भोपाल गैस त्रासदी, युद्ध और इमरजेंसी... इतिहास को कैमरे में कैद करने वाले रघु राय की कुछ बेहतरीन तस्वीरें

जाने-माने फोटोग्राफर रघु राय अब नहीं रहे. 83 साल के उम्र में उनका निधन हो गया. रघु राय ने दशकों के काम में ऐसी बेहतरीन तस्वीरे ली हैं जो इतिहास का हिस्सा बन गईं.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
रघु राय की यह तस्वीर 11 जनवरी 1992 की है.
PTI

तस्वीरें सिर्फ बोलती ही नहीं हैं, बल्कि उनमें पूरा का पूरा एक इतिहास सिमटा हुआ होता है. तभी तो कहा भी जाता है कि एक तस्वीर हजारों शब्दों पर भारी पड़ती है. तस्वीरों को अपने कैमरे में कैद करने वाले और उसे इतिहास बनाने वाले महान फोटोग्राफर रघु राय अब नहीं रहे. वह 83 साल के थे. दो साल से कैंसर से जंग लड़ रहे थे. 

रघु राय के बेटे ने बताया कि उनके पिता को दो साल पहले प्रोस्टेट कैंसर हुआ था और वह इससे ठीक हो गए थे. लेकिन बाद में कैंसर उनके पेट तक फैल गया और फिर से उनका इलाज हुआ. उन्होंने न्यूज एजेंसी PTI से कहा, 'हाल ही में कैंसर उनके दिमाग तक फैल गया और फिर उम्र से जुड़ी दिक्कतें भी आ गईं.'

18 दिसंबर 1942 को झांग (अब पाकिस्तान में) में जन्मे रघु राय न सिर्फ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया के सम्मानित फोटोग्राफर थे. उन्होंने 1960 के दशक में अपना करियर शुरू किया था और फिर द स्टेट्समैन के साथ बतौर स्टाफ फोटोग्राफर जुड़े.

रघु राय ने दशकों तक अपने कैमरे में ऐसी-ऐसी तस्वीरें खींचीं, जो आजच इतिहास बन चुकी हैं. 1984 की 2 और 3 दिसंबर को भोपाल में जो गैस त्रासदी हुई थी, उस वक्त रघु राय ने कई तस्वीरें लीं. लेकिन इनमें एक तस्वीर छोटे बच्चे की थी, जिसे दफनाया जा रहा था, वह तस्वीर अब इस त्रासदी का प्रतीक बन चुकी है.

Advertisement

Photo Credit: raghuraifoundation.org

सालों पहले बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में रघु राय ने बताया था, 'तीन दिसंबर को हमीदिया अस्पताल में तस्वीरें खींचने के बाद हमने सोचा कि क्यों न श्मशान घाट और कब्रिस्तान का जायजा लिया जाए. वहां एक छोटे बच्चे को दफनाया जा रहा था. उसका भोला सा चेहरा था. आंखें खुली सी थीं. मैंने जल्दी से तस्वीर खींची. फिर उसपर मिट्टी डालने लगे.'

Photo Credit: instagram/raghurai.official

रघु राय ने भारतीय इतिहास के कई किस्सों को अपने कैमरे में कैद किया है. ऐसी ही एक तस्वीर उन्होंने 1967 में कैद की थी, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की थी. इस तस्वीर में इंदिरा गांधी अपनी कुर्सी पर बैठी हैं और उनके आसपास गुजरात के विधायक हैं. सारे विधायक खड़े हुए हैं और इंदिरा गांधी एक पत्र पढ़ रही हैं. ये तस्वीर दिखाती है कि इंदिरा गांधी कितनी ताकतवर प्रधानमंत्री थीं और यूं ही उन्हें 'आयरन लेडी' नहीं कहा जाता.

Advertisement

Photo Credit: instagram/raghurai.official

ऐसी ही एक तस्वीर उन्होंने 1970 में ली थी. इस तस्वीर में गांधी परिवार नजर आ रहा था. इस तस्वीर में इंदिरा गांधी के साथ सोनिया गांधी भी थीं. वहीं राहुल और प्रियंका भी थे.

रघु राय ने अपने कैमरे में युद्ध की भयावहता को भी कैद किया. 1971 में बांग्लादेश में चली जंग की भी ढेरों तस्वीरें रघु राय के कैमरे में कैद हुईं. ऐसी ही एक तस्वीर है, जिसमें एक पाकिस्तानी युद्धबंदी जमीन पर गिरा पड़ा है और उसे भारतीय सैनिकों ने घेर रखा है. 

Photo Credit: instagram/raghurai.official

1999 की करगिल जंग की भी कई तस्वीरें हैं. एक तस्वीर में भारतीय सैनिक हिमालय में अपने बेस कैंप में खड़े दिखाए दे रहे हैं. इसमें भारतीय सैनिकों के आसपास गोला-बारूद और बख्तरबंद गाड़ियां नजर आ रहीं हैं.

Photo Credit: instagram/raghurai.official

भारतीय इतिहास में इमरजेंसी का भी एक दौर रहा है, जो लगभग दो साल तक चला. रघु राय के कैमरे में एक तस्वीर जयप्रकाश नारायण की उस रैली की भी है, जिसके कुछ दिन बाद ही इमरजेंसी लागू कर दी गई थी. जेपी नारायण की यह रैली पटना में हुई थी. इस रैली के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और कुछ दिन बाद ही इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू कर दिया.

Advertisement

Photo Credit: instagram/raghurai.official

यूं तो अगर रघु राय की तस्वीरें देखने जाएं तो दिन कम पड़ जाए. उन्होंने अपने दशकों के करियर में कई खूबसूरत तस्वीरें ली हैं. ऐसी ही एक तस्वीर है जो उन्होंने अपने कैमरे में कैद की, वह दो ऐसे बुजुर्गों की है जो कमोबेश एक ही उम्र के है. फर्क इतना ही कि एक तनकर चल रहा है और दूसरा लाठी के सहारे झुककर. एक ने सूट-बूट, टाई और चश्मा पहन रखा है तो दूसरे के पैर में ढंग के जूते भी नहीं है. और शायद कपड़ों का यही फर्क उनके चलने का फर्क भी दिखाता है. दिखाता है कि पास में पैसा है तो उम्र कितनी ही क्यों न हो, झुका नहीं जा सकता. 

Photo Credit: instagram/raghurai.official

ये उनकी फोटोग्राफी का ही करिश्मा था कि 1977 में फ्रेंच फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर ब्रेसॉन ने उनको मैग्नम फोटोज में शामिल करने की सिफारिश की थी. मैग्नम दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफी संगठनों में से एक है और इसमें शामिल होने का मतलब है कि अब आप दुनिया के कुछ चुनिंदा बेहतरीन फोटोग्राफरों में से एक हैं.

Advertisement

उनकी फोटोग्राफी को अकसर आधुनिक भारत का 'विजुअलर रिकॉर्ड' बताया जाता है. उन्होंने अपने कैमरे में मदर टेरेसा और इंदिरा गांधी जैसी हस्तियों की तस्वीरें भी लीं.बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान अपनी जबरदस्त फोटोग्राफी के लिए उन्हें 1972 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. 1992 में उन्हें अमेरिका में 'फोटोग्राफर ऑफ द ईयर' चुना गया. 2019 में उन्होंने 'अकादमी दे बो-आर्ट्स फोटोग्राफी अवॉर्ड' जीता, जो फोटोग्राफी के क्षेत्र में मिलने वाले शीर्ष अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में से एक है. 2017 में भारत सरकार ने उन्हें 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था.

Featured Video Of The Day
Washington Hotel Firing News: वॉशिंगटन होटल में फायरिंग, भागते हुए हमलावर की EXCLUSIVE तस्वीर! | USA