- गुरुग्राम के गैलेरिया रोड पर एक महिला प्रोफेसर की कार खुले गड्ढे में गिर गई, जिससे वह बाल-बाल बचीं
- गड्ढा कई महीनों से खुला पड़ा था, लेकिन वहां न कोई चेतावनी बोर्ड था और न बैरिकेड या रिफ्लेक्टर लगाए गए थे
- स्थानीय लोगों ने पहले भी इस गड्ढे की शिकायतें की थीं, लेकिन प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की
दिल्ली-एनसीआर में खुले गड्ढे में गिरने का एक और मामला सामने आया है. ये मामला गुरुग्राम से सामने आया है, जहां एक कार खुले गड्ढे में गिर गई. गनीमत रही कि कार चला रही महिला प्रोफेसर इस दुर्घटना में बाल-बाल बच गईं. इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की बड़ी कमियों को उजागर कर दिया है.
ये घटना सोमवार को गुरुग्राम के गैलेरिया रोड पर तब हुई, जब सुशांत यूनिवर्सिटी में एचओडी काम से घर लौट रही थीं. वह रिजवुड एस्टेट की रहने वाली हैं.
न वॉर्निंग बोर्ड, न कोई बैरिकेड
चश्मदीदों और स्थानीयों ने दावा किया कि यह खाई कई महीनों से सड़क के बीचों-बीच खुली पड़ी थी. किसी के गिर जाने का खतरा होने के बावजूद, वहां न तो कोई वॉर्निंग बोर्ड लगा था और न ही कोई बैरिकेड या रिफ्लेक्टर लगाया गया था. इस कारण यह रास्ता रोजाना आने-जाने वालों के लिए खतरनाक हो गया था.
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बाल-बाल बचीं महिला प्रोफेसर
बताया जा रहा है कि जब महिला प्रोफेसर उस इलाके से गाड़ी चलाकर गुजर रही थी तो अचानक उनकी कार इस बड़े से गड्ढे में जा गिराी. इस घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए. काफी मशक्कत के बाद वहां से गुजर रहे लोगों ने उन्हें गाड़ी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया. इस दुर्घटना में महिला प्रोफेसर बाल-बाल बच गईं लेकिन उनकी कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई.
शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
यहां रहने वाले लोगों ने आरोप लगाया है कि इस खुले गड्ढे के बारे में पहले भी शिकायतें की गई थीं लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की. गैलेरिया रोड जैसी व्यस्त सड़क पर बुनियादी सुरक्षा उपायों की कमी ने लोगों में गुस्सा पैदा कर दिया है.
महिला प्रोफेसर ने क्या कहा?
महिला प्रोफेसर का कहना है कि वह अपने साथ हुई इस घटना के लिए पुलिस, गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी और नगर निगम में शिकायत दर्ज कराएंगे. उनका कहना है कि इस लापरवाही के इन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि गुरुग्राम में लोगों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान न देना किस तरह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है.
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