइए बताते हैं. 

राहुल गांधी ने क्या कहा है?

राहुल गांधी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर 2023 के इस कानून में संशोधन किया जाएगा और चुनाव आयुक्तों को कठघरे में लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि मैं निर्वाचन आयुक्तों से कहना चाहता हूं कि वो सोचते होंगे कि यह कानून उन्हें बचाता है, लेकिन चिंता न करें, हम (सत्ता में आने पर) कानून बदलेंगे और वह भी पिछली तारीख (retrospectively) से ऐसा करेंगे और आपको ढूंढ निकालेंगे.

राहुल गांधी क्या तर्क दे रहे?

कांग्रेस पार्टी के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि 2023 के इस कानून को बदलने की जरूरत है क्योंकि यह निर्वाचन आयुक्तों को यह ताकत देता है कि वे जो चाहें करें. उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्त के चयन से चीफ जस्टिस को बाहर कर दिया गया है. 

किस कानून को बदलना चाहते हैं राहुल?

दरअसल राहुल गांधी जिस कानून को बदलने की बात कह रहे हैं, उसका नाम ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा-शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023' है. यह कानून पहले राज्यसभा और फिर लोकसभा से पारित होने के बाद 29 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति की मंजूरी से लागू हुआ था. इसने चुनाव आयोग (चुनाव आयुक्तों की सेवा की शर्तें और कार्य संचालन) अधिनियम, 1991 की  जगह ली थी. 

किस नियम से मिली चुनाव आयुक्तों को सुरक्षा

इस कानून की धारा 16 में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट प्रदान की गई है. इसके मुताबिक, वर्तमान या पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्तों द्वारा अपनी सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए किसी भी कार्य या वक्तव्य के लिए किसी भी अदालत में दीवानी या आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी. इस नियम के पीछे ये तर्क दिया गया था कि इससे चुनाव आयुक्त बिना किसी डर या पक्षपात के अपनी जिम्मेदारी निभा सकेंगे. 

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इस कानून से हुआ ये बड़ा बदलाव

इस कानून के जरिए एक और बड़ा बदलाव किया गया था. इस कानून के लागू होने से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की सदस्यता वाली समिति की सिफारिशों पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती थी. लेकिन इस कानून के जरिए चयन समिति में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है. विपक्ष का  नेता मौजूद न होने पर सबसे बड़े दल के नेता को समिति में रखा जाएगा. 

इसके जरिए यह भी तय किया गया कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति संभावित चुनाव आयुक्तों के 5 नामों का पैनल तैयार करेगी और चयन समिति के सामने रखेगी. इन पदों के लिए केंद्र सरकार में सचिव या समकक्ष पद वाले या पूर्व में रह चुके अधिकारी पर विचार किया जाएगा. नामों की खोज समिति में सचिव से कम स्तर के दो सदस्य भी होंगे जिनके पास चुनाव मामलों का ज्ञान और अनुभव होगा. 

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