आगे कुआं, पीछे खाई... राहुल गांधी ने अमेरिकी ट्रेड डील को कपास किसानों व उद्योगों के लिए बताया विनाशकारी

राहुल गांधी ने अमेरिका से ट्रेड डील पर कहा कि अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे. अगर नहीं मंगवाते तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा.

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अमेरिका से व्यापार समझौते को लेकर सियासत गरमा गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर कपास किसानों और कपड़ा उद्योग के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने व्यापार समझौते के कई पहलुओं को छिपाया है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली कोई सरकार अमेरिका के साथ ऐसा व्यापार समझौता करती जो कपास किसानों और कपड़ा निर्यात दोनों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करता, लेकिन मोदी सरकार ने इसके बिल्कुल उलट किया.

'8% टैरिफ बनाम 0% टैरिफ का गेम'

राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी करके 8% टैरिफ बनाम 0% टैरिफ को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर 0% टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है, शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करें. 

बांग्लादेश को रियायत से तुलना

उन्होंने कहा कि भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया- “अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी.” कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि आखिर ये बात तब तक देश से छिपाई क्यों गई? और ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है या फिर “आगे कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल है?

...तो कपास किसान बर्बाद हो जाएंगे

उन्होंने कहा कि अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे. अगर नहीं मंगवाते तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा. और अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है. 

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टेक्सटाइल सेक्टर के लिए खतरा

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं. करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी इन्हीं पर टिकी है. इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोजगारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना. 

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राहुल ने आरोप लगाया कि दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार होती तो ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती. लेकिन नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है, जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है. 

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