- PM नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था
- यात्रा के दौरान AI, साइबर सुरक्षा, कृषि, शिक्षा और डिजिटल भुगतान पर महत्वपूर्ण समझौते हुए थे
- प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर सैन्य हमलों या संबंधित किसी चर्चा की जानकारी नहीं मिली थी
केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना था और इस दौरान क्षेत्रीय सैन्य हमलों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी. विदेश मंत्रालय ने सदन को सूचित किया कि भारत न केवल पश्चिम एशिया की स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है, बल्कि अब तक पौने 5 लाख से अधिक नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने में सफल रहा है.
पीएम मोदी के इजरायल दौरे पर इन मुद्दों पर हुई थी चर्चा
राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 25-26 फरवरी 2026 को इजरायल का राजकीय दौरा किया था. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच भविष्य के तकनीकी और आर्थिक सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे.इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, कृषि, शिक्षा और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल रहे.
'ईरान हमले की नहीं थी कोई जानकारी'
सरकार से सवाल किया गया था कि क्या उन्हें इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर होने वाले हमले की जानकारी थी. इस पर स्पष्ट जवाब देते हुए मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान इस तरह के किसी भी सैन्य हमले या विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई थी.
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'सरकार ने चुना संवाद और कूटनीति का रास्ता'
सरकार ने यह भी साफ किया कि भारत मिडिल ईस्ट की स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है. भारत ने इस मुद्दे पर संवाद और कूटनीति का रास्ता चुना है. प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, अमेरिका और खाड़ी देशों (GCC) सहित कई क्षेत्रीय नेताओं से बात की है. इन बातचीत में नागरिकों की सुरक्षा और तनाव कम करने पर जोर दिया गया है. संघर्ष के मद्देनजर सरकार ने अब तक करीब पौने 5 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए खाड़ी क्षेत्र में जहाजों के सुरक्षित आवागमन के इंतजाम किए हैं.
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