राघव चड्ढा का तो अंदाजा था लेकिन उन्होंने 6 और सांसदों को AAP से कैसे तोड़ा, 2 हफ्ते की इनसाइड स्टोरी

सूत्रों के मुताबिक राघव चड्ढा जब पंजाब में आम आदमी पार्टी का काम देख रहे थे तब उन्होंने ही विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल को केजरीवाल से मिलवाया था. दोनों के साथ पहले से राघव की करीबी थी. राजेंद्र गुप्ता पिछले साल ही राज्यसभा सांसद बने हैं और उन्होंने भी सोच समझकर राघव का ऑफर स्वीकार कर लिया.

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राघव चड्ढा ने थामा बीजेपी का दामन
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  • राघव चड्ढा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं
  • AAP के बागी सांसदों में कार्यकर्ता से बने और कारोबार जगत के प्रतिनिधि दोनों शामिल हैं
  • राघव चड्ढा के साथ आए सांसदों में से एक वरिष्ठ नेता को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की बात भी कही जा रही है
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नई दिल्ली:

राघव चड्ढा की अगुवाई में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने अपने गुट का बीजेपी में विलय कर लिया. इन सात सांसदों में से छह पंजाब और एक दिल्ली से हैं. अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ये आम आदमी पार्टी के लिए बहुत बड़ा झटका है.सूत्रों के मुताबिक ये ऑपरेशन दो हफ़्ते पहले तब शुरू हुआ जब AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता के पद से हटाया. हालांकि, राघव काफ़ी समय से अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से दूरी बनाकर चल रहे थे. लेकिन पार्टी की कार्रवाई के बाद राघव तेज़ी से हरकत में आए और उन्होंने आप के बाक़ी सांसदों से संपर्क साधना शुरू किया. 

AAP के बागी सात सांसदों को दो श्रेणी में रखा जा सकता है. राघव चड्ढा, संदीप पाठक और स्वाति मालीवाल पार्टी कार्यकर्ता से सांसद बने. जबकि अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता कारोबार जगत में बड़ा नाम रहते हुए आप सांसद बने. हरभजन सिंह भी गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि से हैं. सूत्रों के मुताबिक पहले राघव चड्ढा के दीवाली के आसपास बीजेपी में शामिल होने की योजना थी.

हालांकि बाद में अगस्त का प्लान बनया जा रहा था ताकि पंजाब की मान सरकार के ख़िलाफ़ अभियान चलाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके. लेकिन अप्रैल में जब आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया तो इसके बाद राघव ने सोचा कि अब देर नहीं करनी चाहिए. इसके बाद उन्होंने अपने साथियों का मन टटोलना शुरू किया. 

कभी केजरीवाल मुख्य राजनीतिकार रहे संदीप पाठक को दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद आम आदमी पार्टी में किनारे लगाया जा चुका था लेकिन था. संदीप खुश नहीं थे और उन्हें आप में अपना भविष्य नज़र नहीं आ रहा था. स्वाति मालीवाल पहले से ही आम आदमी पार्टी से बगावत कर चुकी थीं. राघव को इन दोनों का साथ फौरन मिल गया. 

चड्ढा ने ही विक्रमजीत साहनी और अशोक को केजरीवाल से मिलवाया था

सूत्रों के मुताबिक राघव चड्ढा जब पंजाब में आम आदमी पार्टी का काम देख रहे थे तब उन्होंने ही विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल को केजरीवाल से मिलवाया था. दोनों के साथ पहले से राघव की करीबी थी. राजेंद्र गुप्ता पिछले साल ही राज्यसभा सांसद बने हैं और उन्होंने भी सोच समझकर राघव का ऑफर स्वीकार कर लिया. अहम बात यह है कि अशोक मित्तल से जुड़े कुछ दफ्तरों में हाल में ही ईडी का छापा पड़ा था. कुछ साल पहले राजेंद्र गुप्ता पर भी आयकर विभाग ने शिकंजा कसा था. 

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बलबीर सिंह सींचेवाल के भी संपर्क में थे चड्ढा

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह पहले भी आम आदमी पार्टी में ज़्यादा सक्रिय नहीं थे. उन्हें भी अपने व्यवसायिक भविष्य के लिए बीजेपी की क़रीबी बेहतर लगी. राज्यसभा में बाक़ी बचे आम आदमी पार्टी के तीन सांसदों में से राघव चड्ढा ने समाजसेवी बलबीर सिंह सींचेवाल से भी संपर्क किया था लेकिन उन्होंने ऑफर ठुकरा दिया. लेकिन इससे कोई फर्क नहीं क्योंकि राघव पहले ही राज्यसभा में आप के दो तिहाई सांसदों को अपने पाले में कर चुके थे. 

राज्यसभा में बढ़ेगी बीजेपी की ताकत

बीजेपी आलाकमान से सिग्नल मिलते ही राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ पहले राज्यसभा के सभापति को पत्र सौंपा, मीडिया के सामने आए और फिर बीजेपी अध्यक्ष से मुलाकात की. दिल्ली में होकर भी विक्रमजीत साहनी घर पर रुके रहे. राजेंद्र गुप्ता की इलाज के लिए विदेश में हैं. स्वाति मालीवाल पूर्वोत्तर भ्रमण पर गई हैं और हरभजन आईपीएल में व्यस्त हैं. बहरहाल, राज्यसभा में अपनी ताक़त बढ़ाने के अलावा बीजेपी इन सांसदों का इस्तेमाल पंजाब की भगवंत मान सरकार को घेरने  और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधने के लिए करेगी. कयास यह लगाए जा रहे हैं कि सात सांसदों के गुट में से एक वरिष्ठ नेता को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है.

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