सपनों की ऊंचाई सिर्फ संसाधनों से तय नहीं होती...स्काईरूट के रॉकेट लॉन्च कर बोले पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि जब सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को खोला, तो देश के युवा, विशेषकर ‘जेन-जेड’ पीढ़ी, इसका पूरा लाभ उठाने के लिए आगे आए. आज 300 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप भारत के अंतरिक्ष भविष्य को नई उम्मीदें दे रहे हैं.

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पीएम मोदी ने किया स्काईरूट के रॉकेट का अनावरण.
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  • PM मोदी ने हैदराबाद में स्काईरूट इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन कर अंतरिक्ष स्टार्टअप के नवाचारों की सराहना की.
  • स्काईरूट का आर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने में सक्षम होगा.
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में 300 से अधिक स्टार्टअप तेजी से उभर रहे हैं, जो नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दे रहे हैं.
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नई दिल्ली:

पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को अंतरिक्ष स्टार्टअप ‘स्काईरूट' के पहले ‘ऑर्बिटल रॉकेट' का अनावरण कर नई प्रौद्योगिकियां तैयार करने के लिए ‘जेन जेड' पेशेवरों की सराहना की. पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हैदराबाद में ‘स्काईरूट इन्फिनिटी कैंपस' का उद्घाटन किया. कंपनी का ‘आर्बिटल रॉकेट विक्रम-1' उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर सकेगा.

उन्होंने कहा कि ‘जेन जेड' इंजीनियर, डिजाइनर, कोडर और वैज्ञानिक नयी प्रौद्योगिकियां तैयार कर रहे हैं. ‘जेन जेड' पीढ़ी का मतलब उन लोगों से है, जिनका जन्म 1997 और 2012 के बीच हुआ.

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अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र तेज़ी से उभर रहा

पीएम मोदी ने इस दौरान सरकार के 'ऐतिहासिक' अंतरिक्ष सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के परिणामस्वरूप स्काईरूट और अन्य इकाइयां इस तरह के नवाचारों के साथ सामने आई हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र तेज़ी से उभर रहा है. 300 से ज़्यादा अंतरिक्ष स्टार्टअप इस क्षेत्र को नई उम्मीदें दे रहे हैं.

पीएम मोदी ने कहा कि इन्फिनिटी कैंपस भारत की नई सोच, नवाचार और विशाल युवा शक्ति का प्रतिबिंब है. युवाओं का नवाचार, जोखिम उठाने की क्षमता और उद्यमिता नयी ऊंचाइयों को छू रही है. भारत की निजी अंतरिक्ष प्रतिभा दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही है. भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन रहा है. दुनिया में छोटे उपग्रहों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है.

सपनों की ऊंचाई संसाधनों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प से तय

पीएम ने कहा कि साइकिल पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से लेकर दुनिया के सबसे विश्वसनीय प्रक्षेपण यान विकसित करने तक, भारत ने साबित कर दिया है कि सपनों की ऊंचाई संसाधनों से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प से तय होती है. उन्होंने बदलते समय के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र का विस्तार स्पष्ट है, क्योंकि यह संचार, कृषि, समुद्री निगरानी, ​​शहरी योजना, मौसम पूर्वानुमान और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार बन गया है.

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PTI फोटो.

उन्होंने कहा कि यही वजह है कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए गए, सरकार ने इसे निजी नवाचार के लिए खोल दिया और एक नई अंतरिक्ष नीति तैयार की तथा स्टार्टअप उद्यमों और उद्योगों को नवाचार से जोड़ने के प्रयास किये गए. परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की भी योजनाएं हैं.

क्या है स्काईरूट इन्फिनिटी कैम्पस?

स्काईरूट इन्फिनिटी कैम्पस एक अत्याधुनिक केंद्र है, जिसमें लगभग 2,00,000 वर्ग फुट का कार्यक्षेत्र है और बहु-प्रक्षेपण यान के डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण के लिए हर महीने एक आर्बिटल रॉकेट बनाने में सक्षम है. स्काईरूट भारत की अग्रणी निजी अंतरिक्ष कंपनी है, जिसकी स्थापना पवन चंदना और भरत ढाका ने की है, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के पूर्व-छात्र, इसरो के पूर्व वैज्ञानिक और अब उद्यमी हैं.

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नवंबर 2022 में, स्काईरूट ने अपना सब-ऑर्बिटल रॉकेट, विक्रम-एस का प्रक्षेपण किया, जिससे वह अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाली पहली भारतीय निजी कंपनी बन गई. अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई थी, लेकिन देश की महत्वाकांक्षाएं कभी सीमित नहीं रहीं.

भारत के युवाओं के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘इसरो ने दशकों से भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नए पंख दिए हैं. उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वसनीयता, क्षमता और मूल्य (वैल्यू) ने इस क्षेत्र में भारत की विशिष्ट पहचान स्थापित की है. केवल पिछले छह से सात वर्षों में, भारत ने अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को एक खुले, सहकारी और नवाचार-संचालित ‘इको-सिस्‍टम' में बदल दिया है.भारत के युवा हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं और हर अवसर का सर्वोत्तम इस्‍तेमाल करते हैं.

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पीएम मोदी ने कहा कि जब सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को खोला, तो देश के युवा, विशेषकर ‘जेन-जेड' पीढ़ी, इसका पूरा लाभ उठाने के लिए आगे आए. आज 300 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप भारत के अंतरिक्ष भविष्य को नई उम्मीदें दे रहे हैं, इनमें से अधिकतर स्टार्टअप छोटी-छोटी टीम, कभी दो लोग, कभी पांच लोग, कभी किराये के एक छोटे से कमरे में सीमित संसाधनों के साथ, लेकिन नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के दृढ़ संकल्प के साथ शुरू हुए थे. उन्होंने कहा कि इसी भावना ने भारत में निजी अंतरिक्ष क्रांति को जन्म दिया है.

भारत की अंतरिक्ष क्षमता किफायती और विश्वसनीय

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास अंतरिक्ष क्षेत्र की ऐसी क्षमताएं हैं जो दुनिया में कुछ ही देशों के पास हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसकी अंतरिक्ष क्षमता किफायती और विश्वसनीय, दोनों है और यही वजह है कि दुनिया को देश (भारत) से काफी उम्मीदें हैं. उन्होंने कहा कि वैश्विक कंपनियां भारत में उपग्रहों का निर्माण करना चाहती हैं, प्रक्षेपण सेवाएं प्राप्त करना चाहती हैं और प्रौद्योगिकी साझेदारी चाहती हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए.

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इनपुट- भाषा के साथ

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