18 महीने से जेल में बंद हैं, इसलिए जमानत दे रहे.. पुणे पोर्शे मामले के आरोपी आदित्य को SC ने दी बेल

Pune Porsche Case Bail Granted: पुणे पोर्शे केस मामले में आरोपी आदित्य अविनाश सूद को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है.

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दुर्घटनाग्रस्त पोर्शे कार (फाइल फोटो)
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  • पुणे पोर्शे हादसे मामले में आरोपी आदित्य को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
  • शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपी 18 महीने से जेल में बंद है, इसलिए वो बेल दे रहा है
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जश्न मनाने का मतलब किसी गरीब को कुचलना नहीं होता है
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के बहुचर्चित पोर्श कार दुर्घटना मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी आदित्य अविनाश सूद को नियमित जमानत दे दी है. इस मामले में कुल 10 आरोपियों में से आदित्य सूद एक मुख्य आरोपी था. उनके साथ ही कोर्ट ने आशीष मित्तल और अमर गायकवाड़ को भी जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपी 18 महीने से जेल में बंद है, इसलिए जमानत दे रहे हैं. 

जानिए क्या है पूरा मामला 

यह मामला 19 मई 2024 की रात का है, जब पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक नाबालिग द्वारा कथित तौर पर नशे की हालत में चलाई जा रही पोर्श कार ने दो आईटी प्रोफेशनल्स को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी.

पिछले साल हुई थी गिरफ्तारी 

52 वर्षीय आदित्य अविनाश सूद और 37 वर्षीय आशीष सतीश मित्तल को पिछले साल 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. उन पर आरोप था कि दुर्घटना के समय कार में मुख्य आरोपी नाबालिग के साथ मौजूद दो अन्य नाबालिगों के ब्लड सैंपल की उन्होंने अदला-बदली की थी ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके.

शर्तों के साथ जमानत 

अदालत में आदित्य सूद की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट प्रशांत पाटिल और एडवोकेट आबिद मुलानी पेश हुए. जमानत की पुष्टि करते हुए एडवोकेट प्रशांत पाटिल ने बताया कि कोर्ट ने राहत देते हुए कुछ शर्तें भी रखी हैं. उन्होंने कहा कि उनके क्लाइंट जांच एजेंसी को पूरी तरह सहयोग करेंगे और सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. बता दें कि इस मामले ने पूरे देश में काफी सुर्खियां बटोरी थीं, खासकर ब्लड सैंपल बदलने और जांच को गुमराह करने के प्रयासों को लेकर पुलिस और प्रशासन पर कई सवाल उठे थे.

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जश्न मनाने का मतलब गरीबों को कुचलना नहीं- कोर्ट 

पुणे पोर्श हादसे पर जस्टिस बी वी नागरत्ना ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जश्न मनाने का मतलब तेज रफ्तार में गाड़ी चलाकर फुटपाथ पर लोगों या गरीबों को कुचल देना नहीं होता. उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है कि जब ऐसी घटना हुई है। क़ानून को अब सख़्त बनाना होगा. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इसमें सबसे ज्यादा जिम्मेदारी माता-पिता की है. जज ने कहा कि वो  बच्चों को ऐश करने के लिए पैसे दे देते हैं. माता-पिता के पास बच्चों से बात करने, उनसे बात करने और उनके साथ वक्त  बिताने का समय नहीं होता, तो फिर वो इसकी भरपाई पैसे, एटीएम कार्ड देकर करते है.

18 महीने से जेल में बंद, इसलिए दे रहा जमानत

कोर्ट ने कहा कि ऐसे में बच्चे मोबाइल फोन के सहारे अपनी मर्जी से घूमते रहते हैं. ⁠हालांकि कोर्ट ने आज इस मामले में नाबालिग आरोपी  की को बचाने के लिए उसके खून के नमूने बदलने के आरोप मे गिरफ्तार तीन आरोपियों को जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि आरोपी 18 महीने से जेल में बंद है, इसलिए वो जमानत दे रहा है. शीर्ष अदालत ने साथ ही कहा कि जमानत की शर्त निचली अदालत तय करेंगी.

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