देश की बेटियों को उनके हक के लिए इंतजार नहीं करा सकते; नारी वंदन अधिनियम पर PM मोदी का महिलाओं के नाम पत्र

PM Modi Letter To Women: मोदी ने कहा कि खेल के मैदान में भी इस बड़े बदलाव को साफ देखा जा सकता है.भारतीय महिला खिलाड़ी अधिक मेडल जीत रही हैं और नए-नए रिकॉर्ड बना रही हैं.साथ ही, वे समाज की पुरानी सोच को भी बदल रही हैं.

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pm modi letter to women
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  • PM नरेंद्र मोदी ने बाबा साहेब अंबेडकर जयंती पर महिलाओं के नाम पत्र लिखकर महिला आरक्षण के समर्थन का आह्वान किया
  • 18 सितंबर से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा शुरू होगी और इसका पारित होना आवश्यक बताया गया है
  • मोदी ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रही हैं,देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं
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नई दिल्ली:

पीएम मोदी ने बाबा साहेब अंबेडकर जयंती के अवसर पर महिलाओं के नाम एक पत्र लिखा है. पीएम ने लिखा कि देशभर की हमारी माताएं-बहनें और बेटियां, साल 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की सराहना कर रही हैं. भारत की नारी शक्ति को समर्पित अपने इस पत्र में मैंने दशकों से लंबित इस संकल्प को जल्द साकार करने के विषय में देशवासियों के साथ अपनी भावनाएं साझा की हैं.

मैं आपका आशीर्वाद चाहता हूं

पीएम नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के नाम लिखे पत्र में कहा कि ​14 अप्रैल, भारत के इतिहास का बहुत महत्वपूर्ण दिन है.आज भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयंती है. समस्त देशवासी राष्ट्र निर्माण में उनके अमिट योगदान के लिए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन कर रहे हैं.मैं भी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए बहुत प्रेरणादायक है.संविधान ने हमें जिस समानता और समावेशी भावना का मार्ग दिखाया है, उस सर्वोच्च भावना पर चलते हुए 18 सितंबर से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा होने जा रही है.संसद के आने वाले सत्र में यह संवैधानिक संशोधन पारित हो, इसके लिए मैं आप सभी, विशेषकर देशभर की करोड़ों माताओं-बहनों का आशीर्वाद चाहता हूं.

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोले पीएम 

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि मुझे विश्वास है कि पूरा सदन मिलकर इस ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन को पारित करेगाऔर विधायी संस्थाओं में देश की नारी शक्ति की भागीदारी सुनिश्चित करेगा.मैं देख रहा हूं कि इसे लेकर हर तरफ जोश और उत्साह का माहौल है.देशभर की माताएं और बहनें इस बात पर खुशी जाहिर कर रही हैं कि उन्हें विकसित भारत के निर्माण में, देश की नीतियों के निर्धारण में और अधिक मजबूती से अपना योगदान देने का अवसर मिलने वाला है.

​हमारी नारी शक्ति देश के विकास में अपनी अमिट छाप छोड़ रही है.यह देखकर बहुत खुशी होती है कि वे हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रही हैं. 21वीं सदी में दुनिया साइंस और इनोवेशन के दम पर आगे बढ़ रही है.इन क्षेत्रों में भी महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. स्टार्टअप वर्ल्ड में ऐसी कई कंपनियां हैं, जिनमें महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं. एकेडमिक्स, लिटरेचर, आर्ट, म्यूजिक, सिनेमा, डांस और हेरिटेज के क्षेत्र में भी उनकी उपलब्धियां बहुत प्रेरक हैं.

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​मोदी ने कहा कि खेल के मैदान में भी इस बड़े बदलाव को साफ देखा जा सकता है.भारतीय महिला खिलाड़ी अधिक मेडल जीत रही हैं और नए-नए रिकॉर्ड बना रही हैं.साथ ही, वे समाज की पुरानी सोच को भी बदल रही हैं.उनकी ये सफलताएं अनगिनत बेटियों को खेलों में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं.

सरदार पटेल का जिक्र

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि देशभर में जमीनी स्तर पर काम कर रहे अनगिनत सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और लखपति दीदियां यह दिखा रही हैं कि आत्मनिर्भरता कैसे हासिल की जाती है.वे यह भी साबित कर रही हैं कि अपने साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी कैसे सशक्त बनाया जा सकता है. इन सभी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह आवश्यक है कि हम विधायी निकायों में भी उनकी हिस्सेदारी बढ़ाएं.यह ऐसा विषय है जिस पर पिछले कई दशकों से व्यापक सहमति बनी हुई है.करीब सौ वर्ष पहले, जब सरदार पटेल अहमदाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की पहल की थी.

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​भारत के स्वतंत्र होते ही महिलाओं और पुरुषों को मतदान का समान अधिकार मिला. वहीं, दुनिया के कई अन्य देशों में महिलाओं को यह अधिकार पाने के लिए वर्षों, यहां तक कि सदियों तक इंतजार करना पड़ा. पिछले तीन-चार दशकों में विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए गए, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं रहे. कुछ अवसर तो ऐसे आए जब हम लक्ष्य पाने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन फिर भी हमें सफलता नहीं मिल सकी. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस विषय पर सदैव सर्वसम्मति रही, वह आज तक अपने तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है.

​मोदी ने आगे लिखा कि हम 2047 में अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेंगे.देश, विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है.हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आधी आबादी, यानी देश की नारी शक्ति की आकांक्षाओं के साथ पूरा न्याय हो. जब हमारी माताएं, बहनें और बेटियां नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी, तब विकसित भारत की यात्रा और अधिक सशक्त एवं तेज होगी.इसी भावना से 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था.18 सितंबर से जिस संविधान संशोधन पर चर्चा होने जा रही है, उसके मूल में भी यही भावना है.

बेटियों को उनके हक के लिए अनंतकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता....

पीएम ने कहा कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिलाओं के आरक्षण के साथ होते हैं, तो हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ज्यादा मजबूत और सशक्त बनेगी.इसके लिए संसद में आने वाले विधेयक का पारित होना बेहद जरूरी है.इसमें किसी भी तरह की देरी दुर्भाग्यपूर्ण होगी और यह देश की नारी शक्ति के साथ अन्याय होगा.देश की बेटियों को उनके हक अधिकार के लिए अनंतकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता. विधायी संस्थाओं में नारी शक्ति की आवाज ज्यादा सशक्त होने से लोकतंत्र की आवाज मजबूत होगी.

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​मोदी ने लिखा कि मुझे विश्वास है कि आप भी नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के संसद में पारित होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. मेरा विनम्र आग्रह है कि आप अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखकर संसद के इस ऐतिहासिक सत्र में हिस्सा लेने के लिए उनका उत्साह बढ़ाएं. उन्हें याद दिलाएं कि वे कुछ ऐसा करने जा रहे हैं, जिसे सदियों तक याद किया जाएगा. इससे उनका मनोबल निश्चित रूप से बढ़ेगा. मैं इस अवसर पर आप सभी को आने वाले सभी त्योहारों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं. मेरी कामना है कि आप सभी के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आए.

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