पोखरण में ‘अग्नि वर्षा’: टैंक‑तोप, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों से रेगिस्तान में भारतीय सेना ने दिखाई ताकत

राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना ने ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास में टैंक, तोप, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के साथ संयुक्त युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया. रेगिस्तान जैसी कठिन परिस्थितियों में तेज, सटीक कार्रवाई दिखाई गई. ड्रोन‑तकनीक, डिजिटल नेटवर्क और इंटीग्रेटेड फोर्सेस इस अभ्यास की मुख्य विशेषता रहीं.

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  • राजस्थान के पोखरण में भारतीय सेना ने 'अग्नि वर्षा' नामक बड़ा सैन्य अभ्यास दक्षिण कमांड के तहत किया गया.
  • अभ्यास में टैंक, तोप, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और आधुनिक कमांड सिस्टम के साथ संयुक्त युद्ध क्षमता का प्रदर्शन हुआ.
  • ड्रोन की मदद से दुश्मन की लोकेशन पता कर स्ट्राइक ड्रोन से सटीक हमले की तैयारी और काउंटर-ड्रोन ट्रेनिंग दी गई.
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राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना ने ‘अग्नि वर्षा' नाम का बड़ा सैन्य अभ्यास किया. इसमें टैंक, तोप, ड्रोन और हेलीकॉप्टर ने मिलकर युद्ध की तैयारी दिखाई. यह अभ्यास सेना की दक्षिण कमांड ने किया. इस अभ्यास में रेगिस्तानी क्षेत्र में सेना की तैयारी और संयुक्त युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया गया. इसका मकसद यह दिखाना था  कि भारतीय सेना रेगिस्तान जैसे कठिन इलाके में भी तेजी और सटीक कार्रवाई कर सकती है.

इसमें जमीन, हवा और तकनीक का मेल दिखा. इस अभ्यास में सेना ने दिखाया कि असली युद्ध में अलग-अलग यूनिट्स मिलकर कैसे काम करती हैं. टी-90 टैंक, आईसीवी, के-9 वज्र, बोफोर्स और रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल हुआ.

गूंज उठा पूरा रेगिस्तान

टैंकों और तोपों की फायरिंग से पूरा रेगिस्तान गूंज उठा. आसमान में  अटैक हेलीकॉप्टर अपाचे और ध्रुव हेलीकॉप्टर ने सैनिकों को सपोर्ट दिया और निगरानी की. इस सैन्य अभ्यास के दौरान सेना ने दिखाया कि कैसे अलग-अलग हथियार प्रणालियां मिलकर एक साथ प्रभावी कार्रवाई कर सकती हैं. लंबी दूरी तक सटीक मार करने वाली प्रणालियों और आधुनिक कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम का भी सफल उपयोग किया गया. पूरा अभ्यास वास्तविक युद्ध जैसे हालात किया गया. सच कहें तो रेगिस्तान में इंटीग्रेटेड फायर एंड मैन्युवर अभ्यास में मैकेनाइज्ड फोर्स की जबरदस्त ताकत देखने को मिली. इसमें सेना ने जमीन और आसमान दोनों मोर्चों पर तालमेल के साथ कार्रवाई की.

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आज के युद्ध में ड्रोन बेहद अहम

इस अभ्यास में ड्रोन और नई तकनीक पर खासा जोर दिया गया क्योंकि आज के युद्ध में ड्रोन बहुत अहम हो गए हैं. इस अभ्यास में निगरानी ड्रोन से दुश्मन की लोकेशन पता की गई. स्ट्राइक ड्रोन से हमले की तैयारी दिखाई गई.

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काउंटर-ड्रोन सिस्टम से दुश्मन के ड्रोन को रोकने की ट्रेनिंग भी दी गई. इस अभ्यास में सभी हथियार और यूनिट्स डिजिटल नेटवर्क से जुड़े रहे. अगर ड्रोन ने कोई टारगेट देखा, तो उसकी जानकारी तुरंत टैंक या तोप तक पहुंची और तुरंत हमला किया गया. इससे कार्रवाई तेज और सटीक हुई. 

आपको बता दें कि थार के रेगिस्तान में लड़ाई आसान नहीं होती. यहां तेज गर्मी और रेत की आंधी बड़ी चुनौती है. सेना ने इन हालात में टैंक चलाकर, तोप दागकर और हेलीकॉप्टर से सपोर्ट देकर अपनी तैयारी दिखाई. इस अभ्यास को 25 देशों के डिफेंस पत्रकारों ने भी देखा. इससे दुनिया को संदेश गया कि भारतीय सेना आधुनिक और तकनीक से लैस है. इस सैन्य अभ्यास में इस्तेमाल कई सिस्टम भारत में बने या विकसित किए गए थे. इससे साफ है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. हाल के सालों में और ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों से सेना ने सीखा है कि अब युद्ध में तेजी, सटीकता और तकनीक सबसे जरूरी है. सेना का अग्नि वर्षा अभ्यास इसी नई सोच का हिस्सा है. सेना किसी भी स्थिति में तेज, संगठित और निर्णायक कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है.

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