- कर्नाटक विधानसभा में केंद्र के वीबी जी राम जी अधिनियम के विरोध में राज्य सरकार के विज्ञापन को लेकर हंगामा हुआ
- भाजपा ने सिद्धरमैया सरकार पर झूठे प्रचार और करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया
- विज्ञापन में महात्मा गांधी के चित्र के साथ संगप्पा को आरएसएस की वर्दी जैसी पोशाक में दिखाने को लेकर विवाद हुआ
कर्नाटक विधान सभा में बृहस्पतिवार को उस समय हंगामा देखने को मिला जब अखबारों में केंद्र के वीबी जी राम जी अधिनियम के विरोध में प्रकाशित राज्य सरकार के एक विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया. विपक्षी भाजपा ने सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार पर “झूठे प्रचार” के लिए करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया.
सरकार द्वारा विज्ञापन का बचाव किए जाने के बावजूद, जोरदार विरोध प्रदर्शनों के बीच सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया. राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार और मनरेगा को निरस्त कर उसकी जगह लाए गए विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम की आलोचना किये जाने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया.
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए) कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के कार्यकाल में लाया गया था.
विपक्ष ने आगे सरकार पर महात्मा गांधी का “अपमान” करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग द्वारा जारी एक विज्ञापन में महात्मा गांधी के रेखाचित्र दिखाए गए हैं, जिनमें वे संगप्पा नामक एक व्यक्ति से बातचीत करते नजर आते हैं. संगप्पा को सफेद शर्ट और खाकी पैंट में दर्शाया गया है, जो आरएसएस की वर्दी से मिलती-जुलती बताई गई है. इस चित्रण के जरिए पिछले अधिनियम की तुलना में केंद्र की योजना की कथित कमियों को उजागर करने की कोशिश की गई है.
विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा के वरिष्ठ विधायक सुरेश कुमार ने कहा, “सभी समाचार पत्रों के पहले पन्ने पर विज्ञापन छपा है. सरकार करदाताओं के पैसे से चलती है.” उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के अधिनियम के खिलाफ विज्ञापन जारी किया होता, तो वह स्वीकार्य होता. लेकिन ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग द्वारा वीबी-जी-राम जी अधिनियम के खिलाफ जारी किया गया ऐसा विज्ञापन सही नहीं है.”
उन्होंने आरोप लगाया, “यह सरकार द्वारा झूठे प्रचार और प्रतिशोध की राजनीति के लिए करदाताओं के पैसे की स्पष्ट लूट है.”
विज्ञापन का बचाव करते हुए ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि भाजपा यह सुझाव देती प्रतीत होती है कि राज्य सरकार को केंद्र सरकार की हर बात को “हाथ जोड़कर स्वीकार कर लेना चाहिए और चुप रहना चाहिए”.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञापन ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है. प्रियंक ने कहा, “भाजपा बताए कि किस कानून का उल्लंघन हुआ है.”














