'वोटिंग में शामिल नहीं होना सरकार को समर्थन देने के बराबर है ', राहुल गांधी ने किसे और क्यों कहा ऐसा

बैठक में तब और असहज स्थिति पैदा हो गई जब राहुल गांधी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विपक्ष के सांसदों का चर्चा और वोटिंग में शामिल नहीं होना.सरकार को समर्थन देने के बराबर है . इसी बात पर बैठक में ऑनलाइन जुड़े शिवसेना उद्धव गुट के मुखिया उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो इस मसले पर टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात करेंगे और सभी सांसदों को दिल्ली भेजने का अनुरोध करेंगे .

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राहुल गांधी ने क्यों कहा जो वोट देने नहीं आते वो भी दूसरों की मदद कर देते हैं
NDTV
नई दिल्ली:

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बिलों पर रणनीति बनाने के लिए आज विपक्षी नेताओं की बैठक हुई . कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर हुई बैठक में इंडिया गठबंधन के तमाम घटक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए . बैठक में यह फैसला लिया गया की पूरा सरकार की ओर से पेश होने वाले तीनों बिलों का पुरजोर विरोध करेगा और खिलाफ में वोट करेगा . हालांकि बैठक में कुछ ऐसा हुआ जो इन बिलों को लेकर विपक्षी एकता के लिए झटका साबित हो सकता है .बैठक में मौजूद तृणमूल कांग्रेस यानि टीएमसी की प्रतिनिधि सागरिका घोष ने कहा कि बंगाल में जारी चुनावी अभियान के चलते उनकी पार्टी के ज्यादा सांसद इन बिलों पर चर्चा और वोटिंग के दौरान उपस्थित नहीं रह पाएंगे.

उनके इस बयान पर बैठक में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई. सूत्रों के मुताबिक़ घोष की बात पर बैठक में मौजूद डीएमके नेता टी आर बालू ने कहा कि उनके राज्य में भी 23 अप्रैल को चुनाव है लेकिन उनकी पार्टी के सभी सांसद मौजूद रहेंगे . बालू ने ये भी कहा कि उनके सांसदों को तो चेन्नई से आना है जबकि टीएमसी सांसदों को कोलकाता से .एक नेट ने तो यहां तक कह दिया कि अगर पार्टी चाहे तो एक चार्टर्ड फ्लाइट से सभी सांसदों को छह घंटे के लिए दिल्ली भेज सकती है . 

बैठक में तब और असहज स्थिति पैदा हो गई जब राहुल गांधी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विपक्ष के सांसदों का चर्चा और वोटिंग में शामिल नहीं होना.सरकार को समर्थन देने के बराबर है . इसी बात पर बैठक में ऑनलाइन जुड़े शिवसेना उद्धव गुट के मुखिया उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो इस मसले पर टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात करेंगे और सभी सांसदों को दिल्ली भेजने का अनुरोध करेंगे .दिलचस्प बात ये है कि अभी तक तृणमूल कांग्रेस की ओर से अपने सांसदों के लिए कोई व्हिप जारी नहीं किया गया है.

व्हिप जारी करने पर सभी सांसदों का उपस्थित रहने अनिवार्य होता है . ऐसा नहीं करना पार्टी विरोधी गतिविधि माना जाता है और उसका पालन नहीं करने पर किसी सांसद की सदस्यता तक जा सकती है .लोकसभा में पार्टी के 28 जबकि राज्यसभा में पार्टी के 13 सांसद हैं . विपक्ष के लिए एक-एक सांसद की उपस्थिति अनिवार्य है क्योंकि तीनों बिलों में से एक संविधान संशोधन बिल है जिसे पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की ज़रूरत होती है. 

बैठक में सभी पार्टियों ने एकमत से फैसला किया कि कल लोकसभा में पेश होने वाले तीनों बिलों का ज़ोरदार विरोध किया जाएगा और पूरा विपक्ष इसके खिलाफ़ वोट करेगा. लोकसभा में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के सांसदों की संख्या 231 है जबकि राज्यसभा में ये संख्या 75 है . इनमें आम आदमी पार्टी के सांसद शामिल नहीं हैं .अगर विपक्ष के सभी सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया तो इसका पारित होना बहुत मुश्किल होगा .

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बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष महिलाओं को आरक्षण के पक्ष में है और 2023 में पारित हुए नारी शक्ति वन्दन अधिनियम को तुरंत लागू करने के लिए सरकार जो भी कदम उठाएगी , विपक्ष उसका समर्थन करेगा . राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के बहाने अलोकतांत्रिक तरीके से परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है जिससे संघीय ढांचा बर्बाद हो जाएगा . 

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