- नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद राजनीति तेज हो गई हैं और विपक्षी दल सक्रिय हैं
- राहुल गांधी कल पटना के बापू सभागार में पान महासम्मेलन में शामिल होकर अति पिछड़ी जातियों से संपर्क करेंगे
- विपक्षी नीतीश के जाने के बाद अति पिछड़ा वोट बैंक को लुभाकर भाजपा और एनडीए को चुनौती देने की रणनीति बना रहा है
बिहार में नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज है. इस बीच लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पटना दौरे पर जा रहे हैं. राहुल कल यानी 12 अप्रैल को पटना के बापू सभागार में पान महासम्मेलन में शामिल होंगे. पाम महासम्मेलन बिहार की अति पिछड़ी जातियों का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका राहुल गांधी उद्घाटन करेंगे. ये दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विदाई और उत्तराधिकारी की चर्चाएं गर्म हैं. इस दौरान तेजस्वी यादव भी इस मंच पर राहुल गांधी के साथ दिखेंगे.
क्यों खास है पान महासम्मेलन?
पटना के बापू सभागार में पान महासम्मेलन का आयोजन इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (IIP) के स्थापना दिवस के मौके पर हो रहा है. इस कार्यक्रम में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव के साथ दीपांकर भट्टाचार्य भी शामिल होंगे. पान (तांती) समाज बिहार में अति पिछड़ी जातियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस वर्ग को साधना सत्ता की चाबी माना जाता है. इस बार यह सम्मेलन विपक्षी महागठबंधन इंडी अलायंस की एकजुटता के एक बड़े प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.
क्या है इसका इतिहास?
बता दें कि बिहार की 36 फीसदी आबादी अति पिछड़ा वर्ग से आती है. जाहिर तौर पर बिहार में इनका प्रभाव काफी ज्यादा है. अति पिछड़ा वर्ग में 100 से ज्यादा जातियां आती हैं. इसमें तांती, नोनिया, प्रजापति और मल्लाह जैसी जातियां शामिल हैं. ऐतिहासिक रूप से तांती जाति के लोग कपड़ा बुनने का काम करते थे. आज भी तांती समाज के लोग कपड़ा व्यापार के साथ छोटे-मोटे काम करते हैं. आरक्षण को लेकर भी यह जाति विवादों में रही. इसके बाद 2015 में बिहार सरकार ने इसे एससी की सूची में शामिल किया. लेकिन 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को खारिज कर दिया और इसे वापस अति पिछड़ा वर्ग यानी EBC में शामिल कर दिया.
मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले 20 सालों से इसी वोट बैंक की बदौलत बिहार की सत्ता पर काबिज हैं. ऐसे में विपक्षी गठबंधन इस वोट बैंक को लुभाने की कोशिश कर रहा है. विपक्ष का मानना है कि नीतीश कुमार के सीएम पद से हटने के बाद पिछड़ों का रुझान विपक्ष की ओर बढ़ सकता है.
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दौरे की टाइमिंग की हो रही चर्चा
बिहार में इन दिनों नीतीश कुमार की विदाई और नए मुख्यमंत्री के ऐलान को लेकर पहले से ही राजनीति गर्म है.नीतीश कुमार की बदलती भूमिका के बीच बिहार में जो राजनीतिक शून्य पैदा हुआ है, उसे महागठबंधन अपने पक्ष में भरने की रणनीति बना रहा है. विपक्ष नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर पहले से ही बीजेपी पर हावी है. ऐसे में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का पटना में एक मंच पर दिखना सियासी हलचल को और बढ़ाएगा. इस सम्मेलन को नीतीश कुमार के बिना बिहार की राजनीति की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है. कांग्रेस और आरजेडी मिलकर अब सीधे तौर पर भाजपा और NDA को चुनौती देने और अति पिछड़ा वोट बैंक को अपनी ओर खींचने की नई रणनीति पर काम कर रहे हैं.













