आसमान में ‘प्रचंड’ के साथ उड़ेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जानें क्यों खास होगी उनकी ये उपलब्धि

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राजस्थान के अपने दौरे के तहत शुक्रवार को सुबह जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर, देश में बने हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरेगी.

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लाइट कॉम्बेट प्रचंड
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  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राजस्थान के जैसलमेर में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरेंगी
  • प्रचंड हेलीकॉप्टर पूरी तरह भारतीय कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है
  • हेलीकॉप्टर की अधिकतम रफ्तार लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटा और उड़ान रेंज लगभग 700 किलोमीटर है
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भारत की तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 27 फरवरी को राजस्थान के जैसलमेर में वायु शक्ति एक्सरसाइज में आएंगी. खास बात ये है कि कमांडर-इन-चीफ इस बार स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड' में एक उड़ान भरेंगी. वह देश की पहली राष्ट्रपति होंगी जो किसी कॉम्बैट यानी लड़ाकू हेलीकॉप्टर में फ्लाई करेंगी. राष्ट्रपति इससे पहले लड़ाकू विमान राफाल और सुखोई में उड़ान भर चुकी हैं.

फॉर्मेशन फ्लाई और एरियल सर्वे

27 फरवरी को दो लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड एक फॉर्मेशन में फ्लाई करेंगे. दूसरे हेलीकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह भी उड़ान भरेंगे. हेलीकॉप्टर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह उड़ान जैसलमेर एयर फोर्स स्टेशन पर होगी. यह उड़ान एक तरह का एरियल सर्वे होगी, जिसमें राष्ट्रपति पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज और आसपास के चांधन इलाके का हवाई निरीक्षण करेंगी. इस उड़ान की अवधि करीब 20 से 30 मिनट रहने की संभावना है.

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पूरी तरह स्वदेशी ‘प्रचंड': कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार

खास बात ये है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इस हेलीकॉप्टर को पूरी तरह से भारत में विकसित किया गया है. इसे खासकर कठिन परिस्थितियों में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है. अटैक ‘प्रचंड' हेलीकॉप्टर ऊंचाई वाले इलाकों और रेगिस्तानी क्षेत्र, दोनों में प्रभावी तरीके से काम कर सकता है.

आकार, गति और रेंज

इस हेलीकॉप्टर का वजन लगभग 5.8 टन है. यह 15.8 मीटर लंबा है. इसकी ऊंचाई 4.7 मीटर है. इसकी अधिकतम स्पीड करीब 280 किलोमीटर प्रति घंटा है. वहीं इसकी रेंज करीब 700 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है. यह तीन घंटे तक उड़ान भर सकता है और 21,300 फीट तक की ऊंचाई तक जा सकता है. बॉर्डर से लगे इलाकों में इसकी भूमिका बेहद अहम है.

हथियार और सुरक्षा क्षमताएं

इसमें आधुनिक हथियार लगाए जा सकते हैं, जिनमें हेलेना एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, 70 मिमी रॉकेट और 20 मिमी की एक गन शामिल है. हेलीकॉप्टर में ट्विन इंजन, आर्मर्ड कॉकपिट (हथियारों से सुरक्षा देने वाला) और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम भी मौजूद हैं. इससे यह युद्ध के दौरान सुरक्षित और प्रभावी रहता है. दुश्मन की गोलियों से पायलट सुरक्षित रहता है. लिहाजा इससे ऑपरेशन के दौरान पायलट आराम से ऑपरेट कर सकता है.

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ऊंचाई पर ऑपरेशन की विशेष क्षमता

‘प्रचंड' हेलीकॉप्टर भारतीय थल और वायुसेना में शामिल हो चुका है. यह दुनिया का इकलौता अटैक हेलीकॉप्टर है जो 5000 मीटर की ऊंचाई पर लैंड और टेक-ऑफ कर सकता है. इसलिए ये ऊंचाई वाले क्षेत्रों, जैसे कश्मीर और लद्दाख में भी प्रभावी है.

वायु शक्ति-2026 में राष्ट्रपति की मौजूदगी

‘प्रचंड' में उड़ान भरने के बाद राष्ट्रपति वायु शक्ति-2026 में जाएंगी. इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना दिन, शाम और रात—तीनों समय के ऑपरेशन दिखाएगी. इसमें प्रिसिजन स्ट्राइक, एयर डिफेंस, हेलिबॉर्न ऑपरेशन और राहत एवं बचाव मिशन जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है. इस आयोजन में ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों को भी शामिल किया गया है, जिसमें लंबी दूरी से सटीक हमले और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमता दिखाई गई थी.
 

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